Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
कुलुस्सियों 1:1 कुलुस्सियों 1:2 कुलुस्सियों 1:3 कुलुस्सियों 1:4 कुलुस्सियों 1:5 कुलुस्सियों 1:6 कुलुस्सियों 1:7 कुलुस्सियों 1:8 कुलुस्सियों 1:9 कुलुस्सियों 1:10 कुलुस्सियों 1:11 कुलुस्सियों 1:12 कुलुस्सियों 1:13 कुलुस्सियों 1:14 कुलुस्सियों 1:15 कुलुस्सियों 1:16 कुलुस्सियों 1:17 कुलुस्सियों 1:18 कुलुस्सियों 1:19 कुलुस्सियों 1:20 कुलुस्सियों 1:21 कुलुस्सियों 1:22 कुलुस्सियों 1:23 कुलुस्सियों 1:24 कुलुस्सियों 1:25 कुलुस्सियों 1:26 कुलुस्सियों 1:27 कुलुस्सियों 1:28 कुलुस्सियों 1:29



कोलुसियों 1:28 — केंद्रीय संदेश का सार
इस वाक्य को पलकें उठाकर पढ़ें तो स्पष्ट होता है कि प्रेरित पॉल का उद्देश्य नहीं, बल्कि ईश्वर की योजना भी है: मसीह को प्रचारित करके हर एक मनुष्य को जागरूक किया जाए, ताकि उसे ज्ञान से समझाकर हर एक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध किया जा सके। यह पंक्ति उसी संदर्भ की हिस्सेदारी है जिसमें पॉल चर्च वालों के बीच मसीही जीवन की पूर्णता के लिए प्रभु यीशु मसीह की प्रभुता और पूर्णता का प्रदर्शन किया जाना आवश्यक बतलाते हैं।
केंद्रीय अर्थ
वाक्य कहता है कि क्रूस पर मरते और जी उठते यीशु की गूंज से हर व्यक्ति तक पवित्रजीवन का सच पहुँचना चाहिए—ज्ञान के साथ ताकि हर मनुष्य को मसीह में स्थापित किया जा सके। यहाँ “हर एक मनुष्य” से तात्पर्य व्यक्तिगत परिवर्तन और सामूहिक शुद्धिकरण दोनों है; “ज्ञान” से ईश्वर की इच्छा की गहरी समझ और स्थिर विश्वसनीय जीवनचर्या मिलती है।
मुख्य विषय (2–3)
कुछ प्रमुख संकल्पनाएं (Themes)
गौरत्वपूर्ण cross-references
1) 1 कुरिन्थियों 3:6-7 — पौलुस बताता है कि न सरोवर है न पानी, बल्कि परमेश्वर का प्रभाव है जो परिणाम देता है; प्रचार और ज्ञान मिलकर लोग ईश्वर के काम में से होकर गुजरते हैं। यह संदर्भ इस वाक्य के “प्रचार” और “ज्ञान से सिखाना” के संयुक्त प्रभाव को स्पष्ट करता है।
2) इफिसियों 4:15-16 — प्रेम और सत्य के द्वारा सचमुच बचते हुए, हर मसीही जीवन में उन्नति और सहभागिता बढ़ती है; चर्च का हर सदस्य एक दूसरे के साथ साथ मसीह में स्थापित रहने के लिए विकसित होता है।
3) Colossians 2:2-3 — मसीह में ज्ञान और विद्या के साथ गहराई से रहने की प्रेरणा देता है कि मसीह की गहनी बातें मन में गूंजें।
व्यावहारिक चिंतन
क्या आप जानते हैं कि प्रचार और ज्ञान दोनों का संतुलन आपके व्यक्तिगत जीवन में कैसे उतर सकता है? पहले पॉल के बाद आप अपनी आस्था के बारे में सोचे: क्या आप मसीह के बारे में पर्याप्त जानते हैं कि आप दूसरों तक उसे समझा सकें? क्या आपका दर्शन, व्यवहार और निर्णय यीशु के अनुसार प्रकाशित होते हैं?
संक्षेप
कुल मिलाकर यह वाक्य बताता है कि मिशन-जीवन में प्रचार-ज्ञान से हर एक मनुष्य को मसीह में स्थापित करना लक्ष्य है। यह केवल सूचना नहीं, जीवन-परिवर्तन का कार्य है—व्यक्ति-का-व्यक्ति और समुदाय-का-समाज, दोनों में।
संक्षेप उद्धरण (संदर्भित सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकार):
Matthew Henry और Adam Clarke के सारगर्भित विचारों के अनुरूप, यहवाक्य समय-सत्य को बताता है कि प्रेरित पॉल ने मसीह की कुंजी से हर मनुष्य तक पहुँचना और उसे एक नए जीवन में स्थापित करना चाहा।