उत्पत्ति 15:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उसने उसको बाहर ले जाकर कहा, “आकाश की ओर दृष्टि करके तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है?” फिर उसने उससे कहा, “तेरा वंश ऐसा ही होगा।” (रोम. 4:18)

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उत्पत्ति 15:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 15:5 पर दृश्य की पंक्ति और विश्वास की आकाशगंगा

मुख्य interpretive point: परमेश्वर अवनि से कहता है कि तेरे बड़े वंश की गिनती आकाश के तारों जैसी होगी, यह निर्माण में ईश्वर की योजना और आस्था की द्योतक उद्घोषणा है। इब्रानी बुजुर्ग अब्राहम को यह संदेश देता है कि उसे संतान मिलेगी, भले ही वर्तमान अवस्था शून्य प्रतीत हो; यह वचन धीरज से आगे बढ़कर ईश्वर के कार्य की गारंटी बन जाता है।

कूटस्थ संदर्भ—साहित्यिक परिप्रेक्ष्य

घटना के संदर्भ में परमेश्वर अब्राहम के साथ एक व्यक्तिगत अनुबंध को पक्का कर रहा है। दृश्य में आकाश की गिनती—तारों की संख्या—पूर्व-आख्यान का एक प्रतीक है जो अनुवर्ती पीढ़ियों की असीमितता को दर्शाता है। इस वचन में भरोसा, निःसंतान स्थिति के बीच भी आशा और विवेकपूर्ण विश्राम का संदेश समाहित है। रोम 4:18 के संदर्भ में, पौलूस यह दिखाते हैं कि नेति-विश्वास के साथ, जिस प्रकार अवरुद्ध परिस्थितियों में भी “जिनके अनुसार विश्वास किया गया” वे ईश्वर के वचन को मानते हैं, उसी प्रकार पितरों के विश्वास को नयी पीढ़ियाँ भी निभाती हैं।

धर्मशास्त्रीय संकीर्तन—तीन प्रमुख विचार

  • समय-स्थिति चाहे कितनी भी कठिन हो, ईश्वर के वचन पर निर्भर रहना ही परम उद्धार का पथ है।
  • तारों का संकेत अवतार में भी आस्था के दायरे को चौड़ा करता है—परमेश्वर वह काल-परिमाण नहीं देखता जो मनुष्य देखते हैं।
  • वचन के अनुसार वंश बढ़ना एक आशीष है जो अंतहीन विश्वास की पुष्टि करता है—यह भविष्य की सुरक्षा, बहुविधता और कर्तव्य के साथ जुड़ा है।

निशान-आयोग: पुराण-रूप और न्यू-टेस्टमेंट से सम्बद्ध

1) आकाश में तारों की गिनती से प्रेरित विश्वास—यशायाह 40:26 जैसी रचना में भी स्वर्गीय मार्गदर्शन का प्रमाण मिलता है।

2) रोम 4:18 में बतलाया गया है कि “अवलोकन के बाहर भी विश्वास किया गया”—अब्राहम के उदाहरण के अनुसार, विश्वास एक ऐसी धुरी है जो नव-जीवन को संभव बनाती है।

3) इब्रानी नामावली में भी असीमित वंशावली की कल्पना विश्वास के साथ जुड़ी है, जिससे ईश्वर की शुद्ध योजना उजागर होती है।

आत्म-परिवर्तन के लिए विचार-विमर्श

- क्या आप अपनी वर्तमान परिस्थितियों में भी ईश्वर के वचन पर अडिग रहते हैं?

- क्या आप अपने जन्म के पीछे की योजना और आशीष में विश्वास बनाए रखते हैं, जब परिस्थितियाँ कड़वी लगें?

- किस प्रकार आप अपने जीवन में आस्था को “आकाश की ओर दृष्टि” कर ठहराते हैं ताकि ईश्वर की योजना सच हो जाए?

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 15:5 में ईश्वर का वादा दिखाता है कि विश्वास के पाँव में धैर्य लगाकर चलना ही सच्चे आशीष की कुंजी है। तारों की गिनती जैसी विशालता में भी, परमेश्वर अब्राहम के वंश की पुष्टि करता है—जो आगे चलकर उनकी पीढ़ियों के उद्धार के लिए एक ठोस आधार बनती है। रोम 4:18 के प्रकाश में यह स्पष्ट है कि विश्वास का जीवन समय-सीमा से ऊपर उठकर ईश्वर के वचन के समरूप धारण करता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

- रोम 4:18: अवरोधों के बावजूद विश्वास की आस्था को देखते हुए – “अवश्य भी जो कुछ कहा गया है, वह पूरा होगा”—यह कथन उस विश्वास को स्पष्ट करता है जो शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद ईश्वर की वाणी पर स्थिर रहता है।

- हिब्रियों 11:12 और 11:9-10 के संदर्भ में, आकाशीय वचन के प्रति विश्वास का बाहरी प्रदर्शन मिलने वाले उत्तरों के रूप में आता है, और यह बताता है कि वंशावली में आस्था का उत्पादन कैसे होता है।

नोट: जहां Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शास्त्रीय विचारों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हों, वे आवश्यक सुरक्षा के साथ उद्धृत किए जाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 15:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र तट के रेत के समान, अनगिनत वंश उत्‍पन्‍न हुआ। (उत्प. 15:5, उत्प. 2:12)

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रोमियों 4:18 (HINIRV) »
उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्वास किया, इसलिए कि उस वचन के अनुसार कि “तेरा वंश ऐसा होगा,” वह बहुत सी जातियों का पिता हो।

व्यवस्थाविवरण 1:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 1:10 (HINIRV) »
क्योंकि तुम्हारे परमेश्‍वर यहोवा ने तुमको यहाँ तक बढ़ाया है कि तुम गिनती में आज आकाश के तारों के समान हो गए हो। (इब्रा. 11:12)

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