Old Testament
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कुलुस्सियों 1:27 पर टिप्पणी: परमेश्वर की महिमा की見ी थाह और मसीह की निवासिता
इस पद में पौलूस ने पहली बार कि स्पष्ट रूप से उन वस्तुओं को सामने रखा है, जो परमेश्वर ने संतों के लिए प्रदर्शित कीं हैं: ईश्वर की महिमा का प्रकाश, जिसे दूसरों के बीच रहने पर भी पहचाना जा सके। कहा गया है कि यह वह महिमा है, जिसे परमेश्वर उन लोगों तक प्रकट करना चाहता था जिन्हें वे मानते हैं — विशेषकर उनजातियों के बीच भी, ताकि मसीह तुम में रहता है। यहाँ “तुम में रहता है” से आशय यह है कि मसीह का स्थाई, आंतरिक निवास आपके जीवन के केंद्र में है, न कि केवल बाहरी विश्वास का संकेत।
पद का समकालीन संदर्भ में अध्ययन
कुलुस्सियों के चर्च में प्रेरित पौलूस यह दिखाते हैं कि कैसे ईसाई जीवन का केंद्र मसीह का बनना चाहिए। यह वाक्य स्पष्ट करता है कि ईश्वर की महिमा देखने और जानने की सच्ची राह यीशु मसीह के भीतर है; वही揭示 करते हैं कि Gentile—यानी अन्यजाति—के लिए भी यह बात खोली गई। इससे यह सिद्ध होता है कि ईश्वर का बंधन नया समुदाय एक साथ विविध पृष्ठभूमि वालों को एक साथ कैसे जोड़ता है: मसीह भीतर है, और वही परिवर्तनकारी सत्ता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल उद्धरणों के साथ तुलना
यह संदेश अन्य जगहों पर भी मिलता है जहाँ मसीह का निवास हमारे भीतर एक वास्तविक परिवर्तन का संकेत बनता है:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- जब आप किसी काम, संबंध, या मुश्किल परिस्थिति से गुजरते हैं, तो याद रखें कि मसीह आपके भीतर है। उसकी महिमा से प्रेरित होकर आत्म-नियंत्रण, प्रेम और धैर्य में वृद्धि संभव है।
- क्रिस्टियन जीवन में विविधताओं के बावजूद एकता बनाए रखना आवश्यक है; क्योंकि मसीह का निवास हर believer में एक साथ एक महान उद्देश्य के लिए कार्य कर रहा है।
Cross-reference - समझ में वृद्धि के लिए
1) यूहन्ना 17:23 — पिता के साथ एकता के दृष्टांत में भी यह कहा गया है कि वे निश्चयति रहते हैं कि मसीह भीतर है और उनके बीच भी यह सम्बन्ध दिखे।
2) इफिसियों 3:17 — आस्ता कि मसीह आपके हृदयों में दृढ़ता से निवास करें, जिससे आप प्रेम में गहराई में बढ़ें।
3) कुलुस्सियों 2:9-10 — कारण कि मसीह में सारी परमेश्वरिता शरीर में देहाती है, और आप उसके द्वारा परिपूर्ण होते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentators)
मैथ्यू हेन्ली (Matthew Henry) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) के आम-लोकप्रिय टिप्पणी-रेखाओं से धारणा मिलती है कि परमेश्वर की महिमा का खुलना मसीह के भीतर प्रकट होने से होता है और यह एक प्रेरक, परिवर्तनकारी अनुभव है।
मर्यादित रूप से उद्धृत संकेत: "Christ in you, the hope of glory" जैसी धारणा की पुनरावृत्ति इस विचार को पुष्ट करती है कि मसीह के भीतर का निवास जीवन की नयी दिशा निर्धारित करता है।
संक्षेप
कुलुस्सियों 1:27 बताता है कि परमेश्वर ने अपने स्वर्गीय महिम्त को उन सिद्धान्तों के भीतर प्रकट किया है जिन्हें मसीह के भीतर अनुभव किया जा सकता है। यह निवासीय विश्वास—यानी मसीह तुममें रहता है—न केवल व्यक्तिगत आस्थाओं की पुष्टि है, बल्कि एक नई सामाजिक एकता का आधार भी है, जिसमें हर जाति और पृष्ठभूमि एक साथ परमेश्वर की महिमा के प्रकाश को देखती है।