Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 2:1 दानिय्येल 2:2 दानिय्येल 2:3 दानिय्येल 2:4 दानिय्येल 2:5 दानिय्येल 2:6 दानिय्येल 2:7 दानिय्येल 2:8 दानिय्येल 2:9 दानिय्येल 2:10 दानिय्येल 2:11 दानिय्येल 2:12 दानिय्येल 2:13 दानिय्येल 2:14 दानिय्येल 2:15 दानिय्येल 2:16 दानिय्येल 2:17 दानिय्येल 2:18 दानिय्येल 2:19 दानिय्येल 2:20 दानिय्येल 2:21 दानिय्येल 2:22 दानिय्येल 2:23 दानिय्येल 2:24 दानिय्येल 2:25 दानिय्येल 2:26 दानिय्येल 2:27 दानिय्येल 2:28 दानिय्येल 2:29 दानिय्येल 2:30 दानिय्येल 2:31 दानिय्येल 2:32 दानिय्येल 2:33 दानिय्येल 2:34 दानिय्येल 2:35 दानिय्येल 2:36 दानिय्येल 2:37 दानिय्येल 2:38 दानिय्येल 2:39 दानिय्येल 2:40 दानिय्येल 2:41 दानिय्येल 2:42 दानिय्येल 2:43 दानिय्येल 2:44 दानिय्येल 2:45 दानिय्येल 2:46 दानिय्येल 2:47 दानिय्येल 2:48 दानिय्येल 2:49



दानिय्येल 2:34—पर्व की स्मरणीय दृष्टि और पत्थर का उल्लंघन
प्रत्यक्ष संदर्भ: यह दृश्यNebuchadnezzar के स्वप्न के भाग के रूप में आता है, जहाँ दानिय्येल ने राजा की दृष्टि में चरितार्थ होती एक विशाल मूर्ति के ध्वस्त होने की भविष्यवाणी समझाई। इस अंश में पत्थर का उखड़ना और मूर्ति के पाँवों पर लगना दृश्य के भीतर परमावतार की सत्ता और मानव-राज्यों के चूर-चूर हो जाने का संकेत है।
पठित पाठ से स्पष्ट क्या उभरता है
यह शिक्षा देती है कि संसार के बड़े साम्राज्य पृथ्वी की रोशनी नहीं हैं, बल्कि परमेश्वर की योजना के अनुरूप एक क्षणभंगुर क्रम-कथा का हिस्सा हैं। पत्थर—जो यहाँ “बिना किसी के खोदे” स्वतः उखड़कर गिरता दिखता है—यहोवा के एक अद्भुत करिश्मे का प्रतीक है: वह जो गढ़े-गढ़ाए ढांचे को तोड़कर अपने राज को स्थापित करता है। उस पत्थर के आना से लोहे और मिट्टी के मिश्र राजसत्ता के पतन की भविष्यवाणी पूरी होती है और ईश्वर के राज्य की स्थापना की दिशा साफ हो जाती है।
महत्वपूर्ण शब्द और प्रतिमाएँ
अन्य बाइबल पाठ से संबंध
– दानिय्येल 2:44 के अंत: “उस दिन ईश्वर का राज्य स्थिर रहेगा” के साथ यह दृश्य समन्वित है, जहाँ पृथ्वी के राज-तंत्र एक दिन नष्ट होकर ईश्वर का राज्य स्थापित होगा।
– मत्ती 21:44 में पत्थर के गिरने या उसको उठाने की महान शक्ति का संकेत मिलता है—जो स्पष्ट है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य को रोक नहीं सकता।
–इसायाह 28:16 भी ईश्वरीय ढहने वाले ढांचे के विरुद्ध विश्वास के पत्थर की स्थापना की बात कहता है।
पढ़ने की आज की उपयोगिता
आमूल्यमुखी टिप्पणी (लेखक-स्वर से सार)
पवित्रशास्त्र के इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं जब मानव-निर्मित महानता अपने क्षय के कगार पर होती है; तब ईश्वर अपने महान निश्चय को सामने रखता है। यह वाक्य दानिय्येल के स्वप्न में एक स्पष्ट विधान है: परमेश्वर का राज्य पृथ्वी पर स्थापित होगा, और वह राज्य मनुष्य की नश्वरता से ऊपर उठकर स्थिर रहेगा।
महत्वपूर्ण उद्धरण पाठकों के लिए: “पत्थर ने आप ही आप उखड़कर मूर्ति के पाँवों पर लगकर उसे चूर-चूर कर डाला”—यहां भाषा में हलचल परमेश्वर की सत्ता के बिना किसी मानवीय जुगाड़ के गिरावट को दर्शाती है।
संकेतित उद्धरण (सार-साक्ष्य)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों का संक्षेप देखना चाहें, तो वे इस प्रकार खुलते हैं: यह दृश्य परमेश्वर के राज के आगमन की घोषणा है और पृथ्वी पर मानव-राज्यों की विविधता के बावजूद उसकी प्रभुता अपरिवर्तनीय है; पत्थर का आना और मूर्ति का ध्वस्त होना ईश्वर के न्याय और नियति के संतुलन का संकेतक है।