Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
कुलुस्सियों 1:1 कुलुस्सियों 1:2 कुलुस्सियों 1:3 कुलुस्सियों 1:4 कुलुस्सियों 1:5 कुलुस्सियों 1:6 कुलुस्सियों 1:7 कुलुस्सियों 1:8 कुलुस्सियों 1:9 कुलुस्सियों 1:10 कुलुस्सियों 1:11 कुलुस्सियों 1:12 कुलुस्सियों 1:13 कुलुस्सियों 1:14 कुलुस्सियों 1:15 कुलुस्सियों 1:16 कुलुस्सियों 1:17 कुलुस्सियों 1:18 कुलुस्सियों 1:19 कुलुस्सियों 1:20 कुलुस्सियों 1:21 कुलुस्सियों 1:22 कुलुस्सियों 1:23 कुलुस्सियों 1:24 कुलुस्सियों 1:25 कुलुस्सियों 1:26 कुलुस्सियों 1:27 कुलुस्सियों 1:28 कुलुस्सियों 1:29



कुलुस्सियों 1:3 का भावार्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में यह पाठ कहता है: हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना करके अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। यहाँ प्रेरित पवित्रता और आशीर्वाद का संयोजन दिखता है—हमें परमेश्वर के प्रति शुक्रगुज़ारी के साथ साथ समुदाय के लिये निरंतर प्रार्थना करना सिखाया गया है।
पृष्ठभूमि और विशेष संदर्भ
कुलुस्सियों की चिट्ठी पौलुस ने करीब 60–62 ईस्वी के आस-पास लिखा माना जाता है, जो कुलुस शहर के विश्वस्तों तथा उनके विश्वासियों के लिए थी। यह ग्रंथ गिरजाघर के भीतर होने वाले धार्मिक मिश्रण और धर्मनिष्ठा के तनाव के बीच ईसाई विश्वास की वास्तविकता को स्थापित करता है—विशेषकर मसीह के पूर्णता, ग्राह्यम और प्रभुता के अंधेरे में आशा की रोशनी बतलाता है। इस verse में प्रेरित श्रोता को एकता, प्रार्थना और परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता की एक बारिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
interpretive observations
छोटा थीमैटिक सूची
अन्य ग्रंथों से सम्बन्ध (Cross-references)
1) रोम 12:12 — आशा में जोश और धैर्य के साथ प्रार्थना करते रहें; यह वही निरंतर प्रार्थना की खेती है जो यहाँ उभरती है।
2) एफिसीन 1:3 — परमेश्वर हमारे लिए सभी आत्मिक आशीषों का स्त्रोत है; यहाँ उसका धन्यवाद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है।
3) फिलिप्पी 4:6–7 — चिंता के समय भी prayer और thankfulness का संयम, जिससे शांति मिलती है—यह दर्शन कुलुस्सियों के पाठ से परिपूर्णता के साथ जुड़ता है।
पाठ से सीख और व्यवहारिक takeaway
हमinge अपने जीवन में भी नित्य प्रार्थना के अभ्यास को जगह दें, खासकर उन समुदायों के लिए जो हमारा साथ हों। परमेश्वर के पिता के रूप में क्रिया-योजना में यीशु मसीह के नाम से आभारी रहें; और हर दिन के छोटे-छोटे आशीर्वादों के लिये कृतज्ञ रहें।
ऐतिहासिक-उद्धरण (Public-domain commentators)
इस संस्करण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों के सतर्क संदर्भ दिए जाते हैं।
Matthew Henry: "We ought to be thankful to God for all blessings and to pray continually for others." (सार-सारांश आधारित व्याख्या)
Albert Barnes: "Prayer for others is a mark of true piety; it shows living faith and mutual love." (संकेत-उद्धरण)
Adam Clarke: "The constant prayers of faithful ministers and churches arise from a deep sense of dependency on God." (संकेत-उद्धरण)
नोट: ऊपर उद्धृत स्पष्ट वाक्यांशों को पूर्ण पाठ के रूप में नहीं दिया गया है; केवल उनके सार को संदर्भित किया गया है।