Old Testament
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इब्रानियों 8:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यदि मसीह पृथ्वी पर होता तो कभी याजक न होता, इसलिए कि पृथ्वी पर व्यवस्था के अनुसार भेंट चढ़ानेवाले तो हैं।
इब्रानियों 8:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 8:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 7:11 (HINIRV) »
तब यदि लेवीय याजक पद के द्वारा सिद्धि हो सकती है (जिसके सहारे से लोगों को व्यवस्था मिली थी) तो फिर क्या आवश्यकता थी, कि दूसरा याजक मलिकिसिदक की रीति पर खड़ा हो, और हारून की रीति का न कहलाए?

गिनती 16:40 (HINIRV) »
कि इस्राएलियों को इस बात का स्मरण रहे कि कोई दूसरा, जो हारून के वंश का न हो, यहोवा के सामने धूप चढ़ाने को समीप न जाए, ऐसा न हो कि वह भी कोरह और उसकी मण्डली के समान नष्ट हो जाए, जैसे कि यहोवा ने मूसा के द्वारा उसको आज्ञा दी थी।

इब्रानियों 5:1 (HINIRV) »
क्योंकि हर एक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है, और मनुष्यों ही के लिये उन बातों के विषय में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, ठहराया जाता है: कि भेंट और पापबलि चढ़ाया करे।
इब्रानियों 8:4 का संदर्भ और उसका अर्थ
पद कहता है कि यदि मसीह पृथ्वी पर रहते तो वे अभी भी याजक होते, क्योंकि पृथ्वी पर व्यवस्था के अनुसार भेंट-चढ़ानेवाले मौजूद रहते हैं। इस बात का मुख्य प्रश्न यह है कि यीशु कहाँ सेवा करते हैं और क्यों नई व्यवस्था के संदर्भ में उनके याजकत्व की भूमिका अलग रूप में समझी जाती है। लेखक यह स्पष्ट करता है कि मसीह आकाश में धर्मी मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं, और उनकी भेंटें नयी व्यवस्था के अनुसार हैं—जो पृथ्वी पर केवल प्रतीकात्मक प्रावधान थे।
मुख्य अभिप्राय
यह पद स्पष्ट करता है कि मसीह का याजकत्व पृथ्वी पर नहीं बल्कि heavenly ईश्वर की व्यवस्था के अनुसार है। यदि वह पृथ्वी पर रहता, तो उनके समान याजक मान लिए जाते, क्योंकि पुराने नियम की व्यवस्था पृथ्वी पर भेंट-चढ़ाने वालों के लिए निर्धारित थी। लेकिन वे आकाश में एक नये विधान के अनुसार व्यवस्था करते हैं, जो आत्मिक और स्थायी भेंटों पर आधारित है—जिसमें उनका एक बार का बलिदान सभी के लिए अंतिम और पूर्ण है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संदर्भित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
1) मरकुस/यूहन्ना के याजकत्व के उल्लेख: पुराने व्यवस्था के याजकत्व की अस्थायी प्रकृति को दर्शाते हैं; यीशु की उच्चतम, ईश्वरीय आस्तित्व उनके याजकत्व के स्थायित्व को पुष्ट करता है।
2) रोमियों 3-5 की आत्म-रिक्तता और न्यायसंगतता का सिद्धांत: नया विधान कैसे मनुष्य के भीतर विश्वास से रक्षा और चिह्नित न्याय देता है।
3) प्रकाशितահայտ 5 का मध्यस्थता का चित्रण: आकाश में बगुलों के सामने यीशु का बलिदानपूर्ण पहनावा और गवाही।
व्यावहारिक विचार
हमारी भक्ति, दुःख-संवेदना, और विश्वास के समय में यह याद रखें कि मसीह ने एक बार पूर्ण बलिदान देकर सबके लिए रास्ता साफ किया है। पृथ्वी पर भेंटों की अस्थायी व्यवस्था से प्रेरित होकर हम अपनी पूजा को आत्मा और सत्य के साथ समर्पित करें—जो कि आकाशीय व्यावस्था में स्वीकार्य है।
संक्षेप
इब्रानियों 8:4 यह दिखाता है कि मसीह का प्रधान याजकत्व पृथ्वी-उन्मुख व्यवस्था से ऊपर है और आकाश-आधारित नई व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होता है। उनके बलिदान की परिपूर्णता और कर्मकांडों की समाप्ति स्पष्ट करती है कि भरोसे और विश्वास के द्वारा हम सीधे परमेश्वर के पास आते हैं, जिसे पुराने यज्ञों ने पहले संकेत किया था।
टिप्पणी नकल से उद्धरण
इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के संकलित विचारों से मुख्यी विचार नीचे सम्मिलित हैं, परंतु हम उनके पूर्ण उद्धरण यहाँ शामिल नहीं कर रहे हैं। यदि आवश्यक हो, मैं उनके विशेष वाक्यों के छोटे खंड उद्धरण दे सकता/सकती हूँ: