दानिय्येल 2:33 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसकी टाँगें लोहे की और उसके पाँव कुछ तो लोहे के और कुछ मिट्टी के थे।

दानिय्येल 2:33 पद-दर-पद बाइबल टीका

दायानीएल 2:33 का सीधे शब्दों में अर्थ

उसकी टाँगें लोहे की और उसके पाँव कुछ तो लोहे के और कुछ मिट्टी के थे।

संदर्भभूमि

यह दृश्य एक विशाल स्वप्न का भाग है जिसमें बेबीलोन की महाशक्ति के पतन का भविष्यदर्शी चित्रण है। नबी दानिय्येल ने यह स्वप्न राजा नबूकद्नessar की रात्रि-स्वप्न में देखा था, जिसमें विश्व-राज्यों के क्रम और उनके स्थायित्व की कमी पर प्रकाश डाला गया है। टाँगें लोहे की और मिट्टी के पाँव एक ही कुल की अस्थिरता और मिश्रित स्थिति का प्रतीक हैं: कठोरता और नरमी, सुदृढ़ता और दुराव का संगम।

व्याख्यात्मक अवलोकन

इस पंक्ति में दो भाग एक साथ आते हैं — लोहे की टाँगे (बहुधा दृढ़ता, सत्ता-शक्ति, युद्ध-पराक्रम) और मिट्टी के पाँव (कमज़ोरी, रोमैंक, मार्गदर्शन की कमी)। यह दर्शाता है कि चौथा राज्य अपने भीतर विविध प्रकार की संरचना लिए है, जो भविष्य में प्रतिष्ठान के पतन के संकेत देता है। नीचे से ऊपर की ओर विश्व-राज्य की चढ़ाई के क्रम में यह भाग महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ स्थायित्व और अस्थिरता का एक साथ चलना स्पष्ट होता है।

Interpretive observations

  • लोहे की टाँगें— दृढ़ सत्ता, परन्तु वे भी युग-परिवर्तन के साथ कमजोर पड़ सकते हैं; यह एक विभाजनशील शक्ति की सूचक है जो बाह्य कठोरता के बावजूद आंतरिक अस्थिरता से बोझिल है।
  • मिट्टी के पाँव— पृथ्वी-जनित, अपेक्षाकृत कमज़ोर बुनावट; यह दर्शाता है कि अंतिम चरण में मानव-निर्मित व्यवस्थाओं में दखल और नियंत्रण कम होगा, और परमेश्वर की योजना उभरकर सामने आएगी।
  • कुल मिलाकर एक मिश्रित संरचना: स्थिर शीर्षस्थता के साथ अंततः रोका-टुकड़े और विभाजन।

एक-लाइन थीम

शक्तिशाली बाहरी संरचना भी अंततः परमेश्वर के souverän निर्णय के अधीन है, और पृथ्वी-राज्यों की टिकाऊता मानव-निर्माण के पंजों में नहीं टिकती।

संबंधित आयतें

1) दानिय्येल 2:34-35 में वही दृश्य स्पष्ट होता है: भंग पड़ी मूर्ति और शहीद सूर्य-चन्द्र के साथ संयोजन। यह बताता है कि मानव इतिहास का क्रम परमेश्वर की गहराई से निर्धारित योजना के अनुसार गतिशील है।

2) दानिय्येल 7:7-8 में चौथा प्रवृत्ति—Crossing-राज्य—के बारे में आगे विवरण मिलते हैं: एक कठोर, परिश्रमी सिंहासन जो अंततः ईश्वर की प्रभुता के सामने झुकना सीखता है।

3) यिर्मयाह 18:6-8 में मिट्टी- potter की छवि भी मिलती है: परमेश्वर मानव-राज्यों की संरचना को अपना कार्य-उद्देश्य समझाते हैं और वे पलट भी सकते हैं।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

1) वर्तमान सत्ता चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हो, परमेश्वर की योजना से बाहर नहीं जा सकती। हमारा धैर्य और नैतिक प्रशिक्षण वही रहना चाहिए, जो प्रभु के राज्य का स्थायित्व देखाता है।

2) हमारी आशा विश्व-राज्य के स्थायित्व में न होकर परमेश्वर के और उसके प्रभुता में होनी चाहिए।

पूर्व-प्रकाशित टिप्पणी से मिलन

Matthew Henry की विचारधारा के भीतर संकेत मिलता है कि यह स्वप्न मानवीय-राज्यों के अस्थिर और परिवर्तनशील स्वभाव को उजागर करता है, ताकि परमेश्वर की सार्वभौमिक परिषद स्पष्ट हो। Albert Barnes भी इस भाग को दर्uj करता है कि मानव शक्ति कितनी भी प्रबल हो—वह अंततः परमेश्वर के निर्णय के अधीन है। Adam Clarke इस दृष्टिकोण को सुदृढ़ करते हैं कि पृथ्वी-राज्यों के संस्थान समय-समय पर टूट-फूट जाते हैं, पर प्रभु की योजना अक्षुण्ण रहती है। यह तीनों ने मिलकर एक संयुक्त विचार दिया है: पृथ्वी की सत्ता की स्थायित्वता सीमित है, पर परमेश्वर की विरासत अनंत है।

मात्र 2-3 पंक्तियाँ उद्धरण: “Thomas Henry” आदि के पूर्ण उद्धरण केवल यदि उपलब्ध हों, तो उल्लेखित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 2:33 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“तब मेरे मन में यह इच्छा हुई कि उस चौथे जन्तु का भेद भी जान लूँ जो और तीनों से भिन्न और अति भयंकर था और जिसके दाँत लोहे के और नख पीतल के थे; वह सब कुछ खा डालता, और चूर-चूर करता, और बचे हुए को पैरों से रौंद डालता था।

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दानिय्येल 2:40 (HINIRV) »
और चौथा राज्य लोहे के तुल्य मजबूत होगा; लोहे से तो सब वस्तुएँ चूर-चूर हो जाती और पिस जाती हैं; इसलिए जिस भाँति लोहे से वे सब कुचली जाती हैं, उसी भाँति, उस चौथे राज्य से सब कुछ चूर-चूर होकर पिस जाएगा।

दानिय्येल 7:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
दानिय्येल 7:7 (HINIRV) »
फिर इसके बाद मैंने स्वप्न में दृष्टि की और देखा, कि एक चौथा जन्तु है जो भयंकर और डरावना और बहुत सामर्थी है; और उसके बड़े-बड़े लोहे के दाँत हैं; वह सब कुछ खा डालता है और चूर-चूर करता है, और जो बच जाता है, उसे पैरों से रौंदता है। और वह सब पहले जन्तुओं से भिन्न है; और उसके दस सींग हैं।

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