Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 10:1 दानिय्येल 10:2 दानिय्येल 10:3 दानिय्येल 10:4 दानिय्येल 10:5 दानिय्येल 10:6 दानिय्येल 10:7 दानिय्येल 10:8 दानिय्येल 10:9 दानिय्येल 10:10 दानिय्येल 10:11 दानिय्येल 10:12 दानिय्येल 10:13 दानिय्येल 10:14 दानिय्येल 10:15 दानिय्येल 10:16 दानिय्येल 10:17 दानिय्येल 10:18 दानिय्येल 10:19 दानिय्येल 10:20 दानिय्येल 10:21



पठनीय पद और तत्काल संदर्भ
दानिय्येल 10:16 में नबीयत्वीय दृष्टि का एक संवेदनशील क्षण वर्णित है। यहाँ दानिय्येल ने स्वर्गीय प्रकट्यों और एक दृढ़ आनंदित परदे से लौटकर अनुभव की गई मानवीय कमजोरी व्यक्त की है। इससे पहले (ऐसा पाठ्यक्रम में देखा जा सकता है) दानिय्येल को आकाशीय दूतों द्वारा दी गई दृष्टि और रहस्यों की व्याख्या सुनने को मिलती है, तथा यहां वह दूत जिसे उसने देखा था, उससे शारीरिक संपर्क होता है—“मनुष्य के समान किसी ने मेरे होंठ छुए”—और यह स्पर्श उसे बोलने के योग्य बनाता है।
पाठ में क्या बताया गया है — परमेश्वर और विश्वास के बारे में
यह वचन परमेश्वर के संदेश के संचार के लिए दिव्य सहायता पर बल देता है। दानिय्येल की असमर्थता यह प्रकट करती है कि मानव केवल अपनी क्षमता से दिव्य रहस्यों को सहन या व्यक्त नहीं कर सकता; उसे परमेश्वरीय शक्ति और प्रभुत्व से समर्थित होना आवश्यक है। यही तथ्य ईश्वरीय दया और अनुग्रह की ओर संकेत करता है—परमेश्वर अपने दूतों के माध्यम से मनुष्यों को तैयार करता और सशक्त बनाता ताकि वे सच्चाई सुनाएँ और ग्रहण कर सकें।
महत्वपूर्ण शब्द और प्रतिमान
“मनुष्य के समान” — यह वाक्यांश अक्सर स्वर्गदूतों के मानवीय रूप के वर्णन में आता है; वे दानिय्येल को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले और संभोग योग्य रूप में प्रकट हुए। यह दिखाता है कि दिव्य प्रकाशन प्रायः मानवीय अनुभव की भाषा और प्रतिमाओं में आता है ताकि मनुष्य समझ सके।
होंठ छूना — इस प्रतीकात्मक क्रिया का अर्थ है कहा जाने वाला संदेश देने की क्षमता और पवित्रता देना। समान रूप से यीशु के प्रार्थना में पवित्रकर्मों की तैयारी के सन्दर्भ में भी इस तरह के स्पर्श का प्रयोग मिलता है और यह स्मरण कराता है कि बोलने की शक्ति परमेश्वर से आती है।
संबंधित पद और उनकी व्याख्या
संदर्भित पुरानी टीकाएँ — संक्षेप उद्धरण
मैथ्यू हेनरी का ध्यान इस बात पर था कि पद दिखाता है कि ईश्वर मनुष्य के उपर निर्भर करने के बजाए स्वयं उनकी जाति में उतरता है और उन्हें बोलने के योग्य बनाता—“He…put his mouth” (संक्षेप उद्धरण)। अल्बर्ट बार्न्स ने भी संकेत किया कि यह स्पर्श दानिय्येल में शब्द कहने की सामर्थ्य पुनर्स्थापित करने का रूपक है। (उद्धरण संक्षेप रूप में दिए गए हैं।)
आधुनिक जीवन-प्रयोग
ऐसा अनुभव आज के विश्वासियों के लिए भी प्रासंगिक है: जब परमेश्वर कोई सच्चाई देता है, तो अक्सर हमें उसे ग्रहण करने और व्यक्त करने के लिए आंतरिक सहायता की आवश्यकता होती है। हमारा पहला पाठक-प्रतिक्रिया यह हो सकती है कि हम अपनी कमजोरी स्वीकार करें और दैवीय मार्गदर्शन की प्रार्थना करें। दूसरा व्यावहारिक सुझाव: जब कोई कठिन सत्य सामने आए, तो उसे साझा करने से पहले प्रार्थना और आत्मिक तैयारी कर लें—यही स्वर्गीय स्पर्श है जो भय और असमर्थता को हटाकर बोलने की शक्ति देता है।
संक्षेप में, दानिय्येल 10:16 हमें बताता है कि दिव्य दृष्टि से लौटने पर भी मानव जीभ और मन को परमेश्वर की मदद चाहिए; परमेश्वर स्वयं वह हस्तक्षेप करता है जो मनुष्य को बोलने और समझने लायक बनाता है।