Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 28:1 प्रेरितों के काम 28:2 प्रेरितों के काम 28:3 प्रेरितों के काम 28:4 प्रेरितों के काम 28:5 प्रेरितों के काम 28:6 प्रेरितों के काम 28:7 प्रेरितों के काम 28:8 प्रेरितों के काम 28:9 प्रेरितों के काम 28:10 प्रेरितों के काम 28:11 प्रेरितों के काम 28:12 प्रेरितों के काम 28:13 प्रेरितों के काम 28:14 प्रेरितों के काम 28:15 प्रेरितों के काम 28:16 प्रेरितों के काम 28:17 प्रेरितों के काम 28:18 प्रेरितों के काम 28:19 प्रेरितों के काम 28:20 प्रेरितों के काम 28:21 प्रेरितों के काम 28:22 प्रेरितों के काम 28:23 प्रेरितों के काम 28:24 प्रेरितों के काम 28:25 प्रेरितों के काम 28:26 प्रेरितों के काम 28:27 प्रेरितों के काम 28:28 प्रेरितों के काम 28:29 प्रेरितों के काम 28:30 प्रेरितों के काम 28:31



प्रेरितों के काम 28:19 — संदर्भ और अर्थ
यह पद प्रेरित पौलुस के रोम में पहुँच कर देखे गए मुक़दमे के संदर्भ में एक प्रमुख मोड़ दर्शाता है। रोम के निवासी और यहूदी समुदाय के बीच बढ़ते तनाव के बीच पौलुस अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट कर देता है—यहूदियों के विरुद्ध नहीं, बल्कि रोम के सेठ के सामने उसका कानूनी दायित्व और प्रेरित होने के कारण उसका संदेश है। भली-भांति समझना जरूरी है कि पौलुस अपने देशवासियों के प्रति प्रेम और उनकी भविष्यवाणी-गति को देखते हुए भी अपने आधिकारिक उत्तरदायित्व को निभा रहा है।
मुख्य विचार
पौलुस का कथन यह बताता है कि उसका निष्कर्ष और दायित्व राज्य के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसकी सेवकाई के दायरे में है। यहूदी विरोध के बावजूद, वह कैसर के समक्ष अपने संदेश के प्रति सच और निष्पक्ष रहा।
मुख्य विषय
संबंधित आयतें (cross-references)
विवेचन और व्यावहारिक अनुप्रयोग
यह verses बताती है कि ईश्वर की बुलाहट कभी-भी मानव-तथ्यों के विरुद्ध नहीं जाती; कानून के दायरे में रहते हुए भी सुसमाचार की स्वतंत्रता बनी रहती है। यह भी संकेत देता है कि सार्थक संदेश तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक वह मानवीय व्यवस्था के साथ सम्मानपूर्ण וב सहाय्यता के साथ प्रस्तुत न हो। आधुनिक जीवन में यह सिखाता है कि कठिनाईयों के बीच भी नैतिकता और सत्य पर अडिग रहना चाहिए, और हमारे प्रयासों का लक्ष्य परमेश्वर की महिमा और लोगों की भलाई होनी चाहिए।
संक्षिप्त संगति और निष्कर्ष
28:19 में पौलुस यह स्पष्ट करता है कि उसका विरोध राजनीतिक अथवा लोगों के प्रति नहीं, बल्कि सच और सेवकाई के उत्तरदायित्व के प्रति है। वह कैसर के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करके दिखाता है कि वह अपने लोगों पर दोष लगाने नहीं आया, बल्कि एक विश्वासी दूत के रूप में अपने मिशन को निभा रहा है। इस संदेश का संदेश: ईश्वर के बुलावे पर चलते रहते हुए भी कानून-व्यवस्था का सम्मान करना और परमेश्वर की योजना के अनुरूप चुप नहीं बैठना।
मूल उद्धरण-उद्धृत विचार: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रचलित टिप्पणियों से जो पंक्तियाँ सीधे उद्धृत की जाएँ, वे नीचे उल्लेखित हैं: “पूर्ण दायित्व के साथ न्याय-संगत उत्तर देना चाहिए।” (यदि उपलब्ध हों तो उल्लेखित टिप्पणियाँ पाठ के अनुरूप संक्षेप में समाहित की जाएँ।)