2 इतिहास 17:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और इसके बाद जिक्री का पुत्र अमस्याह, जिसने अपने को अपनी ही इच्छा से यहोवा को अर्पण किया था, उसके साथ दो लाख शूरवीर थे।

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2 इतिहास 17:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 17:16 — immediate setting

यह वचन इस प्रकार के ऐतिहासिक घटनाक्रम के बीच आता है जहाँ यहूदा के राजा यहोशफात के प्रशासन के अंतर्गत देश-भर के प्रमुख राजाओं के साथ परमेश्वर की आज्ञाओं की पालना और आराधना के पुनर्जीवन का सिलसिला चल रहा था। इस पद के ठीक पहले नीति-निष्ठ शासन और युद्ध-योग्यता के संदर्भों के बावजूद, यहाँ जिक्री के पुत्र अमस्याह का उल्लेख आता है—जो अपने मन के अनुसार यहोवा को अर्पण करने का प्रयास कर रहा था, परन्तु उसकी आज्ञा-पालन की गहराई शंका और आत्म-स्वार्थ से प्रभावित दिखती है।

धर्मशास्त्र का पाठ और विश्वास पर उसका संकेत

यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के साथ निष्ठा केवल बाहरी कर्मों या सामुदायिक धार्मिकता पर नहीं मापा जाता, बल्कि दिल की आस्थाओं और प्रेरणाओं पर मापा जाता है। अमस्याह की भूमिका संकेत देती है कि राजा होने के नाते उसे यहोवा की आज्ञाओं के पालन में सावधानी बरतनी चाहिए थी, परंतु सत्ता के कारण वह अपने मन की इच्‍छाओं को सर्वोपरि मान रहा था। इसका कटाक्ष यह है कि प्रभावशाली जीवनचर्या भी यदि परमेश्वर के निर्देशों से भटक जाए, तो वह आत्म-उत्पादन और आत्म-स्वार्थ को बढ़ावा देता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता

  • अपने मन के अनुसार अर्पण करना: आत्म-स्वार्थ और अपने विचारों को सर्वोपरि मानना—और यह दर्शाता है कि निर्भय श्रद्धा नहीं, बल्कि स्वार्थ-आधारित धर्म है।
  • दो लाख शूरवीर: असत्य को दबाने या वास्तविक धार्मिक परिवर्तन में बाहरी शक्ति को haupts मानना—पर यह दिखाता है कि केवल संख्या से धर्म की पुष्टि नहीं होती; इरादा और हृदय की दिशा मायने रखती है।

सेमी-सम्बन्धी अन्य आयातित पंक्तियाँ

— यह पाठ इसी खंड में दो अन्य प्रमुख विचारों से जुड़ता है: पहला, परमेश्वर की आज्ञाओं के पालन में कड़े नियम और दूसरा, नीति-नियमन के भीतर सच्चे दिल की महत्ता।

क्रॉस-रेफरेंसे:

1) 2 इतिहास 17:16 के समान विचार को संदर्भित करते हुए अन्य स्थान यह दिखाते हैं कि बाहरी बल के बजाय हृदय की निष्ठा परमेश्वर के लिए अधिक मूल्यवान है।

2) भजन 51 की आत्म-त्याग और दिल की सच्चाई पर बल देता है कि परमेश्वर कृपा से पहले, दिल की सौम्यता और प्रत्यक्षता चाहिए।

3) यशाय 1:11-17 में वर्णित है कि परमेश्वर केवल धार्मिक क्रियाओं से प्रसन्न नहीं होता; वह मन की निष्कपटता और न्याय की इच्छा करता है।

आज के लिए प्रायोगिक निष्कर्ष

- हमारा धर्म-काम केवल बाहरी दिखावे तक सीमित न रहे। हमारे विचार, प्राथमिकताएं और निर्णय यह दर्शाएँ कि हम सच में परमेश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित हैं।

- सत्ता या प्रभाव के चलते आचरण में ढील न दें; निष्ठा वह धुरी है जो विश्वास को जीवित रखती है।

- प्रतिदिन के कदमों में सूक्ष्मता, नम्रता और आत्म-चिन्तन आवश्यक है ताकि हम अपने स्वार्थ से ऊपर होकर ईश्वर की राह चुन सकें।

मैथ्यू हेनरी, Albert Barnes, Adam Clarke के सीधे उद्धरण आवश्यक हों तो मैं उपलब्ध समान विचारों के छोटे-छोटे अंश दे सकता हूँ (यदि उपलब्ध हों)।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 17:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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न्यायियों 5:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
न्यायियों 5:9 (HINIRV) »
मेरा मन इस्राएल के हाकिमों की ओर लगा है, जो प्रजा के बीच में अपनी ही इच्छा से भरती हुए। यहोवा को धन्य कहो।

न्यायियों 5:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
न्यायियों 5:2 (HINIRV) »
“इस्राएल के अगुओं ने जो अगुआई की और प्रजा जो अपनी ही इच्छा से भरती हुई, इसके लिये यहोवा को धन्य कहो!

1 इतिहास 29:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 इतिहास 29:9 (HINIRV) »
तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्‍न होकर खरे मन और अपनी-अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ।

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