Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
कुलुस्सियों 1:1 कुलुस्सियों 1:2 कुलुस्सियों 1:3 कुलुस्सियों 1:4 कुलुस्सियों 1:5 कुलुस्सियों 1:6 कुलुस्सियों 1:7 कुलुस्सियों 1:8 कुलुस्सियों 1:9 कुलुस्सियों 1:10 कुलुस्सियों 1:11 कुलुस्सियों 1:12 कुलुस्सियों 1:13 कुलुस्सियों 1:14 कुलुस्सियों 1:15 कुलुस्सियों 1:16 कुलुस्सियों 1:17 कुलुस्सियों 1:18 कुलुस्सियों 1:19 कुलुस्सियों 1:20 कुलुस्सियों 1:21 कुलुस्सियों 1:22 कुलुस्सियों 1:23 कुलुस्सियों 1:24 कुलुस्सियों 1:25 कुलुस्सियों 1:26 कुलुस्सियों 1:27 कुलुस्सियों 1:28 कुलुस्सियों 1:29



कुलुस्सियों 1:2 पर टिप्पणी: पवित्र और विश्वासी भाइयों को मसीह में अनुग्रह और शान्ति
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: कुलुस्सियों के विश्वासियों को परमेश्वर की ओर से अनुग्रह और शान्ति की આવक बुद्धिमानी से प्रकट होती है, जो मसीह में एक नए परिचय और ईश्वर-निर्णय कीपूर्णता का आनंद लेने के निम्न आधार हैं। पत्र के लेखक यह बताने में हैं कि विश्वासिता के साथ जुड़ा हुआ यह प्यारा सम्बोधन उनकी पहचान है — वे पवित्र हैं क्योंकि वे मसीह के साथ एक नया जीवन जी रहे हैं, और वे विश्वासी हैं क्योंकि वे प्रभु की ओर से चुने गए हैं।
पाठ संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ के भीतर परिचय
यह पंक्ति एक प्रारम्भिक अभिवादन है जिसमें लेखक कुलुस्सी समुदाय के लिए अपनी विनम्रता के साथ एक आध्यात्मिक वास्तविकता प्रस्तुत करता है: पवित्रता और विशिष्ट विश्वसनीयता जो परमेश्वर के बच्चों में पाई जाती है। एक सामान्य क्लोजिंग-टिप्पणी के बजाय, यह संदेश यह दर्शाता है कि निमंत्रण और आशीष दोनों एक साथ आते हैं—अनुग्रह उनकी स्थिति को उद्धारक के अनुसार मान्य करता है, जबकि शान्ति उनके जीवन का दैनिक सत्कार बनाती है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
1. अनुग्रह का विषय: अनुग्रह वह दिव्य कृपा है जो पाप के क्षय के बाद ऊपर से आती है। यह कहना कि “परमेश्वर की ओर से तुम्हें अनुग्रह” दर्शाता है कि विश्वासियों के उद्धार और आशीर्वाद की दिशा परमेश्वर की उदारता से है, न कि मानव कारणों से।
2. शान्ति का स्रोत: शान्ति केवल परिस्थितियों की स्थिति नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप की पूर्ण स्थिति है—हृदय-शान्ति, जो प्रधानतः मसीह के साथ हमारे सम्बंध से जुड़ी है।
3. पहचान और समुदाय: “पवित्र और विश्वासी भाइयों” का शब्द-चयन दर्शाता है कि समुदाय किसी तुनकमिजाज वर्ग से नहीं, बल्कि परमेश्वर के पवित्र प्रचार और विश्वास के कारण एक मूलभूत समानता में है।
पारिवारिक और बाइबलीय cross- connections
- यशायाह 57:19 और प्रेरितों के काम 10:36-38 के संदर्भ, जहाँ परमेश्वर की शान्ति और अनुग्रह लोगों के बीच की नई-जीवन-संबंध की पुष्टि करते हैं।
- रोमियों 5:1-2 में विश्वास के कारण शान्ति और अनुग्रह की स्थिति को दर्शाते हैं; पवित्रता-सम्बन्ध यह दिखाती है कि परमेश्वर के नये जीवन में प्रवेश पर पहुंचता है।
- 1 कुरिन्थियों 1:2 में विश्वासी समुदाय की पहचान “साफ़-पवित्र” संबोधन से मिलती है, जो कुलुस्सियों के लिए भी लागू है।
reflection प्रश्न
संक्षिप्त समापन
कुलुस्सियों 1:2 में दी गई यहjenje वाक्य एक प्रेरित अभिवादन के रूप में नहीं, बल्कि विश्वासियों की नई पहचान का घोषणापत्र है—पवित्रता उनके लक्ष्य का, और अनुग्रह-शान्ति उनका दैनिक अनुभव। यह संदेश यही स्मरण कराता है कि परमेश्वर का परिवार एक परिवार है, जिसमें हर सदस्य को उद्धार और स्थिर शान्ति का अभिषेक मिलता है।
पूर्वीय संदर्भ उद्धरण (संक्षेप)
Matthew Henry से संक्षिप्त संकेत: “हम परमेश्वर के अनुग्रह का आनंद लेते हैं; उसकी शान्ति हमारे दिलों में रहती है।”
Albert Barnes से संक्षिप्त संकेत: “विश्वासियों के लिए यह अभिवादन एक प्रेरणा है कि वे प्रत्येक दिन अपने उद्धारकर्ता के साथ एक नया अनुभव पाएँ।”
Adam Clarke से संक्षिप्त संकेत: “पवित्र और विश्वासी भाई—यह राज्य परमेश्वर के लोक के स्थायित्व और उनकी कृपा के परिणामस्वरूप है।”
अन्तर-वाचन संदर्भ
1) परमेश्वर की अनुग्रह से पहले विश्वास की स्थिति — रोम 3:24-25; 2) शान्ति की गवाही — यिर्मयाह 33:6; युहन्ना 14:27; 3) पवित्रता की पहचान — इफिसियों 1:4; 1 पतरस 1:14-16।