Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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कुलुस्सियों 1:19 का स्पष्ट सार तत्व
पिता की प्रसन्नता से यह संकेत मिलता है कि सारी परिपूर्णता और जो क्षमताएँ हैं, वे यीशु में विशेष रूप से निवास करती हैं, ताकि परमेश्वर की इच्छा और पूर्णता का लक्ष्य पूरे ब्रह्मांड में प्रकट हो सके। इस पद का संदर्भ कुलुस्सियों की सभा के लिए यह दिखाने के लिए है कि मसीह में ही वह प्रमुख अंश है जिसमें ईश्वर की स्तुति, समितियों की एकता और विश्व के उद्धार की योजना एक साथ पूरी होती है।
मुख्य विचार
इस वचन का केंद्र यह है कि यीशु में परम पिता की संपूर्ण इच्छा और परिपूर्णता का निवास है। इसका मतलब है कि ईश्वर का कल्याण, न्याय और प्रेम का पूर्ण प्रदर्शन मसीह के जीवन, शिक्षा, मरन और पुनर्जीवन में मिलता है। जो हम अनुभव कर रहे हैं, वह सब यीशु के कार्यों और उसके अस्थिर-रहित स्वभाव के माध्यम से प्रकट होता है; इसलिए उसे ही देखना और उसकी पूजा करना परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है।
दो प्रमुख थीम्स
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेज
यहाँ तीन प्रासंगिक संदर्भ दिए जाते हैं, प्रत्येक पर छोटा-सा स्पष्टीकरण:
इन संदर्भों के द्वारा दिखाया गया है कि मसीह में ईश्वर की पूर्णता कैसे प्रकट होती है और वह हमारे उद्धार की आधारशिला है।
प्रायोगिक विचार
व्यावहारिक जीवन में यह समझना कि परम पिता की प्रसन्नता मसीह के भीतर है, हमें निम्न बातें सिखाती है:
संक्षिप्त निष्कर्ष
कुलुस्सियों 1:19 बताता है कि परम पिता की प्रफुल्लता और पूर्णता जैसी उपलब्धि, मसीह में सन्निहित है। इसका उद्देश्य यह है कि ईश्वर की महिमा पूरे ब्रह्मांड में स्पष्ट हो, और मानवता उसके पुनर्स्थापन के लक्ष्य को अनुभव करे। मसीह के आलोक में हमारी आस्था और जीवनीकृत प्रेम वही मार्ग बनाते हैं जो परमेश्वर की इच्छा को पूरा करता है।
सूक्ष्म उद्धरण नोट
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलनों से शब्द-उद्धरण चाहें, तो यह ध्यान दें कि उनके स्पष्ट वाक्यांश आम तौर पर इन अंशों को उसी प्रकार समृद्ध करते हैं: “यीशु में सारी परिपूर्णता वास करे”—प्रसंग के भीतर उपस्थिति के रूप में उद्धृत मुख्य विचार का सार है।