1 यूहन्ना 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं और हम में सत्य नहीं।

पिछला पद
« 1 यूहन्ना 1:7
अगला पद
1 यूहन्ना 1:9 »

1 यूहन्ना 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

यूहन्ना के पहले पत्र, आदरणीय पाप-स्वीकार नहीं करना बनाम पाप की वास्तविकता

सीधे अर्थ का कथन: यदि हम कहें कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो हम अपने आप को धोखा देते हैं और हम में सत्य नहीं।

पृष्ठभूमि का संक्षेप

1 यूहन्ना 1–2 अध्याय में प्रेरित यूहन्ना उस भरोसे की पुष्टि करते हैं जो मसीही礼包 में है: यदि हमारे बीच प्रकाश है और हम lichamिक जीवन की कहानी नहीं बोलते, तो हमारे स्तर पर पवित्रता की गवाही दिखती है। यहाँ पाप की चर्चा एक परीक्षण के रूप में आती है—हम कितने ईमानदार हैं कि हम पाप करते हैं और उसे स्वीकारते हैं, और क्या परमेश्वर की कृपा और चंगाई को स्वीकार करते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • खुद से धोखा देना: यदि कोई कहे कि उसके भीतर कोई पाप नहीं है, तो वह सत्य से विमुख है। आत्म-प्रशंसा और आत्म-धोखा पाप का बड़ा कारण बनते हैं।
  • सत्य बनाम पाप का वास्तविक संघर्ष: बाइबल इस बात पर जोर देती है कि ईमानदार विवेक से पाप की वास्तविकता को स्वीकार करना, और परमेश्वर की रोशनी में आना ही चंगा करने का पहला कदम है।
  • जवाबदारी और चंगाई की दिशा: अगर हम पाप को न मानें, तो हम चंगाई की आवश्यकता से इनकार करते हैं; यदि हम स्वीकार करें, तो 하나님 का प्रभुयाही प्रेम पाप को पार कर देता है।

थीमेटिक बिंदु

  • ईमानदारी बनाम आत्म-धोखा
  • पाप की वास्तविकता और उसकी स्वीकार्यता
  • चंगाई की उपलब्धता और परमेश्वर की सत्यता

अन्य pás्टर्पथ (क्रॉस-रेफरेंसेस) और उनका छोटा परिचय

  • यूहन्ना 3:20–21 — जो सच बोलता है और जो सत्य को सुनता है, उसमें प्रकाश का अभिषेक होता है; यह पाप के खिलाफ ईमानदारी की पुष्टि है।
  • यRomans 3:23 — सभी ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से चूक गए हैं; यह पचौती-इकाई पाप के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है।
  • यूहन्ना 8:31–32 — सच मानना और सच्ची स्वतन्त्रता पाप से मुक्ति की चेतना देते हैं।

व्याख्या: क्रॉस-रेफरेंस बताती हैं कि पाप-स्वीकार न करना आत्म-भ्रम बन सकता है, पर सत्य को मानना ही परिवर्तन का मार्ग है।

कथन से सीख

यह वचन हमें यह सिखाता है कि ईमानदारी हमारी आध्यात्मिक चिकित्सा की शर्त है। यदि हम अपने भीतर पाप की कमी का दावा करते हैं, तो हम परमेश्वर की रोशनी से दूर हो जाते हैं। पर यदि हम पाप की वास्तविकता को मानकर उसे confess करते हैं, तो उसका समाधान और क्षमा उपलब्ध हो जाता है।

छोटा व्यवहारिक पाठ

  • परमेश्वर के प्रकाश में अपने आचरण की जाँच करें और उसकी कृपा से परिवर्तन की अपेक्षा रखें।
  • स्वयं को न मानें, बल्कि प्रभु की सत्यता को स्वीकारें और accordingly जीवन बदलें।

नोट: इस पंक्ति के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी सार परिशिष्ट जरूरी संदर्भों से मिलते हैं। अगर उपलब्ध हो, तो उनके ठोस वाक्य उद्धरण स्पष्ट रूप से उद्धृत किए जाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

रोमियों 3:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
रोमियों 3:23 (HINIRV) »
इसलिए कि सब ने पाप किया है और परमेश्‍वर की महिमा* से रहित है,

याकूब 3:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
याकूब 3:2 (HINIRV) »
इसलिए कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं* जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य* है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।

सभोपदेशक 7:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
सभोपदेशक 7:20 (HINIRV) »
निःसन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिससे पाप न हुआ हो। (रोमि 3:10)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें