Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 22:1 उत्पत्ति 22:2 उत्पत्ति 22:3 उत्पत्ति 22:4 उत्पत्ति 22:5 उत्पत्ति 22:6 उत्पत्ति 22:7 उत्पत्ति 22:8 उत्पत्ति 22:9 उत्पत्ति 22:10 उत्पत्ति 22:11 उत्पत्ति 22:12 उत्पत्ति 22:13 उत्पत्ति 22:14 उत्पत्ति 22:15 उत्पत्ति 22:16 उत्पत्ति 22:17 उत्पत्ति 22:18 उत्पत्ति 22:19 उत्पत्ति 22:20 उत्पत्ति 22:21 उत्पत्ति 22:22 उत्पत्ति 22:23 उत्पत्ति 22:24



उत्पत्ति 22:17 पर commentary (HINIRV)
सीधा अर्थ: परमप्रभु ने अब्रहाम के सामने यह वचन रखा कि उसका वंश अपार वृद्धि पाएगा—आकाश के तारों के समान अनगिनत और समुद्र तट के रेत की तरह बेपनाह। साथ ही उसका वंश शत्रुओं के नगरों का अधिकारी होगा। यह दायित्व केवल जन्म के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन की पुष्टि और आस्था की परीक्षा के लिए है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वचन तब आता है जब परमेश्वर ने अब्राहाम से गर्भवती होने की प्रतीक्षा के बीच पवित्र वचन दोहराया; यह उसका अटल वचन है जो उसके धैर्य, विश्वास और चरित्र पर आधारित है। उत्पत्ति 12 और 17 अध्यायों में भी परमेश्वर ने अब्राहाम को आशीर्वाद देने की प्रतिज्ञा की थी; यह वायदा उसका दृढ़ संकल्प है जो उनके वंश के माध्यम से विश्व के लिए Blessing बनेगा। यहाँ “आकाश के तारागण” और “रेतकणों के समान” जैसी अभिव्यक्तियाँ दयालू विस्तार में भविष्य की विशालता प्रस्तुत करती हैं—यह केवल संख्या का संकेत नहीं, बल्कि वैश्विक प्रभाव का बयान है।
व्याख्यात्मक बिंदु
क्रिस्प cross-references और संक्षेप व्याख्या
1) इब्रानियों 6:13-14 से प्रेरणा: परमेश्वर ने अब्राहाम से प्रतिज्ञा की सत्यता के लिए अपने नाम का संकल्प दिखाया—यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने वचन से कभी पीछे नहीं हटता।
2) उत्पत्ति 12:2-3: पहले यह आशीर्वाद प्रारम्भ हुआ; यहाँ इसकी पुष्टि और विस्तार मिलता है—वह वंश के माध्यम से सभी जातियों के लिए आशीष बनेगा।
3) भज 105:8-11 जैसे स्मरण: परमेश्वर के वचनों की स्थिरता और समयानुसार सच होने की गवाही देता है—आज भी विश्वासियों के लिए प्रेरणा है कि परमेश्वर के वचन दृढ़ रहते हैं।
पठन-उपयोगी व्यावहारिक निष्कर्ष
- विश्वास की परीक्षा के समय भी परमेश्वर का वचन स्थिर रहता है; हम उसे अपने जीवन के निर्णयों का आधार बनाएँ।
- वंश और प्रभाव से परे, आशीष का लक्ष्य ईश्वर के राज्य की सेवा और दूसरों के जीवन में blessings से प्रेरित करना है।
सार और एकीकृत संदेश
यह वचन एक केंद्रीय तथ्य देता है: परमेश्वर अपने विश्वासयोग्यों के लिए अद्भुत वृद्धि और सुरक्षा दे सकता है, और उनके वंश के माध्यम से वह दुनिया के लिए आशीर्वाद के मार्ग खोलता है। यह वृद्धि तब तक नहीं रुकती जब तक व्यक्ति परमेश्वर के मार्ग पर चलना नहीं छोड़ता; आकाश और पृथ्वी के संकेत एक दूसरे के पूरक हैं—विश्वास की पूर्णता में एक नस्सी नहीं, बल्कि एक गतिशील संतुलन।
ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से संकलित निष्कर्ष (संक्षेप)
एडम क्लार्क और ऐल्बर्ट बेयर्न्स के सामान्य टिप्पणी नीतियों के अनुसार, यह आशीर्वाद धार्मिक-आत्मीय और सामाजिक दायित्वों को प्रभावित करने वाला है; Matthew Henry के दृष्टिकोण में, यह आशीर्वादी “धार्मिक विश्वास के स्थायित्व” की पुष्टि है।