Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 14:1 यूहन्ना 14:2 यूहन्ना 14:3 यूहन्ना 14:4 यूहन्ना 14:5 यूहन्ना 14:6 यूहन्ना 14:7 यूहन्ना 14:8 यूहन्ना 14:9 यूहन्ना 14:10 यूहन्ना 14:11 यूहन्ना 14:12 यूहन्ना 14:13 यूहन्ना 14:14 यूहन्ना 14:15 यूहन्ना 14:16 यूहन्ना 14:17 यूहन्ना 14:18 यूहन्ना 14:19 यूहन्ना 14:20 यूहन्ना 14:21 यूहन्ना 14:22 यूहन्ना 14:23 यूहन्ना 14:24 यूहन्ना 14:25 यूहन्ना 14:26 यूहन्ना 14:27 यूहन्ना 14:28 यूहन्ना 14:29 यूहन्ना 14:30 यूहन्ना 14:31



यूहन्ना 14:12 का पठन-पाठन: विश्वासियों के लिए बड़ी आशा
इस पद में यीशु अपने शिष्यों से संबोधित करते हैं कि जो मुझ पर विश्वास करता है, वही वे काम करेगा जो मैं कर रहा हूँ, बल्कि उनसे बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ। यह वचन प्रभु यीशु के अंतिम समय के संदर्भ में है, जब वह मसीहाई मिशन के पूर्णता की दिशा में आगे बढ़ रहे थे और उनके पुनः प्रवेश की आशा थी। शिष्य अब निर्भरता के साथ यीशु पर नहीं, वरन् पिता के साथ उनकी अभिन्नता और साझा सत्ता को भी अनुभव करेंगे।
कथन का अग्ला अर्थ: परमेश्वर के साथ विश्वास और शक्ति
यह वचन विश्वास पर आधारित क्रिया-पूर्वक घोषणा है—जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह वही कर सकता है जो मैं कर रहा हूँ। इसका आशय यह है कि यीशु की करुणा, शिक्षा, चंगाई और उद्दीपन का प्रभाव उनके अनुयायियों में बढ़ेगा, जब वे पवित्र आत्मा की शक्ति से प्रेरित होंगे। यह न केवल चमत्कारों की दृष्टि है, बल्कि प्रेम, विनय, सेवा और निर्भय प्रचार की भी गहरी माँग है।
महत्वपूर्ण शब्द और दृश्य)
समान विचार: अन्य बाइबल पाठ से जुड़ाव
- प्रेरितों के कार्य 1:8 में पवित्र आत्मा की शक्ति आते ही शिष्य समुदाय के भीतर साहस और प्रचार-कार्य में वृद्धि होती है; यह उसी सिद्धांत का व्यापकण है कि ईश्वर के लोग उनके कार्यों में भाग लेते हैं।
- मत्ती 28:19-20 में महान आयोग में यीशु ने कहा कि सभी जनों को शिक्षा दें और उनके लिए यीशु के साथ राज्य-प्रकाश बने—यही विश्वास का फल है।
- गलातियों 5:22-23 में फल-आमतः आत्मा के प्रभाव के परिणाम बताए जाते हैं—प्यार, खुशी, peace, धैर्य, जो विश्वास के साथ प्रेरित जीवन को दर्शाते हैं।
पवित्र आत्मा, विश्वास और आज
यह पद हमें याद दिलाता है कि मसीह के बाद भी ईश्वर की शक्ति, आत्म-समर्पण और प्रेम के साथ रहने पर जीवन में परिवर्तन संभव है। जब शिष्य यीशु की राह में चलते हैं, वे भी संसार में चमत्कारिक नहीं, बल्कि चरित्र-परिवर्तन और सेवा-उत्पादन के कार्य करते हैं।
आज का अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस
- प्रेरितों के कार्य 1:8: शिष्यों में आत्मा की शक्ति से साहस और प्रचार-कार्य की वृद्धि पर संकेत। इसका संबंध उस कथन से है कि जो मुझ पर विश्वास करेगा, वे भी वही करेंगे।
- मत्ती 28:19-20: सभी जाती को शिक्षा देने और यीशु के साथ रहने की शिक्षा—विश्वास के फलस्वरूप मिशन के व्यापक प्रसार की प्रेरणा।
- गलातियों 5:22-23: आत्मा के फल—प्रेम, आनंद, शांति आदि—जो विश्वास के जीवन का दृश्य-परिणाम हैं।
चेतावनी/उद्धृत टिप्पणी स्रोत: नीचे उद्धृत नहीं बदला गया टेक्स्ट, पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से प्रवृत्त विचारों का सार-संयोजन एक ही प्रवाह में प्रस्तुत किया गया है। यदि आप चाहें तो उन्हीं के संकलनों से विशिष्ट एक-एक वाक्य उद्धरण उपलब्ध कराया जा सकता है।