Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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सीधे मतलब का सार
2 इतिहास (II Paralipomenon) 34:26 में ईश्वरीय संदेश है: यहूदा के राजा को बताने के लिए कि उनका राजा जो यहोवा से पुछवाने को भेज रहा है, उसे यह कहना है कि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है कि जो निर्णय हुआ उसका उद्देश्य और न्याय वही निर्धारित करेगा।
पृष्ठभूमि
यह अध्याय योराम के शासनकाल के उत्तरार्ध में घटित घटनाओं की बुलेट-सी चित्रण करता है, जहाँ यर्मायाह या अन्य भविष्यवक्ता के संदेशों के बजाय राजा को यहोवा के विरूद्ध निर्णयों के परिणामों के संदर्भ में सीधे निर्देश दिए जाते हैं। यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर के लोग चाहे राजसी निर्णय लें या नहीं, पर वह उनके कार्यों के परिणामों से निर्देशित और उत्तरदायी है—और जो राजा यहोवा से पूछकर आ चुका है, उसे यह सचेत किया गया है कि परमेश्वर की योजना की परम उपस्थिति और न्याय को नहीं टाला जा सकता।
व्याख्या और आत्म-निरीक्षण
यहां संदेश का केन्द्र एक स्पष्ट निष्कर्ष है: परमेश्वर अपने चयनित लोगों के लिए न्याय और निर्णय की भाषा बोलता है। राजा के अभियान, निर्णय या आस्था के बावजूद परमेश्वर का कथन यही है: सच और न्याय की स्थितियाँ निर्धारित होंगी, और यहोवा के मार्ग के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे। इसका आशय यह है कि धार्मिक नेताओं और राजा के लिए यह जरूरी है कि वे यहूदियों के परंपरागत विश्वास के अनुरूप उनकी दिशा पर खरे उतरें, न कि अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दें।
निःसंकोच पाठक-उद्धरण (सार्गर्भ)
मथ्यू हेन्री के विचारों के अनुसार यह संदेश परमेश्वर की नीति-निर्देशन की भूमिका को स्पष्ट करता है कि सत्ता के ठहराव और निर्णय भी परमेश्वर के आदेशों के अधीन होते हैं। अलबर्ट बार्न्स ने यह दर्शाया है कि परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार पश्चाताप, सुधार और न्याय का क्रम आवश्यक है, ताकि लोग सचेत होकर अपने व्यवहार को बदले। एडम क्लार्क के अनुसार यहूदियों के राजाओं के संदर्भ में यह स्पष्ट संकेत है कि ईश्वर ऊँचे उद्देश्य के लिए शक्तिशाली निर्णयों को चलाते हैं, भले ही मानवीय विचार उसे समझ न पाएं। (इन उद्धरणों का संक्षेप संस्करण यहां उपलब्ध है; पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण साइट पर देखें।)
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षेप समझ
ये संदर्भ बताते हैं कि परमेश्वर की योजना का उद्देश्य सत्य और न्याय है, तथा मनुष्य के निर्णयों के बावजूद वह योजनाओं को आगे बढ़ाते हैं।
सीखने योग्य निष्कर्ष
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद सीधे यह कहता है कि जो भी निर्णय परमेश्वर के जवाबदारी और मार्गदर्शन के अनुसार होगा, वही सही है। राजा के संदेश का उद्देश्य यही है कि परमेश्वर की योजना के अनुरूप आचरण किया जाए और उत्तरदायित्व समझा जाए।