तीतुस 2:5 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और संयमी, पतिव्रता, घर का कारबार करनेवाली, भली और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्वर के वचन की निन्दा न होने पाए।
तीतुस 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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तीतुस 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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कुलुस्सियों 3:18 (HINIRV) »
हे पत्नियों, जैसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने-अपने पति के अधीन रहो। (इफि. 5:22)

उत्पत्ति 3:16 (HINIRV) »
फिर स्त्री से उसने कहा, “मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दुःख को बहुत बढ़ाऊँगा; तू पीड़ित होकर बच्चे उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा।” (1 कुरि. 11:3, इफि. 5:22, कुलु. 3:18)

तीतुस 2:5 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
यह पद आगमन-पत्र का एक हिस्सा है जहाँ प्रेरित पौलुस ने Titus के लिए स्पष्ट आचरणीय निर्देश दिए हैं ताकि ईसाई समुदाय विश्वसनीय और संतुलित चाल चले। यह विशेष रूप से घर-परिवार और समाज के भीतर महिलाओं के कर्तव्यों पर केंद्रित है, ताकि परमेश्वर के वचन की निन्दा न हो पाए। पुराने समाज-रितियों के दबाव में भी यह संदेश समाज की स्थिरता, संयम और पवित्रता का पाठ देता है।
मुख्य विचार
पद कहता है कि महिलाएं संयमी, पतिव्रता, घर का संरक्षक और अपने पति के अधीन रहनेवाली हों—ताकि ईश्वर के वचन की विनम्रता से रक्षा हो। यहाँ “आचरण” से तात्पर्य आंतरिक स्वभाव और दैनिक व्यवहार दोनों से है; न केवल पर्व-त्योहारों में पराकाष्ठा, बल्कि घरेलू जीवन में स्थिरता और मर्यादा आवश्यक है।
दो-तीन मुख्य विषय
सूत्रगत विचार और क्रॉस-रेफरेंस
इस संदर्भ में अन्य पवित्र ग्रंथ भी महिलाओं के आचरण और घरेलू जीवन की महत्ता पर बलते हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि यह निर्देश पुरुषों और महिलाओं के पारिवारिक कर्तव्यों की संतुलित समीक्षा का हिस्सा है, न कि केवल सामाजिक प्रदर्शन का।
इतिहास-भ्रम नहीं, व्यवहारिक अनुप्रयोग
लक्षित संदेश यह है कि महिलाओं के लिए घर-परिवार को एक संपन्न और सम्मानित जगह बनाना ईश्वर के उद्देश्य को आगे बढ़ाने का तरीका है। संयमी और पति के अधीन रहने की प्रवृत्ति से घर में शांति और समुदाय में ईश्वर के वचन की प्रभावशीलता बढ़ती है।
व्यावहारिक विचार
संक्षिप्त निष्कर्ष
तीतुस 2:5 प्रेरित पौलुस के अंतःकरण से निकला एक संतुलित आह्वान है—घरेलू जीवन में संयम, पवित्रता और पति-धर्म का पालन करते हुए समुदाय में ईश्वर के वचन की प्रशंसा और सम्मान बनाये रखना हमारा उद्देश्य है।
जोड़ियाँ
सम्बंधित पाठ: क्रमशः पहले कर्मसूत्रों में महिलाओं के आचरण के निर्देश, पारिवारिक एकता पर बल, और वचन की गरिमा।
नोट: उद्धरण संकेत केवल द्वितीयक टिप्पणी के लिए हैं; यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से उपलब्ध संक्षिप्त विचारात्मक उद्धरण सीधे शब्दों में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं ताकि मूल पाठ की स्वाभाविकता बनी रहे।