तीतुस 2:14 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिस ने अपने आप को हमारे लिये दे दिया, कि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले, और शुद्ध करके अपने लिये एक ऐसी जाति बना ले जो भले-भले कामों में सरगर्म हो। (निर्ग. 19:5, व्य. 4:20, व्य. 7:6, व्य. 14:2, भज. 72:14, भज. 130:8, यहे. 37:23)
तीतुस 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
तीतुस 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 9:14 (HINIRV) »
तो मसीह का लहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के सामने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीविते परमेश्वर की सेवा करो।

इफिसियों 2:10 (HINIRV) »
क्योंकि हम परमेश्वर की रचना हैं*; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

1 पतरस 2:9 (HINIRV) »
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5-6, व्य. 7:6, व्य. 14:2, यशा. 9:2, यशा. 43:20-21)
तीतुस 2:14 पर नयी हिन्दी टिप्पणी
यहीVerse ईश्वर की भक्ति और पवित्र जीवन के लिए एक उद्धारकर्ता के प्रेमपूर्ण उद्देश्य को स्पष्ट करता है: उसने अपने आप को हमारे लिए दे दिया ताकि हम हर प्रकार के अधर्म से छुड़ाए जाएँ और एक ऐसी जाति बन जाएँ जो भले-भले कामों में सरगर्म हो। यह प्रेरणा प्रकट करती है कि धर्म-संरक्षण केवल मुक्तिदात्री क्रिया नहीं, बल्कि जीवित परिवर्तन का लक्ष्य है: हमारे आचरण और दृष्टिकोण में लगन, प्रभु के आदर्शों के अनुरूप होना।
पद का पाठ और उसका विस्तृत स्पष्टीकरण
जो अपने आप को हमारे लिये दे दिया, ताकि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले, और शुद्ध करके अपने लिये एक ऐसी जाति बना ले जो भले-भले कामों में सरगर्म हो।
यह वचन्य संदेश दो प्रमुख पहलुओं पर केन्द्रित है: एक, ईश्वर का पुनर्स्थापनात्मक प्रेम—निर्लिप्त उत्सर्ग, ताकि हम अधर्म से मुक्त हों; दो, नैतिक-आचारिक परिवर्तन—एक ऐसी "जाति" बनना जो अच्छे कामों में सक्रिय रहती है। यह सिर्फ उद्धार का तथ्य नहीं, वरन् उद्धार का परिणाम भी है: जीवन में पवित्रता और सेवा की प्रवृत्ति।
章 के भीतर मुख्य सीख
अनुशासनात्मक अध्ययन: अन्य सम्बद्ध पाठ
यद्यपि यह पाठ एक विशिष्ट उद्धारक उद्देश्य दिखाता है, नीचे के किन्हीं पदों के साथ इसे जोड़ा गया है ताकि समझ स्पष्ट हो:
कई दृष्टिकोणों का संकलन
कई प्राचीन टीका-लेखकों के अनुसार इस वचन में तीन बिन्दु उभरते हैं: पहले, प्रेमपूर्ण देह-त्याग की पुण्यता; दूसरे, अधर्म से मुक्ति के साथ उद्धार की जिम्मेदारी; तीसरे, एक नई तरह की जाति—जो भलाई के कर्मों के माध्यम से चरितार्थ होती है। मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से मिलने वाला संकेत यह है कि उद्धार केवल दया का आवरण नहीं, बल्कि जीवन-चरित का परिवर्तन भी है।
कैसे समझें और कैसे लागू करें
– विश्वास के साथ अनुभव करें कि यीशु ने अपना जीवन दिया ताकि आप अधर्म से मुक्त हों; यह मुक्तिदान संकल्प के साथ जुड़ा है।
– नया जीवन स्व-पुनर्निर्माण के लिए है: शब्द-स्मरणों से नहीं, बल्कि दिनचर्या में भलाई के कर्मों से प्रकट होता है।
– समुदायिक जीवन में यह शिक्षा है कि हर व्यक्ति एक “जाति” है—परस्पर सहायता, नैतिकता, और सेवाभाव से परस्पर जुड़ा रहता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके छोटे उल्लेख
1) निर्ग. 19:5: यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों को अनोखे बनाते हैं और उनके लिये एक विशेष अनुपात रखते हैं—यह सिद्धांत यहाँ भी जीवित रहता है।
2) भज 72:14 और भज 130:8: उद्धारकर्ता का समर्थन और उनके उद्धार का उद्देश्य शुद्ध-चहूँ ओर के जीवन के लिए बना होता है।
3) यहे. 37:23: हर कदम पर परमेश्वर की इच्छा पर चलना और उसकी राहों पर स्थिर रहने की प्रेरणा देता है।
संक्षेपण
तीतुस 2:14 का सार है कि ईश्वर ने अपने आप को हमारे लिए दे दिया, ताकि हम अधर्म से छुड़ाए जाएँ और एक ऐसी जनता बनें जो भले कामों में सक्रिय रहे। उद्धार का उद्देश्य व्यक्ति की आस्था-जीवन में प्रभाव डालना है: एक नैतिक-आचारिक परिवर्तन जो प्रेम और सेवा से प्रकट होता है।