Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
नहेम्याह 12:1 नहेम्याह 12:2 नहेम्याह 12:3 नहेम्याह 12:4 नहेम्याह 12:5 नहेम्याह 12:6 नहेम्याह 12:7 नहेम्याह 12:8 नहेम्याह 12:9 नहेम्याह 12:10 नहेम्याह 12:11 नहेम्याह 12:12 नहेम्याह 12:13 नहेम्याह 12:14 नहेम्याह 12:15 नहेम्याह 12:16 नहेम्याह 12:17 नहेम्याह 12:18 नहेम्याह 12:19 नहेम्याह 12:20 नहेम्याह 12:21 नहेम्याह 12:22 नहेम्याह 12:23 नहेम्याह 12:24 नहेम्याह 12:25 नहेम्याह 12:26 नहेम्याह 12:27 नहेम्याह 12:28 नहेम्याह 12:29 नहेम्याह 12:30 नहेम्याह 12:31 नहेम्याह 12:32 नहेम्याह 12:33 नहेम्याह 12:34 नहेम्याह 12:35 नहेम्याह 12:36 नहेम्याह 12:37 नहेम्याह 12:38 नहेम्याह 12:39 नहेम्याह 12:40 नहेम्याह 12:41 नहेम्याह 12:42 नहेम्याह 12:43 नहेम्याह 12:44 नहेम्याह 12:45 नहेम्याह 12:46 नहेम्याह 12:47
नहेम्याह 12:17 का संदर्भ —Context और अर्थ
यह पद नहेम्याह की पुस्तक में संपन्न शहर-निर्माण व उत्सव-आयोजन के भाग के साथ जुड़ा है। यीशु-समकालीन यहूदियों के लिए यहूदी मंदिर की महिमा और नगर-जनों की श्रद्धा का एक संगम है। यहाँ अबिय्याह का उल्लेख एक नाम-गाथा के रूप में आता है, जो समुदाय की स्मृतियों को एक सूत्र में बाँधता है: परमेश्वर के आशीर्वाद से सम्पन्न होना और एक दूसरे से प्रेरित होना।
मुख्य विचार
पद्य का केंद्र भाव यह है कि पवित्र पर्व-समारोह के समय नगर के विभागों में एकता और याददाश्त की दोहरी स्मृति बनी रहती है: एक ओर अबिय्याह जैसे पुरातन एवं विश्वासयोग्य व्यक्तियों का नाम लेकर उनके उदाहरण की तारीफ, दूसरी ओर मूर्तियाँ-निष्ठा के विरुद्ध एकात्मता कैसे बनी रहे,—यह सब मिलकर परमेश्वर के वायदों की स्थिरता को प्रमाणित करता है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध ग्रंथ-संदर्भ
– नहेम्याह 12:9-11; 12:24: संस्थागत पुकार और गाने-गाते मंत्री-समूहों की भूमिका दिखती है। यह संदर्भ यह दर्शाते हैं कि आराधना में व्यवस्थित नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता कैसे जुड़ती है।
– उर्मिया 31:7-9 जैसे धर्म-वचनों में स्मृति और सुरक्षित भविष्य की आशा पुनः सत्ता पाती है, जो नहेम्याह के उत्सव-आयोजन के साथ संगत है।
व्यावहारिक विचार
हम आज भी अपने जीवन में अतीत के नमूनों से शिक्षा लेते हैं। किसी भी समुदाय के लिए यह जरूरी है कि वह चर्चित नेताओं, प्रेरक किरदारों और धर्म-कथा-आशाओं को याद रखें ताकि अवकाशों में भी एकता बनी रहे। साहसी निर्णायक कदम, पवित्र जीवन के उदाहरण और सेवाभाव से समाज का अन्धकार दूर होता है।
छोटी-सी समापन समीक्षा
नहेम्याह 12:17 एक स्मृति-उत्सव की धारा है जो अविश्वास के बीच विश्वास को पुष्ट करती है। नामों को याद कर समुदाय एक धागे में बंधता है—प्रभु की महिमा और एक दूसरे के लिए जिम्मेदारियाँ दोनों उसी धरोहर के अंग बनते हैं।
Cross-references (संक्षिप्त संदर्भ पाठ)
1) नहेम्याह 12:9-11 — आराधना-प्रमुखों और मंदिर सेवकों की कड़ी। यह दिखाता है कि पवित्र दायित्व एक संगठित समूह-प्रयास से ही पूर्ण होते हैं।
2) नहेम्याह 12:24 — गवाहों की टोली और मंत्री-गण का मिलन। एकता से उत्सव का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ता है।
3) यिर्मयाह 31:7-9 — स्मृति और आशा के साथ भविष्य की योजना। अतीत के उदाहरण भविष्य की राह दिखाते हैं।
नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरण आवश्यक रहते हों तो उपलब्ध पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सुसंगत विचार मिलकर समन्वयित किए जाते हैं; फिलहाल यहां संक्षेप में उनके सामान्य संदर्भ-सहयोग की दिशा में तत्व दिए गए हैं।