2 इतिहास 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर ने सुलैमान से कहा, “तेरी जो ऐसी ही इच्छा हुई, अर्थात् तूने न तो धन सम्पत्ति माँगी है, न ऐश्वर्य और न अपने बैरियों का प्राण और न अपनी दीर्घायु माँगी, केवल बुद्धि और ज्ञान का वर माँगा है, जिससे तू मेरी प्रजा का जिसके ऊपर मैंने तुझे राजा नियुक्त किया है, न्याय कर सके,

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2 इतिहास 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 1:11 – संदर्भ और सरल व्याख्या

स्थिति का आरम्भ: सुलैमान राजा के निर्वाचन के बाद परमेश्वर ने उसे एक विशिष्ट अवसर प्रदान किया।यहाँ राजा बनने के समय सुलैमान ने शासी अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका के साथ-साथ एक महान अधिकार माँगा—परमेश्वर से धन, ऐश्वर्य, या दीर्घ आयु नहीं, वरन् बुद्धि और ज्ञान की वर माँगना।

यह पाठ परमेश्वर के साथ विश्वास और नीति की दृष्टि

यह शब्द बताता है कि ईश्वर ने सुलैमान की ईमानदार, सेवक-उन्मुख इच्छा को किया स्वीकार—एक नेता जो धर्मकार्य में निपुण और प्रजा के न्याय के लिए समझदारी चाहता था। सफलता यहाँ केवल शक्ति नहीं, बल्कि नेक निर्णय लेने की क्षमता में है।

कुंजी शब्दों और रूपक की स्पष्टता

  • धर्मनिष्ठ इच्छा: धन-सम्पत्ति या शक्ति की नहीं, बल्कि ज्ञान-प्रकाश की चाह। यह दिखाता है कि सत्ता के साथ नैतिक और प्रबुद्ध निर्णय आवश्यक है।
  • न्यायसंचालक की भूमिका: राजा के रूप में सुलैमान ने जनता की समस्याओं को सही ढंग से हल करने के लिए बुद्धि माँगी—यह सत्ता का सुदृढ़ मिसाल है कि शासन की कुंजी विवेक में है।

संबंधित पाठ (cross-references) और उनके अर्थ

- नीति और न्याय के लिए ज्ञान माँगना: उदाहरण के रूप में अभिलक्षण में एक समान इच्छा; समकालीन धारणाओं में यह बताता है कि ईश्वर ऐसी सोच से प्रसन्न होता है जो समाज के कल्याण पर केन्द्रित हो।
- एक अन्य स्थान जहाँ बुद्धि और सलाह का महत्व दिखता है, वह है नीतिवचन या अन्य राजा-नायकों के चयन के समय ज्ञान के मूल्य की चर्चा।
- भविष्य में न्याय-व्यवस्था के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता भी इन आयामों के साथ उभरती है।

स्पष्ट जोड़: यह पाठ दिखाता है कि ईश्वर योग्य नेतृत्व के लिए गहरे नैतिक मूल्य देखता है—जहाँ ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण वर बनकर आता है—जो प्रजा के अधिकार और न्याय की रक्षा करेगा।

पूर्वसर्ग और पवित्र ग्रंथ से संबद्ध विचार

यह संदर्भ असल में सुलैमान की विनम्र माँग का प्रतीक है—जो दिखाता है कि परमेश्वर सहजता से मानता है जब राजा या नेता अपनी कुर्सी का दुरुपयोग नहीं, बल्कि समाज की अच्छी व्यवस्था के लिए मार्गदर्शन माँगता है।

आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • नेतृत्व में ज्ञान-प्रस्ताव को प्राथमिकता दें: धन-यश से पहले न्याय और विवेक की मांग करना नीति-निर्माण में स्थायित्व लाता है।
  • हम जहाँ भी मार्गदर्शन मांगते हैं, वहाँ ईश्वर की स्तुति में अपनी मंज़िल को प्रजातंत्र और समाज के लाभ के साथ जोड़ना चाहिए।

संक्षिप्त सार

परमेश्वर ने सुलैमान की सच्ची और उपयोगी इच्छा को सराहा—एक राजा जो न केवल अधिकार चाहता है, बल्कि न्याय के लिए बुद्धि और ज्ञान की वर माँगता है। यह पाठ यह सिखाता है कि नेतृत्व में सफलता विवेक, नैतिकता और परमेश्वर के मार्गदर्शन पर टिकी रहती है।

उद्धरण-कथन

यह प्रारम्भिक टिप्पणीMatthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke के विशिष्ट शाब्दिक उद्धरण सीधे पाठ में नहीं है; उनके विचार इस व्याख्या के संदर्भ में परंपरागत निष्कर्षों के रूप में सम्मिलित किए गए हैं, ताकि अहंकार के बिना एक संयुक्त, सुसंगत विवरण बन सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि वह ऐसा व्यक्ति है, जो भोजन के कीमत की गणना करता है। वह तुझ से कहता तो है, खा और पी, परन्तु उसका मन तुझ से लगा नहीं है।

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1 शमूएल 16:7 (HINIRV) »
परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, “न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके कद की ऊँचाई पर, क्योंकि मैंने उसे अयोग्‍य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।” (मत्ती 22:18, मर. 2:8, यूह. 2:25)

1 राजाओं 8:18 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 राजाओं 8:18 (HINIRV) »
परन्तु यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कहा, 'यह जो तेरी इच्छा है, कि यहोवा के नाम का एक भवन बनाए, ऐसी इच्छा करके तूने भला तो किया; (प्रेरि. 7:45-46)

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