Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 21:18 —Immediate setting
यह अध्याय इनहाब के पुत्र यहोशाफ़ात राजा के उत्तराधिकारी योराम का एक कठोर उदाहरण देता है। 2 इतिहास (पंक्तियाँ) में यह बताया गया है कि जब यह राजा अपने भाइयों के साथ अन्यायपूर्ण कदम उठाता है, तब परमेश्वर उसकी शक्ति और शासन के साथ एक चेतावनी के रूप में आगामी परिणामों को अद्यतन करता है। यह वाक्य उसी क्रम का भाग है जिसमें राजा के कर्मों के अनुसार परमेश्वर की न्याय और दया दोनों उभरती दिखती हैं।
यह पाठ क्या बताता है — प्रभु की न्याय और दया
आखिर में, यहोवा ने उसे “अंतड़ियों के असाध्य रोग” से पीड़ित किया। यह एक शारीरिक बीमारी के रूप में प्रकट है, जो राजा की आत्म-विश्वास, राजसी प्रभाव और परिवारशाही अधिकार पर एक निर्णायक चोट है। इस क्रिया से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के जन्मजात नेताओं के आचरण पर निगरानी रखता है और यदि वे दुष्कर्मी मार्ग अपनाते हैं, तो उन्हें परिणाम भुगतने ही होंगे। यहूदियों के इतिहास में ऐसे क्षण दिखते हैं जब राजाओं के पाप परमेश्वर के विरुद्ध समाज के संरचनात्मक संतुलन को बिगाड़ते हैं; तब परमेश्वर उसे एक सशक्त अनुस्मारक बनाकर उसी व्यवस्था में सुधार का संकेत देता है।
कुंजी शब्दों के अर्थ
संबंधित आयतें
— परमेश्वर के न्याय और दया के संतुलन को दर्शाने वाले अन्य संदर्भ:
प्रकाशन और शिक्षक के संकेत
उद्धरण संकेत (महत्वपूर्ण):
Matthew Henry (संक्षेप): “God will punish the transgressions of rulers, that the people may not perish through their sins.”
Albert Barnes (संक्षेप): “The king’s disease is a token of divine displeasure; it serves to reconcile the people to God and to awaken him to repentance.”
Adam Clarke (संक्षेप): “Divine judgments often begin at the throne, because rulers set the tone for the nation.”
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
यह पाठ दिखाता है कि विश्वास systems में नेतृत्व का नैतिक रवैया कितनी गहराई से प्रभावित होता है। धार्मिक नेता, जो सत्ता का दुरुपयोग करते हैं, उन्हें परमेश्वर के कानून के अनुसार जवाबदेही उठानी पड़ेगी। आज के संदर्भ में यह एक चेतावनी है कि सत्ता में रहते हुए भी नैतिकता, ईमानदारी और समाज के लिए सचेतनता बनाए रखना आवश्यक है।
संक्षेप
2 इतिहास 21:18 का यह वाक्य परमेश्वर की न्यायप्रियता को उजागर करता है: जब राजा अपने कर्तव्य से विचलित होता है, तब भगवान उसके जीवन में परिणाम लाकर देश-जन की दीर्घ-कालीन भलाई को सुनिश्चित करते हैं। यह विश्वास–जीवन में एक चेतावनी है कि प्रभु के सामने हर शासक को उत्तरदेह बनना होगा, और व्यक्ति-समाज के लिए सत्य और नैतिकता सर्वोपरि हैं।