Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 21:6 का संदर्भ और अर्थ
यह पदांक इतिहास के ऐसे काल को दर्शाता है जब यिशाय (यूहिद) राजा इतौन की दक्षिणी रेखा में अशूर-युग के प्रभावों से प्रभावित होकर बुरे रास्ते पर चलने लगा। वास मुद्दा यह है कि यह राजा अपने राज्य के सामर्थ्य के बजाय यहोवा की चढ़ाई के अनुरूप नहीं, बल्कि अहाब के घराने की नीति और वैवाहिक संबंधों के प्रभाव से चल पड़ा। उसकी पत्नी अहाब की बेटी थी; इस प्रकार यह उसे पश्चिमी इस्राएल के दोहरे प्रभाव के करीब ले आया और उसने उन सभी कारनामों को अपनाया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा थे। नतीजा, उसकी शासन-नीति और धर्मव्यवस्था दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़े।
केंद्रीय अर्थ
पद का प्रधान संदेश यह है कि एक राजा का आचरण साम्राज्य की धर्म-सामाजिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालता है। विवाह के कारण सत्ता, परंपरा और आस्था के मिश्रण में बुरी राह अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ती है। यह दिखाता है कि बुराई तब गहराती है जब सत्ता-केन्द्रित निर्णय दैवीय निर्देशों से विमुख होते हैं, और बाहरी वैधानिक-परंपराओं के अनुरूप चलने से आस्था घटित होती है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध उद्धरण और क्रॉस-रेफरेंसे
इस प्रकार के पाठ पर विचार करने के लिए नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसे उपयोगी हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि नीतिगत सत्ता के साथ आस्था की पवित्रता बनाए रखना परमेश्वर के प्रति विश्वास की कसौटी है।
व्यावहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह प्रेरणा है कि नेतृत्व और व्यक्तिगत चयन किस प्रकार सामूहिक आस्था को प्रभावित करते हैं। परिवार, विवाह और सामाजिक संबंधों के मंथन में धर्म-सत्य से विचलन न हो, यहूद-यही एक मजबूत समाज की बुनियाद है। अपने निर्णयों में परमेश्वर के सिद्धांतों को प्रधान बनायें, ताकि प्रभाव सकारात्मक और टिकाऊ हों।
संक्षिप्त समापन
2 इतिहास 21:6 हमें याद दिलाता है कि सत्ता और व्यक्तिगत रिश्ते आस्था की दिशा तय कर सकते हैं। यहोवा की दृष्टि में सही मार्ग वही है जो उसके चुक-चाल के अनुरूप हो; अहाब घराने की नीति और बुरे कामों से दूरी बनाकर विश्वस्त और धर्मपरायण शासन संभव है।
सूचित उद्धरण/कथन: इस प्रविष्टि में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायम के विचारों से मिलते-जुलते सार निष्कर्ष समाहित हैं।