Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 26:1 प्रेरितों के काम 26:2 प्रेरितों के काम 26:3 प्रेरितों के काम 26:4 प्रेरितों के काम 26:5 प्रेरितों के काम 26:6 प्रेरितों के काम 26:7 प्रेरितों के काम 26:8 प्रेरितों के काम 26:9 प्रेरितों के काम 26:10 प्रेरितों के काम 26:11 प्रेरितों के काम 26:12 प्रेरितों के काम 26:13 प्रेरितों के काम 26:14 प्रेरितों के काम 26:15 प्रेरितों के काम 26:16 प्रेरितों के काम 26:17 प्रेरितों के काम 26:18 प्रेरितों के काम 26:19 प्रेरितों के काम 26:20 प्रेरितों के काम 26:21 प्रेरितों के काम 26:22 प्रेरितों के काम 26:23 प्रेरितों के काम 26:24 प्रेरितों के काम 26:25 प्रेरितों के काम 26:26 प्रेरितों के काम 26:27 प्रेरितों के काम 26:28 प्रेरितों के काम 26:29 प्रेरितों के काम 26:30 प्रेरितों के काम 26:31 प्रेरितों के काम 26:32



प्रेरितों के काम 26:19 — संदर्भ का आधुनिक योगदान
यह पद एपिरसुस के राजा अग्रिप्पा के सामने पौलुस के बयान की क्रमबद्ध प्रस्तुति का भाग है। प्रेरित पवित्र आत्मा के द्वारा प्रेरित होकर पौलुस ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने स्वर्गीय दर्शन के कारण अपने उद्देश्य का मार्ग न कभी टाला है, न पीछे हटा है। यह दृश्यनिष्ठता और विवेकपूर्ण धैर्य का रनभूम्मक है, जो विश्वास के ठोस कारणों को समाज के सामने रखने की प्रेरणा देता है।
ईश्वरीय विश्वास की रोशनी: पद का प्रमुख संदेश
इस वाक्य में पौलुस अपने अनुभव को एक ईमानदार गवाही के रूप में प्रस्तुत करते हैं—स्वर्गीय दर्शन ने उन्हें प्रभावी दिशा दी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की पहली प्राथमिकता उनके बच्चों की पलटन और साक्ष्य का प्रतिफल है। दर्शन ने उन्हें धैर्यपूर्वक, सत्यनिष्ठा के साथ अपना मार्ग चलाने की प्रेरणा दी, ताकि भविष्य में भी वे सत्य preaching में दृढ़ रहें।
शब्दार्थ और चित्रण स्पष्ट करना
अन्य संरचना-योग्य संदर्भ
लगभग अनुशासनात्मक विचारों के लिए तीन संपृक्त बिंदुओं पर विचार करें:
कथा-आधार से सीख: पुराने टिप्पणी-कारों के संक्षेप
मैथ्यू हेनरी और अर्बन बार्न्स के संकल्पनात्मक कथनों में यह विचार मिलता है कि दर्शन और धैर्य परमेश्वर के कार्य के लिए स्रोत-शक्ति बनते हैं; आरोहण और धारणा के बीच संतुलन बनाए रखना सत्य की प्रस्तुति में अत्यावश्यक है। इन लेखकों के अनुषंग में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रेरित का कर्मयात्रा एक उच्च उद्देश्य के साथ जुड़ा है और हर बाधा के पीछे परमेश्वर की योजना है।
आज के संदर्भ में व्यवहार और अनुप्रयोग
हमारे जीवन में यह सीख है कि जब हमारा उद्देश्य सत्य और ईमानदारी के साथ परमेश्वर के सामने रखा जाए, तब दृढ़ता और भरोसा समान भाग बनकर चलते हैं। जरूरी बात यह है कि हम प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने दायित्व को न छोड़ें, और विश्वास के दर्शन से प्रेरित होकर अपनी सेवकाई को जारी रखें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त)
1) प्रेरितों के काम 9:15 — पॉलुस के आह्वान की पुष्टि
2) प्रेरितों के काम 22:15 — सत्य के लिए प्रतिबद्धता
3) रोम 8:38-39 — ईश्वर के प्रेम की अनश्वर सुरक्षा
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि दर्शन और बुलावा व्यक्ति को दृढ़ता से प्रेरित करते हैं और बाहरी प्रतिरोध भी आंतरिक विश्वास को घटित नहीं कर सकता।