Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
कुलुस्सियों 2:1 कुलुस्सियों 2:2 कुलुस्सियों 2:3 कुलुस्सियों 2:4 कुलुस्सियों 2:5 कुलुस्सियों 2:6 कुलुस्सियों 2:7 कुलुस्सियों 2:8 कुलुस्सियों 2:9 कुलुस्सियों 2:10 कुलुस्सियों 2:11 कुलुस्सियों 2:12 कुलुस्सियों 2:13 कुलुस्सियों 2:14 कुलुस्सियों 2:15 कुलुस्सियों 2:16 कुलुस्सियों 2:17 कुलुस्सियों 2:18 कुलुस्सियों 2:19 कुलुस्सियों 2:20 कुलुस्सियों 2:21 कुलुस्सियों 2:22 कुलुस्सियों 2:23



कुलुस्सियों 2:21 पर टिप्पणी — “यह न छूना, उसे न चखना, और हाथ न लगाना”
सीधे अर्थ की घोषणा: यह वाक्य एक व्यवहारिक नियम का उद्धरण है जो मानवीय पर जोर देता है कि धार्मिक या परंपरागत नियंत्रणों के कारण महत्त्वहीन उपरत्नों से दूरी बनाये रखना चाहिए—बगैर वास्तविक आंतरिक परिवर्तन के बाहरी नियमों का कठोर पालन चेतनात्मक लाभ नहीं देता।
संदर्भ पृष्ठभूमि
पौलוס ने कुलुस्सियों के मसीही समुदाय को एक स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाहरी रीति-रिवाजों, खासकर धार्मिक नियमों के उल्लंघन से जुड़ी सावधानियाँ हमारे चाल-चलन में अत्याधिक नियंत्रण नहीं बनें; बल्कि यीशु में नया जीवन और संतुष्टि ढूंढ़नी चाहिए। यहाँ “यह न छूना, उसे न चखना, हाथ न लगाना” जैसे कथनों से वह उन अनावश्यक नियमों को इंगित करता है जो कुछ विशिष्टताओं को बनाए रखने के लिए बनाये गये थे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
संदर्भित पाठ से मिला संबल
यह विचार कोलुस्सी 2:18–23 के समग्र संदर्भ में पढ़ना उपयोगी है, जहां दिखाया गया है कि बाहरी धार्मिक-आचरण, भले ही दिखने में पवित्र लगें, यदि दिल में साधना का परिवर्तन नहीं है, तो वह कटौती-योग्य बन जाते हैं।
अन्य प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसेज
– मत्ती 15:11: पवित्रता मन और उद्गार से आती है, बाहरी स्नान-धार्मिकता मात्र नहीं।
– रोमियों 14:17: परमेश्वर की राज्यलिंग-जीवन मेंrául आंतरिक शांति और दयालुता है, न कि खाने-पीने के नियमों पर निर्भरता।
– इफिसियों 2:8-9: उद्धार अनुग्रह से है, न कि अच्छे कर्मों से; लिहाजा बाह्य नियमों का न्यन्त्रण नहीं बनता परमेश्वर की महिमा का आधार।
कतिपय शिक्षण उद्धरण (संदर्भित, सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सार से)
मार्था हेन्री (Matthew Henry) ने कहा, धार्मिक कृत्रिमताओं के पीछे असली जीवन नहीं चलता; “नीतियों का पालन भीतर की कृपा से उपजना चाहिए।” यहाँ यह समझना आवश्यक है कि बाहरी देह-रचना विश्वास का पूर्ण दायरा नहीं बना सकती।
Albert Barnes ने कहा, यह चेतावनी स्पष्ट करती है कि कुछ परंपरागत नियम केवल बाहरी आचरण को बनाये रखते हैं, परन्तु आंतरिक सन्तोष और विश्वास को नहीं।
Adam Clarke ने बताया कि शारीरिक नियंत्रणों की सीमा है; यदि दिल बदला नहीं, तो नियमों का कठोर पालन ढोंग के समान है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद हमें स्मरण कराता है कि मसीह में सचाइयाँ और नयी जिंदगी भीतर से आती हैं, न कि बाहरी नियमों के अटूट पालन से। जीवन का वास्तविक परिवर्तन ईश्वर के उद्धार-कृत आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है, जहाँ प्रेम, विनम्रता और नैतिक विवेक प्रमुख रहते हैं।