लैव्यव्यवस्था 24:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पशु का मार डालनेवाला उसका बदला दे, परन्तु मनुष्य का मार डालनेवाला मार डाला जाए।

लैव्यव्यवस्था 24:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का स्पष्ट सार

लेव्यव्यवस्था 24:21 के अनुसार, किसी पशु का मार डालना अगर बदला मांगता है, तो बदला देना चाहिए; परन्तु मनुष्य के मार डालने वाले के लिए उसी तरह का दंड देना उचित माना गया है। यह कानून मानव जीवन की अटल मान्यता को दर्शाता है कि जीवन एक अनमोल अधिकार है और हिंसा का प्रतिकार उचित न्याय के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह कविता सारस्वत कानूनों के समूह में है जो พระवर्त्तमान सामाजिक-न्याय व्यवस्था का भाग है। परमेश्वर ने इस समय के लिए सामाजिक सुरक्षा और निष्पक्ष दंड-प्रणाली स्थापित की ताकि समुदाय में शांति बनी रहे। सही दंड-प्रणाली के बिना समुदाय में अराजकता फैल सकती थी। यह नियम उन परिस्थितियों के लिए है जहाँ हिंसा का प्रतिशोध लिया जाता है और यह व्यक्तिगत बदले की भावना को सीमित करता है—हथियार उठाने से पहले अदालत के निर्णय की अपेक्षा की जाती है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • न्याय और संतुलन: जीवन की सुरक्षा के लिए आत्म-हिंसा पर रोक और आवश्यक दंड के लिए संस्थागत व्यवस्था की स्थापना।
  • मानवीय दृष्टिकोण: मानवीय जीवन की कीमत अत्यंत ऊँची है; पशु-हत्या के मामले में भी मितव्ययिता और उचित प्रतिशोध का अनुपात माना गया है।
  • स्वतंत्र निर्णय नहीं: हर व्यक्ति को अपने लगे हुए अपराध के लिए वही परिणाम भुगतना चाहिए; अदालत के निर्णय के अनुसार ही दंड निर्धारित हो।

संयुक्त टिप्पणी — प्रसिद्ध टिप्पणीयों के संकलन (संक्षेप)

इस वाक्य पर दार्शनिक और धार्मिक पंक्तियों के आधार पर प्रमुख विद्वानMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke ने अलग-अलग किन्तु सामंजस्यपूर्ण बिंदुओं को प्रस्तुत किया है:

Matthew Henry का कहना है कि हर हत्या का दंड सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि समाज में भय और सुरक्षा बनी रहे; यह दंड संतुलन बनाकर अन्याय को रोकता है।

Albert Barnes ने यह रेखांकित किया कि यह नियम उन मामलों पर लागू है जहाँ तुरंत बदला लेने की प्रवृत्ति उठती है; कानून ने ऐसी प्रवृत्ति को नहीं बढ़ने दिया।

Adam Clarke ने इसे मनुष्य के जीवन की एक असीमित मूल्यशीलता के रूप में समझाया और यह भी जोड़ा कि पशु-हत्या के लिए दंड भिन्न हो सकता है क्योंकि यहाँ चोट भिन्न प्रकार की सामाजिक मिसाल बनी।

विवेकपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसे

बाइबल के अन्य संदर्भ जो इस विचार को स्पष्ट करते हैं:

  • गिनती 35: कानून में शरण-स्थल और हत्या-निवारण के नियम—यह दिखाता है कि मानव जीवन की सुरक्षा के लिए न्याय संरचना आवश्यक है।
  • व्यवस्था 19:11-12—न्याय में त्रुटि न हो, चिह्नित दंड के साथ ही अपराध का उत्तरक देता है; गलत-आचरण पर भी गाँव-समुदाय से सुरक्षा मिलती है।
  • याकूब 2:13—न्याय बिना प्रेम शोचनीय है; यह सत्यता बताती है कि दंड और दया के बीच संतुलन जरूरी है।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

हमारे सामाजिक जीवन में जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। यह वचन एक स्पष्ट स्मृति कराता है: हिंसा से बचना है और सक्षम संस्थागत न्याय के अंतर्गत ही दंड देना है। व्यक्तिगत बदले की भावना से बचते हुए—जहाँ जरूरी हो—न्याय की आधुनिक इकाइयों के साथ चलना चाहिए।

कथन-उद्धरण (संरक्षित)

कथन-उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्द अगर किसी स्थान पर उपलब्ध हों तो वे नीचे दिए गए पाठ के भीतर संक्षेप में उद्धृत किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लैव्यव्यवस्था 24:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“फिर जो कोई किसी मनुष्य को जान से मारे वह निश्चय मार डाला जाए। (मत्ती 5:21)

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“यदि कोई मनुष्य गड्ढा खोलकर या खोदकर उसको न ढाँपे, और उसमें किसी का बैल या गदहा गिर पड़े,

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