Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 4:1 2 इतिहास 4:2 2 इतिहास 4:3 2 इतिहास 4:4 2 इतिहास 4:5 2 इतिहास 4:6 2 इतिहास 4:7 2 इतिहास 4:8 2 इतिहास 4:9 2 इतिहास 4:10 2 इतिहास 4:11 2 इतिहास 4:12 2 इतिहास 4:13 2 इतिहास 4:14 2 इतिहास 4:15 2 इतिहास 4:16 2 इतिहास 4:17 2 इतिहास 4:18 2 इतिहास 4:19 2 इतिहास 4:20 2 इतिहास 4:21 2 इतिहास 4:22



परिवर्तनशील मंदिर के उपकरण: बारह बैलों पर रखे हुए वोद्ध-परिदृश्य (2 इतिहास 4:4)
यह पाठ नहूमी मंदिर-कार्य का एक विशिष्ट दृश्य प्रस्तुत करता है: बारह बने हुए बैलों पर बना हौद विभिन्न दिशाओं की ओर मुंह किए हुए थे — उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और पूर्व। इनमें से प्रत्येक समूह तीन-तीन बैल थे, और उनके ऊपर हौद रखा गया था। पीछे का अंग भीतर की ओर निर्देशित था। यह संरचना एक सुव्यवस्थित, समन्वित व्यवस्था और पूजन-कार्य की गहन योजना का संकेत देती है।
इस पाठ में परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह विवरण परमेश्वर के कार्यक्रम की सुव्यवस्था और करुणा-पूर्ण संरक्षण की गारंटी को दर्शाता है। हर दिशा में मुंह किए बैलों का होना बताता है कि ईश्वर के राज्य का उद्देश्य संसार के सभी भागों तक फैला है और उसकी महिमा के प्रति सब प्राणी उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम — हर कोण से पहुँचते हैं। साथ ही, यह बताता है कि पूजा और सेवा एक समन्वित, निरंतर क्रम में संचालित होती है; एक व्यवस्थित व्यवस्था के साथ ही परमेश्वर को हर्षित करने का लक्ष्य पूरा होता है।
शब्दों या छवियों को स्पष्ट करने वाले बिंदु
संबंधित पदों के संक्षिप्त संकेत
यह दृश्य परमेश्वर के पवित्र मंदिर के भीतर की व्यवस्था का हिस्सा है, जो अन्य पवित्र वस्तुओं के साथ एक संगठित और पवित्र सेवक-कार्य को दर्शाता है। नीचे दिए गए संदर्भ संस्थानों में से कुछ इस विचार को मजबूत करते हैं:
आज के समय के लिए अनुप्रयोग
हमारा आस्था-जीवन किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहता; यह हर दिशा और हर दिन के लिए है। समय-समय पर ईश्वर की प्रकृति और उसकी व्यवस्था को स्वीकारते हुए, हमें भी एक सुव्यवस्थित, क्रमबद्ध और जिसमें परमेश्वर की महिमा सर्वोपरि हो, सेवा करनी चाहिए—घर, कलीसिया और समाज के प्रत्येक क्षेत्र में। यह पाठ याद दिलाता है कि ईश्वर की योजना समस्त दुनिया के लिए है और विश्वसनीय रूप से चलती है, जब हम उसकी दिशा-निर्देशों के अनुसार चलें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप विवरण के साथ)
1) मंदिर-आयोजन में चारों दिशाओं की महत्ता पर विचार — यह दर्शाता है कि परमेश्वर का शासन सभी दिशा-धाराओं को कवर करता है।
2) पवित्र सत्ता और सेवा के क्रम के महत्व पर विचार — पूजा एक व्यवस्थित क्रम में होती है, जो समझ और प्रतिबद्धता बढ़ाती है।
3) चारों दिशाओं के साथ समन्वयित उद्देश्य का संकेत — ईश्वर का घर पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसका लक्ष्य सभी जातियों को आशीष देना है।
नोट: इस पाठ से सीधे उद्धृत कोई पूर्ण वाक्य Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्द नहीं दिए जा रहे हैं; यदि इन टिप्पणीकारों के विशिष्ट उद्धरण उपलब्ध हों, तो एक संक्षिप्त उल्लेख दिया जाएगा, पर अभी यहाँ सामान्य, एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत है।