Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इब्रानियों 3:19 — प्रवेश का अविश्वास
पदकथन की पृष्ठभूमि: इस पद में लेखक जैसाकि पहचाने जाते हैं, परमेश्वर की प्रसिद्ध व्यवस्था और कर्तव्यनिष्ठ विश्वास के मार्ग पर यहूदी-ख़ास कर मूर्तिप्रचलित अवस्था के भीतर है। वे यह दर्शाते हैं कि इतिहास में इस्राइल के कुछ जन परमेश्वर के बुलावे पर भी प्रवेश नहीं कर सके, क्योंकि उनके दिल में अविश्वास था।
ईश्वर और विश्वास का पाठ
इस वचन से स्पष्ट होता है कि प्रवेश केवल उनकी कृपा और विश्वास के साथ संभव है, न कि केवल कर्मकांडों या बाहरी धार्मिक गतिविधियों से। परमेश्वर ने वादे का अवसर प्रस्तुत किया, पर अविश्वास ने उसे रोका। यह न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि हर पीढ़ी के भरोसे और निर्भरताओं के बारे में एक चेतावनी है कि विश्वास की कमी आत्म-रूढ़ि और अवरोध बन सकती है।
मुख्य शब्द और imagery की स्पष्टता
संबंधित बाइबिल अंश
कई पंक्तियाँ इस विचार को मजबूत करती हैं कि विश्वास ही वह मार्ग है जो ईश्वर के वचनों के अनुरूप जीवन देता है:
नोट: उपरोक्त संदर्भ केवल विचार के संकेत हैं, पूर्ण शास्त्र पाठ नहीं दिखाते।
2-3 सारगर्भित cross-reference with brief notes
- युधिष्ठिर नहीं, बल्कि विश्वास का मार्ग: यह वचन ईश्वर की प्रतिज्ञा पर निर्भर है, न कि मनुष्य के कर्मों पर।
- विश्वास बनाम अविश्वास: दृढ़ विश्वास से ही प्रवेश संभव है, अन्यथा आत्मिक शांति नहीं मिलती।
आज के लिए आवेदन
हममें से प्रत्येक के लिए यह पाठ चेतावनी है कि पूर्वाग्रह, संदेह, या क्षणिक असंतोष भी हमारे आध्यात्मिक प्रवेश को रोक सकता है। विश्वास को जीवित रखने के लिए दैनिक परमेश्वर के वचनों को स्मरित करें, प्रार्थना में संगत रहें, और व्यवहार में उसकी ईमानदार आज्ञाओं का पालन करें। जहाँ दिल में अविश्वास ने जन्म लिया है, वहाँ कृपापूर्ण चंगा करने के लिए पवित्र-अभय के साथ निर्णय लें: विश्वास से ही हम उस विश्राम-प्राप्ति के प्रवेश को फिर से प्राप्त कर सकते हैं जो भगवान ने हमारे लिए चुना है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain commentators)
उनके विचारों के अनुसार मोड़:
Matthew Henry: "God by His promise invites them to enter, but unbelief shuts them out." (in paraphrase; exact wording from Henry may be contextually inferred)
Albert Barnes: अविश्वास के कारण आशीषों का प्रवेश बंद हो जाता है; विश्वास ही प्रवेश का मार्ग है।
Adam Clarke: अविश्वास के कारण वह पिछड़ जाते हैं; विश्वास के साथ प्रवेश संभव है।
इनमें से कोई एक पंक्ति सीधे उद्धृत नहीं है, पर तीनों commentators के सामान्य सिद्धांतों के अनुरूप यह विचार मिलता है कि प्रवेश विश्वासी के दृढ़ विश्वास पर निर्भर है, जबकि अविश्वास उसे रोक देता है।