प्रेरितों के काम 25:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अतः दूसरे दिन, जब अग्रिप्पा और बिरनीके बड़ी धूमधाम से आकर सैन्य-दल के सरदारों और नगर के प्रमुख लोगों के साथ दरबार में पहुँचे। तब फेस्तुस ने आज्ञा दी, कि वे पौलुस को ले आएँ।

प्रेरितों के काम 25:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह व Verkic Verse महत्वपूर्ण है

प्रेरितों के काम 25:23 का यह दृश्य ईसाई मिशन के आगे बढ़ते संघर्ष और न्याय-प्रशासन की राजनीति के बीच से आता है। पॉलुस की गिरफ्तारी के प्रसंग में कबीलाइयों और नगर-प्रमुखों के बीच संघर्ष और अवसर दोनों सामने आते हैं। यह verse दिखाता है कि कैसे प्रशासनिक मंच पर ईश्वर के काम की गवाही दी जाती है, और कैसे सही समय पर सही लोग एक साथ आकर सत्य को समझने का प्रयास करते हैं।

पुष्ट संदर्भ और मूल प्रसंग

फर्स्ट-शासन के घेरे में पॉलुस के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। अग्रिप्पा और बिरनीके, जो राजा-रिस्टीक्ट परिवार के प्रमुख थे, सैन्य दल के प्रमुखों के साथ दरबार में पहुँचे। तब फेस्तुस ने आदेश दिया कि पौलुस को लाया जाए। इस क्षण में न्याय-प्रशासन, दबाव और धार्मिक-राजनीति एक साथ मिलती है। लेखक लूका यहाँ दिखाता है कि कुशल नेतृत्व कैसे स्थिति को ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार दिशा देता है, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ कितनी भी उलझी क्यों न हों।

मुख्य संदेश

1) समय-चक्र के भीतर ईश्वर की योजना चलती रहती है: प्रशासनिक मंच पर पौलुस को उपस्थित कराकर उसके उद्देश्य की दिशा स्पष्ट की जा रही है।

2) प्राणी-सभा में जनता के सामने सच को सामने लाने की चेष्टा: एक सार्वजनिक मंच पर विचार-विमर्श से सत्य उभरकर आता है और ईश्वर की योजना की पुष्टि होती है।

3) धार्मिक और राजनीतिक शक्तियों के मिलने पर भी, ईश्वर का उद्देश्य अडिग रहता है: पौलुस की साक्षी दीर्घकालिक प्रभाव रखती है।

क्रुस-प्रेरणा और समुदाय-स्तर पर उपयोगी विचार

  • न्याय व्यवस्था और आस्था के बीच संतुलन: क्रॉस-फंक्शनल घनिष्ठता से सत्य का प्रकाश खुलता है।
  • आत्मिक धैर्य और धारण-शक्ति: कैद-स्थितियों में भी पौलुस के प्रिय संदेशों की पुष्टि होती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त) और उनसे जुड़ी विचार-सम्पत्ति

- प्रेरितों के काम 24:24-25: पॉलुस की धर्म-दृष्टि और धैर्य पर चर्चा; यह दृश्य एक प्रकार से सुरक्षा-विश्वास और सत्य की गवाही पर बल देता है।

- प्रेरितों के काम 26:1-3: पौलुस का सुसंगत बयान और अपने आचार-व्यवहार की चर्चा; न्याय-सभा में स्पष्टता और धर्मनिष्ठता का महत्व।

- प्रेरितों के काम 28:17-20: दोषारोपण के बावजूद बाद की भूमिका में राज्य-मान्यताओं के साथ संवाद की आवश्यकता।

देवotional reflection

हम में से प्रत्येक के लिए यह स्मरण कराता है कि जीवन के किसी भी मंच पर सच और धैर्य के साथ खड़े रहने की महत्ता है। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, ईश्वर के चक्र में हमारा भाग उसी उद्देश्य की दिशा में हो जाता है। प्रेरितों के साहसपूर्ण उदाहरण से प्रेरणा लेते हुए हमें विषमताओं में भी सत्य की गवाही को न छोड़ना चाहिए।

एक संक्षिप्त समेकन

यह दृश्य दिखाता है कि प्रशासनिक मंचों पर सत्य को सुनना और देखना, और धर्म-निष्ठा के साथ आगे बढ़ना कैसे ईश्वर के उद्देश्य को पूरा करते हैं। पौलुस के लिए दरबार-सभा एक अवसर बन जाती है कि उसका संदेश और विश्वास स्पष्ट रूप से सामने आए।

उद्धृत” Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke” के स्पष्ट उद्धरण आवश्यक होने पर उपलब्ध प्रकाशनों से लिया जा सकता है—यह अनुभाग आवश्यकतानुसार समाहित किया जाएगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

प्रेरितों के काम 25:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रेरितों के काम 26:30 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 26:30 (HINIRV) »
तब राजा और राज्यपाल और बिरनीके और उनके साथ बैठनेवाले उठ खड़े हुए;

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प्रेरितों के काम 25:13 (HINIRV) »
कुछ दिन बीतने के बाद अग्रिप्पा राजा* और बिरनीके ने कैसरिया में आकर फेस्तुस से भेंट की।

1 यूहन्ना 2:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 यूहन्ना 2:16 (HINIRV) »
क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, और आँखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। (रोम. 13:14, नीति. 27:20)

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