Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 10:1 दानिय्येल 10:2 दानिय्येल 10:3 दानिय्येल 10:4 दानिय्येल 10:5 दानिय्येल 10:6 दानिय्येल 10:7 दानिय्येल 10:8 दानिय्येल 10:9 दानिय्येल 10:10 दानिय्येल 10:11 दानिय्येल 10:12 दानिय्येल 10:13 दानिय्येल 10:14 दानिय्येल 10:15 दानिय्येल 10:16 दानिय्येल 10:17 दानिय्येल 10:18 दानिय्येल 10:19 दानिय्येल 10:20 दानिय्येल 10:21



मतलब का प्रत्यक्ष सार
दानिय्येल 10:20 में दिख रहा है कि दानिय्येल को एक आशीर्वचनकर्ता यह बताता है कि वह क्यों आया है: वह फारस के प्रधान से लड़ने के लिए गया है, और जैसे ही वह निकलकर जाएगा, यूनान का प्रधान आएगा। इसका तात्पर्य यह है कि दिव्य-योजना अनेक क्षेत्रीय शक्तियों की गति से चलती है और दानिय्येल का सन्देश उसी क्रम को उद्घाटित करता है जिसमें इतिहास ईश्वरीय योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
पार्श्व-प्रसंग (Contextual background)
दानिय्येल 10 अध्याय में एक गहराई से प्रेरित दृश्य है जिसमें मसीही भविष्यवाणी के पूर्व-पर्व दिखते हैं: दानिय्येल एक दिव्य दर्शन देखता है और स्वर्गीय महानियों के संघर्ष में भागीदारी का संकेत पाता है। इस verse में संकेतिक भाषा है— फारस के प्रधान और यूनान के प्रधान की उपस्थिति दर्शाती है कि साम्राज्यों के बीच की राजनीति और स्पर्धा दैवीय आदेश के अनुसार संचालित होती है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
छोटे थीमैटिक बिंदु
अन्य प्रतिमान पाठ (Cross-references)
1) दानिय्येल 8:20-21 में पश्चातापक वर्णन: फारस और यूनान का क्रम और उनके प्रतीकात्मक प्रभुत्व का संकेत। यह स्पष्ट करता है कि विश्व-सम्भावनाओं के बारे में पूर्व जानकारी दिव्यदृष्टि से मिलती है।
2) एपन 17:10-11 पर विचार: पृथ्वी के राजाओं के क्रम ईश्वर के योजनात्मक नाटक के भाग हैं और एक ही समय में “जो अभी है और जो अब नहीं है” की प्रकृति को दर्शाते हैं।
3) प्रेरित पवित्र संदेशों में सुसंगतता: स्तोत्र 2 में क़ायदे और सत्ता के अधिकार परमेश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि उनके मार्ग के साथ मिलकर चलते हैं।
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
1) कठिन राजनीतिक दबाव के बीच भी ईश्वर के उद्देश्य प्रकट होते हैं; इसलिए धीरज और प्रार्थना बनाए रखें।
2) प्रभु के महान कालक्रम को समझना सरल नहीं, पर यह विश्वास दिलाता है कि हमारे इतिहास में भी रतिशक्ति और कृपा है।
उद्धृत स्रोत संकेत (public-domain से एक-एक वाक्य ανα)
यदि आवश्यकतानुसार क़ायदे के रूप मेंMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त शब्द उद्धृत हों, तो वे सामान्य रूप से घटना के दायरे में रहते हैं और पूर्ण-वाक्य उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है।