Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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पद का सहज अर्थ
लव्यव्यवस्था 6:30 में कहा गया है कि यदि पापबलि पशु के लहू में से कुछ भी मिलापवाले तम्बू के भीतर जाकर पवित्र स्थान पर पहुँच गया, तो उसका माँस नहीं खाया जाएगा और वह आग में जला दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्पष्ट है: पवित्रता की सीमा का उल्लंघन होने पर दंड और शुद्धि की व्यवस्था कठोर रूप से लागू होगी।
पृष्ठभूमि और प्रसंग
यह अध्याय स्निप्त-नियमों के अंतर्गत है जो मूसा के छात्रों के लिए परमेश्वर के सामने की पवित्रता को बनाए रखने के लिए दिए गए हैं। यह बताता है कि पवित्र स्थान और पवित्र कर्म कैसे संरक्षित रहें, ताकि गलती से भी पवित्र स्थल में अशुद्ध कर्म न घुस जाए। पापबलि पशु का लहू, जो आस्था और विशुद्धि को दर्शाता है, यदि गलत जगह पहुँचे तो उसका निष्कासन आवश्यक है।
व्याख्या एवं निरीक्षण
थीमेटिक निःसार
अन्य प्रासंगिक संदर्भ और उनके अर्थ
1) हिब्रू विश्लेषण में पवित्रता के नियम: परमेश्वर की महिमा और पवित्र स्थान के सम्मान के लिए ऐसे दिये गए नियम जो गलती से भी अशुद्धि का प्रवेश रोकें।
2) प्रायश्चर की प्रक्रिया: लहू का स्थान और उसका प्रयोग नियमों के अनुसार होना चाहिए; अन्यथा परिणाम नकारात्मक होते हैं।
3) निष्कासन और पूर्ण दमन: अपवित्रता के स्रोत का पूर्ण निष्कासन स्पष्ट करता है कि पवित्रता कितनी गंभीर है।
पवित्रता–जीवन में सीख
हमारे लिए संदेश यह है कि परमेश्वर के पवित्र स्थान और उसकी आदेश-व्यवस्था का सम्मान करना आवश्यक है। दायित्व के अनुसार गलतियों के बारे में स्पष्ट प्रक्रियाओं का पालन करके ही समुदाय की शुद्धता बनी रहती है।
संक्षिप्त शोध-पथ
यह कठोरतम नियम, पवित्रता के प्रतिबिंब के तौर पर न सिर्फ दंड, बल्कि परमेश्वर के आशीर्वाद और सुरक्षा की रक्षा का तरीका है।
2-3 क्रॉस-रेफरेंस और उनसे जुड़ी छोटी व्याख्या
– कृपया ध्यान दें: नीचे उद्धृत शाब्दिक नहीं है; संदर्भों के विषयगत सार को समझाने हेतु संक्षेप में दिए जा रहे हैं.
1) लेवी 4:11-12: पाप के दोष का लहू कैसे शुद्धि का प्रमाण बनता है; अशुद्धि के परिणामों से बचने के लिए प्रक्रियात्मक स्पष्टता आवश्यक है।
2) यूहन्ना 1:9: यदि हम व knowingly पाप करें, तो पिता के सामने हमारे पापों को स्वीकारना और शुद्ध होना आवश्यक है; पवित्रता को बनाए रखने की कृपा भी मौजूद है।
3) इब्रानियों 9:22: Since almost everything is purified with blood, and without the shedding of blood there is no forgiveness; यह नियम पुराने नियम की अनिवार्यता को दर्शाता है और आधुनिक पथ में भी शुद्धि के मार्ग को संकेत करता है।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
आपके जीवन में पवित्रता के नियमों का सम्मान कैसे हो? अपने आचरण की साफ-सफाई, खासकर तब जब आप ईश्वर के सामने प्रत्यक्ष सेवा करते हैं, उसी के अनुसार जाएँ। अस्थाई विकल्पों से बचें; स्पष्ट नियमों के अनुसार कदम उठाएं और यदि कुछ गलती हो जाए तो विधिवत उपाय अपनाएँ।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरण संभव नहीं थे, किंतु उनके सामान्य विचारों को सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के आधार पर समेकित ढंग से प्रस्तुत किया गया है।