Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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अर्थ का सीधा सार
1 इतिहास 25:16 का यह पद यह बताता है कि नौवीं मत्तन्याह के नाम पर निकली लोक-गायन मंडली में उसके पुत्र और भाई समेत कुल बारह सदस्य थे।
संदर्भ पृष्ठभूमि
यह इतिहास का भाग दरबार-गीत-समूह (वर्तमान में मंदिर-यज्ञ-गीत-विद्या) के ठहराव और सेवा-सूची की जानकारी देता है। क्लेवरियों के गीतों के क्रम में 24 अध्यायों के अंत में अधिकारिक विभाजन और मंदिर-कार्य में वेव-यन्-यों का वर्णन है। यहाँ बारह गायक-समूहों का उल्लेख उनके क्रम और कर्तव्य के रूप में है, जो विशिष्ट नामों के साथ सेवा करते थे।
व्याख्यात्मक बिंदु
संकेतित थेमैटिक बिंदु
संदर्भ पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
यद्यपि मैं पूर्ण पद से उद्धरण नहीं दे रहा, निम्न संदर्भों से संगति स्पष्ट होती है:
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे लिए यह स्मरण कराता है कि ईश्वर के कार्यों में विविध सदस्यों की भागीदारी और सम्मान, परिवार-उत्पत्ति से आज की स्थानीय समुदाय-सेवा तक, एक संगठित और समर्पित समूह के रूप में संभव होती है। हर एक व्यक्ति अपने-अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा बनाए रखे, ताकि समुदाय की सेवाबुद्धि बनी रहे।
संक्षिप्त समेकन
नौवीं मत्तन्याह के नाम पर निकली मंडली के बारह सदस्य उनके परिवार-सम्बन्धों के आधार पर चयनित थे, जो एक पूर्ण-बंधन और व्यवस्थित सेवा हेतु एकता का प्रतीक बनाते हैं। यह एकता और कर्तव्य-निष्ठा का संदेश वर्तमान पाठ के लिए भी प्रासंगिक है।
केवल यदि आवश्यक हो, आप चाहें तो इस अनुभाग में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के टिप्पणी-उद्धरण केवल संक्षेप-रेखा के रूप में नीचे दिए जा सकते हैं, परन्तु पूर्ण उद्धरण नहीं जोड़े जा रहे हैं।