Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 25:1 प्रेरितों के काम 25:2 प्रेरितों के काम 25:3 प्रेरितों के काम 25:4 प्रेरितों के काम 25:5 प्रेरितों के काम 25:6 प्रेरितों के काम 25:7 प्रेरितों के काम 25:8 प्रेरितों के काम 25:9 प्रेरितों के काम 25:10 प्रेरितों के काम 25:11 प्रेरितों के काम 25:12 प्रेरितों के काम 25:13 प्रेरितों के काम 25:14 प्रेरितों के काम 25:15 प्रेरितों के काम 25:16 प्रेरितों के काम 25:17 प्रेरितों के काम 25:18 प्रेरितों के काम 25:19 प्रेरितों के काम 25:20 प्रेरितों के काम 25:21 प्रेरितों के काम 25:22 प्रेरितों के काम 25:23 प्रेरितों के काम 25:24 प्रेरितों के काम 25:25 प्रेरितों के काम 25:26 प्रेरितों के काम 25:27



अर्थ का सीधा संक्षेप
प्रेरितों के काम 25:22 में अग्रिप्पा यह बताने के लिए उत्सुक हैं कि फ़ेस्तुस को क्या कहना है: मैं भी उस मनुष्य की सुनना चाहता हूँ। उसका उत्तर सुनकर अगिप्पा ने कहा, तू कल सुन लेगा। यह दृश्य.instantiates एक अवसर है जहाँ सभा और उच्च अधिकारी एक ही प्रश्न पर विचार साझा करते हैं: क्या धर्मयुद्ध और राजनयिक दायित्व के बीच सत्यापना संभव है, और कब तक प्रतीक्षा की जाए?
पृष्ठभूमि संदर्भ
यहोशू के समय से प्रेरितों के कार्य में पोलेपण के बाद प्रेरितों की कार्यप्रणाली राजनीतिक दबावों के बीच ईसाई संदेश को सुरक्षित रखने की उद्धार-यात्रा दिखाती है। यह घटना पॉल और फ़ेस्तुस के बीच अदालत-सम्बन्धी संवाद के क्रम में होती है, जहाँ रोमन अधिकारी अग्रिप्पा—राजस्व-कार्यालय के अधिकारी—युद्ध-सम्बन्धी निर्णय के बारे में सुनना चाहते हैं। साथ ही यह दर्शाता है कि कैसे धार्मिक अधिकार और राज्यीय अधिकार एक-साथ चलते हैं, और कब सुनवाई का क्रम परिवर्तन होता है।
आख्यानात्मक टिप्पणियाँ
- अग्रिप्पा का कहना, मैं भी उस मनुष्य की सुनना चाहता हूँ, दर्शाता है कि उनका उद्देश्य समयाभाव से निपटना, तथ्य समझना और निर्णय लेने की दिशा तय करना है। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में सत्य और तथ्य सुनना आवश्यक है।
- फ़ेस्तुस का उत्तर “तू कल सुन लेगा” एक नियत समय का संकेत है—समय की व्यवस्था और अवसर का सम्मान। यह भी संकेत है कि तत्काल निर्णय से पहले स्पष्टता और प्रमाण चाहिए।
- प्रेरितों के बीच यह संवाद यह भी दिखाता है कि कुरआन-मर्म और राजनयिक प्रक्रिया कैसे साथ-साथ चलते हैं, ताकि शांति और न्याय दोनों बनाए जा सकें।
3 प्रमुख निष्कर्ष
cross-references और उनके संक्षिप्त प्रभाव
- प्रेरितों के कार्य 24:25-26: बाइबलाचार के अनुसार व्यवहारिक निर्णयों में धारणीय प्रमाण और अवसर की चर्चा।
- प्रेरितों के कार्य 26:28: सत्ता के सामने ईश्वरीय संदेश की प्रस्तुतियाँ और तर्क से प्रभाव डालना।
- प्रेरितों के कार्य 28:25-28: संतुष्टि, प्रमाण और समय के साथ प्रभु-विश्वास का विस्तार।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम भी सांसारिक निर्णयों में, विशेषकर धार्मिक या समुदाय-न्याय के क्षेत्र में, सुनवाई के सही समय और उचित प्रमाणों को महत्व दें। बातचीत के दौरान धैर्य रखें, और यह याद रखें कि सत्यपूर्ण विचार-विमर्श से ही निष्पक्ष निर्णय संभव होते हैं।
उद्धरण-संदर्भ (पूर्व-प्रचलित टिप्पणीकारों से संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain व्याख्यों से आवश्यकता अनुसार शाब्दिक संधानित वाक्यांश परिचित कराए गए हैं; आवश्यक जगह पर छोटे उद्धरण दिए गए हैं।