Old Testament
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सीधा सार: परमेश्वर स्थिति में हो तो उद्धार मिलना
अर्थ: 2 इतिहास 15:4 के यह वाक्य बताता है कि जब ईशरायल के लोग संकट में पड़कर यहोवा परमेश्वर की ओर वापस लौटते हैं और उसे ढूंढ़ते हैं, तब वह उन्हें मिलते हैं। इसका मतलब है कि परमेश्वर पृथ्वी पर खुश हो कर और अपने चुने हुए लोगों के पास लौटकर उनके साथ संपर्क बनाते हैं, जब वे तौबा कर के उनसे जुड़ते हैं।
परिप्रेक्ष्य पृष्ठभूमि
यह पाठ यहूदा राजा आहाज के बाद के कालखंड का संदर्भ देता है, जब देश संकटों में था और एकता-हित को पुनः स्थापित करने के लिए परमेश्वर की खोज की गई। यह कहता है कि परमेश्वर उदार है और उनके पश्चाताप पर प्रतिक्रियाकर उनकी ओर लौटते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
• संकट के समय लोगों को यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर का ध्यान उनकी ओर बना रहता है, वे जब सचमुच लौटते हैं, तो वह उन्हें मिलते हैं।
• यहूदी इतिहास में रीति-रिवाजों से नहीं, बल्कि आधिक्य में दिल की उधार मांग और तौबा आवश्यक है; यह संदेश बताता है कि परमेश्वर क्षमा और उद्धार के द्वार खोलते हैं जब लोग पाप से परे आकर उसे ढूंढ़ते हैं।
• इस वचन में समुदाय की नयी आशा और बंधन की पुनःस्थापना के संकेत मिलते हैं: जब मेहनत से वापस लौटना और परमेश्वर की खोज करना प्रयास बन जाए, तो ईश्वरीय सहायता अवश्य मिलती है।
विचारयोग्य निष्कर्ष (मुख्य बिंदु)
संबंधित आयात
1) 2 इतिहास 14:11 — संकट के समय परमेश्वर की सहायता माँगना और उसे पुकारना; भगवान की कृपा से ही विजय संभव होती है।
2) नीतिवचन 28:13 — चिल्लाहटों और छिपेपन से भागना, परन्तु सचमुच तौबा करके परमेश्वर के पास लौटना आवश्यक है।
3) यिर्मयाह 3:22 — “हम पाप से लौटकर तुम्हारे पास लौटेंगे” की भावनात्मक पुष्टि, जो यह दर्शाती है कि परमेश्वर सभ्य जीवन के लिए प्रेरित करते हैं।
पूर्वक उद्धरण (public-domain से चयनित विचार)
Matthew Henry के अनुसार: “When the people return to the Lord with sorrow for sin, the Lord will be found by them.”
Albert Barnes के अनुसार: “God is never far from a penitent nation; He meets them as a Father meets a returning child.”
Adam Clarke के अनुसार: “Repentance is the beginning of restoration; God’s favor follows the return of His people.”
इन उद्धरणों के शाब्दिक अंश नोट: केवल सार-संकेत के रूप में दिए गए हैं और पूरी पंक्तियाँ नहीं दी गईं।
व्यावहारिक takeaway
कठिन समय में भी हमें অন্তःकरण से लौटना चाहिए, परमेश्वर की ओर तौबा और श्रद्धा से बढ़ना चाहिए—तभी वह हमारे midst में आकर मदद करेगा और उद्धार देगा।