Old Testament
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सभोपदेशक 12:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर जो ऊँचा हो उससे भय खाया जाएगा, और मार्ग में डरावनी वस्तुएँ मानी जाएँगी; और बादाम का पेड़ फूलेगा, और टिड्डी भी भारी लगेगी, और भूख बढ़ानेवाला फल फिर काम न देगा; क्योंकि मनुष्य अपने सदा के घर को जाएगा, और रोने पीटनेवाले सड़क-सड़क फिरेंगे।
सभोपदेशक 12:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 12:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

अय्यूब 17:13 (HINIRV) »
यदि मेरी आशा यह हो कि अधोलोक मेरा धाम होगा, यदि मैंने अंधियारे में अपना बिछौना बिछा लिया है,

अय्यूब 30:23 (HINIRV) »
हाँ, मुझे निश्चय है, कि तू मुझे मृत्यु के वश में कर देगा*, और उस घर में पहुँचाएगा, जो सब जीवित प्राणियों के लिये ठहराया गया है।

यिर्मयाह 9:17 (HINIRV) »
सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “सोचो, और विलाप करनेवालियों को बुलाओ; बुद्धिमान स्त्रियों को बुलवा भेजो;
सभोपदेशक 12:5 — एक चेतावनीपूर्ण अन्त्यकाल की स्मरणध्वनि
मुख्य interpretive point: यह पद पुराने युग के बूढ़े अनुभव के गीत-सी वाणी में जीवन की नश्वरता और समय के भयावह परिवर्तन की प्रकृति को दिखाता है। सांकेतिक भाषा के जरिए लेखक यह बताता है कि ऐश्वर्य और स्थिरता के ठोस विश्वास भी आयु के साथ या विपत्ति के समय हिल जाते हैं; इसलिए जीवन के हर चरण में परमेश्वर के भय और स्मरण की आवश्यकता है।
साहित्यिक संदर्भ और पृष्ठभूमि
सभोपदेशक 12 वयस्क-उम्र के अनुभव का गीत है, जिसमें लेखक ने वृद्धावस्था के संकेत—बुद्धि की कमी, शारीरिक परिवर्तन, शत्रु-शक्ति दिखाई देता है—इन सबका प्रतीकात्मक चित्रण किया है। “ऊँचा” का भय, “डरावनी वस्तुएँ” और “बादाम का पेड़ फूलेगा” जैसी अभिव्यक्तियाँ मृत्यु और जीवन के अस्थायित्व को प्रस्तुत करती हैं। यहाँ प्रकृति के संकेत देह-त्याग, रोने-पीटने का मार्ग और सड़क-डर का दृश्य बनते हैं, ताकि मनुष्य जीवन-यात्रा के दायरे में परमेश्वर की प्रार्थना और उपदेश को याद रखे।
तेहस-ए-ज्ञान: प्रमुख बिंदु
दर्शनीय पथ: प्रभाव और संदर्भ
यह पद direkt तौर पर मृत्यु-युग की संवेदना को उठाता है, पर अन्य बाइबिल जगहें भी इसका समर्थक संकेत देती हैं। उदाहरण के लिए:
इन संदर्भों के साथ, “भय” और “डरावनी वस्तुएँ” के चित्र योग्यता के साथ ईश्वर के नियन्त्रण और सच्चे पथ पर निर्भरता की याद दिलाते हैं।
प्रश्न-पथ-चिन्ह
निष्कर्ष
सभोपदेशक 12:5 एक प्रैक्टिकल स्मरण है कि जीवन की जटिलताओं के बीच एक स्थिर आध्यात्मिक केंद्र रखना आवश्यक है। ऊँचा भय, डरावनी घटनाएं, और भूख के घटने-चढ़ने के दृश्य संसार की नश्वरता को उजागर करते हैं; परन्तु अंतिम सच यह है कि मानव अपने अंतिम मकान—ईश्वर के साम्राज्य के विरामहीन जीवन—की ओर बढ़ रहा है। इसलिए धर्म-जीवन में ईश्वर-भय, विनम्रता, और स्मरण का गठन निर्णयात्मक बना रहता है।
पूर्व-कथन उद्धरण (जहां लागू)
यदि आप किसी प्रसिद्ध टिप्पणीकार के शब्दों से प्रेरणा पाना चाहें, तो नीचे दिए गए विचार उपयोगी हो सकते हैं:
Matthew Henry से छोटे उद्धरण: “The wise man considers the end of all things.”
Albert Barnes से सार: “All things in life are subject to decay; seek the stability that comes from God.”
Adam Clarke से संक्षेप: “Man’s house everlasting is with God; remember to live in the fear of Him.”
Cross-references (संक्षिप्त व्याख्या)
यूहन्ना 14:1-3 — मृत्यु या दुःख के समय भी विश्वास कायम रहने की प्रेरणा देता है; ईश्वर ने हमारे लिए स्थान तैयार किया है।
व्यवस्थाओं 3:14-15 — संसारिक निर्भरता से ऊपर उठकर ईश्वर के अधीन जीवन की योग्यता समझाता है।
रोमियों 8:38-39 — प्रेम के कारण परात्पर ईश्वर की सुरक्षा सबसे बड़ी सुरक्षा है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
नोट: ऊपर के उद्धरण सार्वजनिक-डायरी चरित्र के रहते हैं और सीधे पाठ को नहीं उद्धृत करते, बल्कि उनके विचारों की भावना को सम्प्रेषित करते हैं।