Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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वाचनार्थिक सार: 2 इतिहास 1:9
इस पदकथन में राजा दाऊद के वचन के अनुसार अब पति राजा सुलैमान दत्तक माँगता है कि यहोवा का वचन पूरा हो जाए। वह प्रकटतः प्रभु के वचन की पूर्णता और अपने शासन की आस्था को एक साथ समाहित करता है: प्रभु ने उसे बहुत बड़ी संख्या में लोगों की प्रजा दिया है, जैसा कि पृथ्वी की धूल के कणों के समान है।
पृष्ठभूमि (Contextual background)
यह इतिहास के बड़प्पन के समय की दरार है जब सुलैमान राजा बना और दाऊद के राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में प्रभु के आशीष से सम्पन्न हुआ। दाऊद ने परमेश्वर से एक परम भक्त के रूप में वचन प्राप्त किया था, और अब सुलैमान अपने राजतंत्र की शुरुआत में उस वचन की पुष्टि चाहता है कि उसकी सेना और प्रजा प्रभु के आशीर्वाद से अनेक हो जाएँ।
Interpretive observations
Short thematic list
Related passages (cross-references) with brief explanations
Commentary insights (condensed from classical writers)
मैथ्यू हैनरी और ऐल्बर्ट बार्न्स के पारंपरिक विचार यह संकेत करते हैं कि सुलैमान की यह प्रार्थना भक्ती और विश्वास की गहराई की अभिव्यक्ति है—राज्य की वृद्धि तभी संभव है जब परमेश्वर की इच्छा और वचन के साथ सामंजस्य बना रहे। एडम क्लार्क भी इस दृष्टिकोण से जोड़ते हैं कि परमेश्वर के वचनों की पुष्टि राजसी सत्ता के लिए वास्तविक आधार बनती है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ संभव है):
“The king's prayer is a noble act of dependence on God, seeking the fulfillment of divine promise.”
Practical takeaway
अपने जीवन में भी हम तब प्रार्थना करें जब मार्ग में बड़ी अपेक्षाएँ हों। परमेश्वर के वचन पर भरोसा रखें, क्योंकि वही हमारे कामों में वृद्धि और सुरक्षा का स्रोत है।