Old Testament
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फिलेमोन 1Verse
फिलेमोन 1:1 फिलेमोन 1:2 फिलेमोन 1:3 फिलेमोन 1:4 फिलेमोन 1:5 फिलेमोन 1:6 फिलेमोन 1:7 फिलेमोन 1:8 फिलेमोन 1:9 फिलेमोन 1:10 फिलेमोन 1:11 फिलेमोन 1:12 फिलेमोन 1:13 फिलेमोन 1:14 फिलेमोन 1:15 फिलेमोन 1:16 फिलेमोन 1:17 फिलेमोन 1:18 फिलेमोन 1:19 फिलेमोन 1:20 फिलेमोन 1:21 फिलेमोन 1:22 फिलेमोन 1:23 फिलेमोन 1:24 फिलेमोन 1:25
फिलेमोन 1:19 पर व्याख्या
पौलुस इस पत्र के संदर्भ में अपनी आत्मीय मांग को एक स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में प्रस्तुत करते हैं।�nयह वाक्य उनके व्यक्तिगत दायित्व और रिश्वत-सी ऋण की भावना को दर्शाता है: वह स्वयं कहता है कि वह अपने हाथ से लिखकर कह रहा है कि वह तुझ को चुकाने के लिए “भर दूँगा”—यानी वह अपने पक्ष से पूरा कर देगा जो तुझ पर ऋण है। यहाँ “मेरा कर्ज” से आशय है फिलेमोन के प्रति पौलुस की prior से जुड़ी मित्रता और सेवा की मान-सम्मान, न कि आर्थिक देनदारी केवल। यह शब्द कितनी निष्ठा और परिश्रम से भरे हैं, यह दर्शाता है कि सुसमाचार के कारण एक भाई दूसरे के कर्ज से स्वतंत्र हो सकता है।
मुख्य भावार्थ
यह वचन पौलुस की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का संकेत है— वह फिलेमोन के लिए अपनी पूरी सहायता देने को तैयार है। साथ ही यह बताता है कि किस प्रकार मित्रता और विश्वास, बच्चों-जाति के रिश्तों से भी ऊपर उठकर एक देनदारी का अनुभव बनाते हैं। पौलुस कहते हैं कि उन्हें अपना कर्ज चुकाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि उनका प्रेम और भाईचारा ही सबसे बड़ा ऋण-चुकौती है; फिर भी वह स्वयं वचन देते हैं कि वे हर संभव सहायता करेंगे।
दो-तीन केंद्रीय विषय
समीपवर्ती पंक्तियाँ (Related passages)
1) मरकुस 14:8 और कुरिन्थियों 13:4-7 जैसी जगहें बताती हैं कि प्रेम और निष्ठा से किया गया कर्म ही वास्तविक मूल्य रखता है।
2) रोम 8:28—विश्वास में यह विचार कि परमेश्वर द्वारा जो अच्छाई निकले, वह भाईचारे के लिए भरोसे और मदद की ओर ले जाता है।
3) फलों 1:19—मित्रत्व की कद्र और देनदारी की रेखा स्पष्ट करती है कि सहभागिता और समर्पण कैसे एक साथ चलते हैं।
व्यावहारिक विचार
हम जिन भी रिश्तों में हों, उसमें पौलुस की तरह अपनी भूमिका निभाने का अभ्यास करें: जब भी सामने आए अवसर, दूसरों की मदद के लिए तैयार रहें। किसी के साथ सहयोग, भलाई या ऋण-चुकौती की तरह नहीं, बल्कि प्रेम और निष्ठा की भावना से करें। यह दिखाता है कि सुसमाचारी जीवन व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों रूप से नई दिशा देता है।
संक्षेप
फिलेमोन 1:19 में पौलुस अपने ऊपर के दायित्व को स्पष्ट करते हैं—मैं स्वयं चुकाऊँगा, और आप पर जो ऋण है उसे पूरा कर दूँगा—पर यह भी स्पष्ट करता है कि वास्तव में भाइयों के बीच प्रेम और निष्ठा सब से बड़ा “ऋण-चुकता” है। इसका संदेश है कि विश्वासी समाज में विश्वास, प्रेम और सामंजस्य से हर बाधा कम हो सकती है, और उद्धार के सच्चे अर्थ में सहभागिता मजबूत होती है।
कुछ स्पष्ट उद्धरणों के संकेत
इस संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हो सकते हैं; यहां पर उनसे लिया गया एक सटीक वाक्यांश यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है, बल्कि उनके विचारों की प्रेरणा के तौर पर समाहित किया गया है:
— “निष्ठा और प्रेम के साथ दिया गया कर्ज-चुकता ही वास्तविक मित्रता का प्रमाण है।” (सहयोगी टिप्पणीकारों के सार से प्रेरित सार)
Cross-references: रोम 12:10; गलातियों 6:2; याकूब 2:15-16