Old Testament
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सभोपदेशक 12:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सड़क की ओर के किवाड़ बन्द होंगे, और चक्की पीसने का शब्द धीमा होगा, और तड़के चिड़िया बोलते ही एक उठ जाएगा, और सब गानेवालियों का शब्द धीमा हो जाएगा।
सभोपदेशक 12:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 12:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 25:10 (HINIRV) »
और मैं ऐसा करूँगा कि इनमें न तो हर्ष और न आनन्द का शब्द सुनाई पड़ेगा, और न दुल्हे या दुल्हिन का, और न चक्की का भी शब्द सुनाई पड़ेगा और न इनमें दिया जलेगा। (प्रका. 18:22,23)

2 शमूएल 19:35 (HINIRV) »
आज मैं अस्सी वर्ष का हूँ; क्या मैं भले-बुरे का विवेक कर सकता हूँ? क्या तेरा दास जो कुछ खाता पीता है उसका स्वाद पहचान सकता है? क्या मुझे गायक या गायिकाओं का शब्द अब सुन पड़ता है? तेरा दास अब अपने स्वामी राजा के लिये क्यों बोझ का कारण हो?

प्रकाशितवाक्य 18:22 (HINIRV) »
वीणा बजानेवालों, गायकों, बंसी बजानेवालों, और तुरही फूँकनेवालों का शब्द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा, और किसी उद्यम का कोई कारीगर भी फिर कभी तुझ में न मिलेगा; और चक्की के चलने का शब्द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा; (यशा. 24:8, यहे. 26:13)
सभोपदेशक 12:4 पर रहस्योद्घाटन: जीवन के अंतिम क्षणों की नादानी और जागरूकता
यह पद जीवन के अंतिम दिनों की चिन्ता और धर्म-संवेदना की भाषा को दिखाता है। वृद्धावस्था के साथ आते क्लेश, शब्दों की ढलान और सांसारिक गतिविधियों का धीमा पड़ना—इन सबका संकेत यह है कि मनुष्य को अपनी चेतना और परमेश्वर के साथ संबंध को सुव्यवस्थित रखना चाहिए। यह पात्रतात्मक दृश्य एक ऐसी चेतावनी है कि सत्ता, सुख और वैभव पर निर्भर रहने से नहीं, बल्कि प्रेरणा, स्मृति और सच्चे धर्म के अभ्यास से जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है।
पद की मूल संदर्भगर्भता और संदर्भ
सभोपदेशक में लेखक बुढ़ापा और मृत्यु की आकस्मिकता के बारे में बोलते हैं। 12 अध्याय का यह अंश भाग जीवन के अवसान के निकट आने पर मनुष्य के विचारों, शब्दों और क्रियाओं के धीमे पड़ जाने का चित्रण है। सड़क की ओर के किवाड़ बन्द होना, चक्की पीसने के शब्द धीमे पड़ना, चिड़िया बोलने के समय से पहले उठना—इन सभी वाक्यों में शाब्दिक संकेत के साथ भीतर की आत्म-चेतना का आह्वान है। यह और भी स्पष्ट करता है कि जीवन के क्षण-क्षण अस्त-व्यस्त हो जाते हैं, पर आत्मिक तीव्रता की आवश्यकता सदैव बनी रहे।
मुख्य संदेश
કुंजी thèmes और तुलनात्मक विचार
इस पाठ में नीचे दिए गए तत्वांत एकजुट होकर जीवन की पूर्णता की खोज के संकेत देते हैं:
क्रॉस-रेफरेन्स (संदर्भ)
इन आयामों को समझने के लिए कुछ सुसंगत संदर्भ दिए जाते हैं:
इन संदर्भों के माध्यम से हम देखते हैं कि बाहरी धीमापन भी आंतरिक ईश्वर-चेतना को मजबूत कर सकता है, यदि 우리는 पवित्र पाठ के अनुसार आचरण करें।
हिंदी से पवित्र-जीवन का अनुप्रयोग
हमारे दैनिक जीवन में इस verse से सिके अनुभव: अपने विचारों को परमेश्वर के वचन के अनुरूप ढालना; हर दिन छोटी-छोटी बातों में भी ईमानदारी और नम्रता रखना; और जरूरी यह कि उम्र के साथ आने वाली कमजोरियों के बावजूद आत्म-नियमन और प्रार्थना की आदत बनाए रखना। यह समय है आत्म-चेतना और सेवाभाव के पुनर्निर्माण का।
संक्षिप्त devotional reflection
जीवन के किसी भी चरण में, जब शब्द धीमे पड़ने लगें, तो हमारी आत्मा को एक बार और सुनने का अवसर मिलता है। परमेश्वर के सामने सच बोलना, प्रेमपूर्ण व्यवहार रखना और अपनी आशा को निर्भर बनाये रखना—यही एक उज्जवल मार्ग है। “तुम नहीं जाती कि मुझे क्यों चाहते, पर मैं तुम्हारे साथ हूँ”—यही परमेश्वर की आवाज है जो कठिन समय में भी जीवित प्रतीत होती है।
नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उद्धरणों से आवश्यक संगीतमय वाक्यांश सुरक्षित हैं; नीचे केवल संदर्भ के लिए उनके प्रमुख विचार संक्षेप में बताए जा रहे हैं:
उद्धरण नोट: यह लेख सीधे उनके संक्षेप विचारों पर आधारित है; उनमें से कोई भी पूर्ण वाक्य नहीं दिया गया है जब तक कि टिप्पणी में स्पष्ट रूप से उद्धृत न हो।