Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 9:1 प्रेरितों के काम 9:2 प्रेरितों के काम 9:3 प्रेरितों के काम 9:4 प्रेरितों के काम 9:5 प्रेरितों के काम 9:6 प्रेरितों के काम 9:7 प्रेरितों के काम 9:8 प्रेरितों के काम 9:9 प्रेरितों के काम 9:10 प्रेरितों के काम 9:11 प्रेरितों के काम 9:12 प्रेरितों के काम 9:13 प्रेरितों के काम 9:14 प्रेरितों के काम 9:15 प्रेरितों के काम 9:16 प्रेरितों के काम 9:17 प्रेरितों के काम 9:18 प्रेरितों के काम 9:19 प्रेरितों के काम 9:20 प्रेरितों के काम 9:21 प्रेरितों के काम 9:22 प्रेरितों के काम 9:23 प्रेरितों के काम 9:24 प्रेरितों के काम 9:25 प्रेरितों के काम 9:26 प्रेरितों के काम 9:27 प्रेरितों के काम 9:28 प्रेरितों के काम 9:29 प्रेरितों के काम 9:30 प्रेरितों के काम 9:31 प्रेरितों के काम 9:32 प्रेरितों के काम 9:33 प्रेरितों के काम 9:34 प्रेरितों के काम 9:35 प्रेरितों के काम 9:36 प्रेरितों के काम 9:37 प्रेरितों के काम 9:38 प्रेरितों के काम 9:39 प्रेरितों के काम 9:40 प्रेरितों के काम 9:41 प्रेरितों के काम 9:42 प्रेरितों के काम 9:43



सीधे अर्थ की स्पष्ट समझ
प्रेरितों के काम 9:37 बताता है कि तेज़ी से फैली बीमारी के कारण एक विश्वासी बहन मर जाती है और मरने के बाद उसे नहलाकर ऊपर वाले कमरे में रखा गया। यह पाठ तत्कालीन समुदाय की भलाई, प्रार्थना और समुदाय-समर्थन की आवश्यकता को उजागर करता है; साथ ही यह दर्शाता है कि मर etkin समय में भी पवित्रता, संस्कार और दिखावे के बजाय निरन्तर विश्वास और प्रार्थना की आवश्यकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना आंध्र-समुदाय के भीतर की स्थितियों को दिखाती है, जहाँ शिष्य समूह एक-जुट होकर थीं और प्रेरित पॉल के मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ रहे थे। उस समय का समाज पाप, बीमारी और सामाजिक असमानताओं से घिरा था; फिर भी विश्वासियों ने मिलकर एक दूसरे के लिए संवेदना, सेवा और प्रार्थना की परंपरा को बनाए रखा।
व्याख्यात्मक विचार
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अन्य प्रासंगिक आयतें
प्रेरितों के काम 9 के आसपास की घटनाओं में सामूहिक पहलों का उल्लेख मिलता है—प्रार्थना, विश्वास के साथ मरहम-चिकित्सा और समाज के भीतर समानता की भावना। जुड़े विचारों के लिए देखें: (1) प्रेरितों के काम 9:36-42 – जीवित-उद्धार और पुनर्जीवन के संकेत; (2) मत्ती 9:24-25 – दुःख के समय में विश्वास और सम्मान। (3) मरकुस 5:38-42 – मृत्यु के बाद के मणिकर्म और ईश्वरीय शक्ति का प्रदर्शन।
इन संदर्भों का संक्षिप्त अर्थ: विश्वास और समुदाय एकाग्र होकर קשियों को संभालते हैं; परिशिष्ट-आत्मा के मार्गदर्शन में प्रार्थना से चमत्कार संभव होते हैं और प्रभु की महिमा प्रकट होती है।
संदेश-योग्य निष्कर्ष
घटना से प्रेरित पाठ में यह विचार प्रमुख है कि संकट के समय में भी समुदाय एक दूसरे के लिए सम्मान, सेवा और प्रार्थना के साथ खड़ा रहता है। हमारी व्यावहारिक पाठ है—कठिन समय में बंधनों को मजबूत करें, आवश्यक सेवाओं में हिस्सा लें और ईश्वर की योजना पर विश्वास बनाए रखें।
सीधे उद्धरण (जहाँ उपयुक्त हो)
हेनरी, Barnes, Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से संक्षिप्त पंक्तियाँ इस पाठ के अर्थ को स्पष्ट करते हैं—
1) Matthew Henry: "In death, as in life, the church is called to consolation and prayer." (अनुवाद में स्पष्टीकरण)
2) Albert Barnes: "The believers exercised a gentleness and care befitting the body of Christ, even in the face of death."
3) Adam Clarke: "Where sorrow meets faith, the power of God is near to sustain and to raise up."