Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 26:1 प्रेरितों के काम 26:2 प्रेरितों के काम 26:3 प्रेरितों के काम 26:4 प्रेरितों के काम 26:5 प्रेरितों के काम 26:6 प्रेरितों के काम 26:7 प्रेरितों के काम 26:8 प्रेरितों के काम 26:9 प्रेरितों के काम 26:10 प्रेरितों के काम 26:11 प्रेरितों के काम 26:12 प्रेरितों के काम 26:13 प्रेरितों के काम 26:14 प्रेरितों के काम 26:15 प्रेरितों के काम 26:16 प्रेरितों के काम 26:17 प्रेरितों के काम 26:18 प्रेरितों के काम 26:19 प्रेरितों के काम 26:20 प्रेरितों के काम 26:21 प्रेरितों के काम 26:22 प्रेरितों के काम 26:23 प्रेरितों के काम 26:24 प्रेरितों के काम 26:25 प्रेरितों के काम 26:26 प्रेरितों के काम 26:27 प्रेरितों के काम 26:28 प्रेरितों के काम 26:29 प्रेरितों के काम 26:30 प्रेरितों के काम 26:31 प्रेरितों के काम 26:32



वाक्य का सीधा सार: प्रेरितों के काम 26:29
पौलुस कहते हैं कि परमेश्वर से मेरी प्रार्थना यह है कि चाहे थोड़े में, चाहे अधिक में, केवल तू ही नहीं, बल्कि सारे लोग जो आज मेरी सुनते हैं, वे मेरे बन्धन छोड़कर मेरे समान हो जाएँ।
प्रसंग और पृष्ठभूमि
यह दृष्टी-पत्र 26 अध्याय में पोन्त्स के खिलाफ रोमांचक बरीखण्ड है, जहाँ पौलुस वर्तमान श्रोताओं के समक्ष अपना बचाव देते हैं। वे अन्दर-बाहर हर प्रकार के दबाव और यातना भोग रहे थे, पर उनके लक्ष्य एक समान था: ईमानदारी और आत्म-त्याग के साथ परमेश्वर के चंगे संदेश को प्रकट करते रहना।
शीर्षकात्मक व्याख्या (interpretive observations)
छोटे थीमैटिक बिंदु (themes)
अन्य प्राचीन उद्धरणों के साथ क्रॉस-रेफरेंसेज
1) स्मरण कराते हैं कि प्रेरित होने के समय भी ईश्वर की योजना सीमित नहीं रहती; हमारे जीवन में भी वही शक्ति काम करती है जो दूसरों को परिवर्तन के लिए प्रेरित करती है।
2) “जो चाहे थोड़ा हो या बहुत”—यह संदेश यह दर्शाता है कि परमेश्वर के लिए उपलब्धता और प्रस्तुति का मूल्य बनता है, न कि बाहरी स्थितियाँ।
3) हमारा लक्ष्य—हमारे अनुभव हों या बन्धन, सब कुछ उद्धार के संदेश को और स्पष्ट बनाते हैं कि लोग ईश्वर की राह में निर्भीकता से चलें।
नोट: नीचे पुराने टिप्पणीकारों के सार से संक्षेप मिला है, किन्तु पूर्ण वाक्यों का अनुवाद नहीं किया गया है ताकि मूल विचार स्पष्ट रहे।
पुनरावलोकन-व्यावहारिक निष्कर्ष
- आपकी परिस्थिति चाहे जैसी हो, परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार अपने जीवन को ढालना संभव है।
- दूसरों के लिए प्रेरणा बनें—आपके व्यक्तिगत अनुभव से भी क्रिस्टीय संदेश की गूंज तेज होती है।
- कठिनाइयों के बीच भी ईश्वर की योजना को सामने आने दें; बन्धन एक अवसर बन सकता है जब आप परमेश्वर के साथ अपने संबंध को केंद्र में रखें।
संक्षेपित स्रोत-धारणा
यह उद्घोषणा प्रेरितों के काम के समशब्द संदेश की गहराई को समेटती है: विश्वास को मजबूत रखने के लिए स्व-निष्ठा, धैर्य और दया—यही वह जीवनशैली है जिसे आप भी अपनाकर परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध को अगला स्तर दे सकते हैं।