Old Testament
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सभोपदेशक 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब मैंने सब परिश्रम के काम और सब सफल कामों को देखा जो *लोग अपने पड़ोसी से जलन के कारण करते हैं। यह भी व्यर्थ और मन का कुढ़ना है।
सभोपदेशक 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 4:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 यूहन्ना 3:12 (HINIRV) »
और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्ट से था, और जिस ने अपने भाई की हत्या की। और उसकी हत्या किस कारण की? इसलिए कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धार्मिक थे। (भज. 38: 20)

सभोपदेशक 1:14 (HINIRV) »
मैंने उन सब कामों को देखा जो सूर्य के नीचे किए जाते हैं; देखो वे सब व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है।

सभोपदेशक 4:4 पर मौलिक बोध: परिश्रम और ईर्ष्या के पीछे छिपा व्यर्थकर्म
मुख्य व्याख्या: जब लोग अपने पड़ोसियों के सफल कार्यों को देखकर जलन पैदा करते हैं, तो यह प्रेरणा के स्थान पर पक्षपात, प्रतिस्पर्धा और अहंकार की चिंगारी बन जाती है। ऐसे क्षण में सफलता के पीछे छिपी वास्तविकता—कौन-सी प्रेरणा है—खोजनी चाहिए। साथी के काम से जलन उद्वेग और व्यर्थता को जन्म देती है, जो जीवन के उद्देश्य और परमेश्वर की योजना के अनुरोध से भटकाती है। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो सफलता के पीछे motive का संतुलन और अपनी दिशा का आह्वान है, न कि दूसरे के माने जाने की चाह।
व्याख्या के संदर्भ में (साहित्यिक संदर्भ)
सभोपदेशक का यह सिद्धांत akālish पर जोर देता है कि मानव-सफलता पर घोर ईर्ष्या एक व्यावहारिक और नैतिक समस्या है। यह युक्ति बताती है कि कैसे सामाजिक तुलना (compare-and-contrast) से नकारात्मक भाव उभरते हैं—क्योंकि लोग दूसरों के लाभ को देखकर अपने लिए मूल्य बनाते हैं, बजाय इसके कि परमेश्वर की योजना के भीतर अपने क्षमताओं को कैसे विकसित करें।
धार्मिक महत्व
यह विचार कि “यह भी व्यर्थ और मन का कुढ़ना है” जीवन के अध्यात्मिक परीक्षणों में एक मार्गदर्शक चेतावनी बन जाता है। परमेश्वर की दृष्टि में वास्तविक सफलता वह है जिसमें व्यक्ति अपने दायित्वों को ईमानदारी और प्रेम के साथ निभाए, न कि दूसरों की उपलब्धियों से ईर्ष्या करे। यह पाठ आज भी सामाजिक प्रतिस्पर्धा के समय पर विचार देता है कि तनाव कम करने और आत्म-स्वीकृति पुख्ता करने के तरीके क्या हों।
Cross-References (संकेत-प्रकाश)
विचारणांचे प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
सभोपदेशक 4:4 यह दर्शाता है कि सामाजिक तुलना से उपजने वाली जलन न तो व्यक्तिगत आचार को सुदৃঢ় करती है और न ही समुदाय के लिए लाभकारी होती है। वास्तविक शांति और संतोष तब मिलते हैं जब हम अपनी भूमिका, अपने इनाम और लक्ष्यों को ईमानदारी से परमेश्वर की दृष्टि में देखते हैं—यहाँ तक कि दूसरों के लाभ देखकर—not अपने भीतर की खुशी और अपने दायित्वों की पूर्ति से भी दूर नहीं जाना चाहिए।
पूर्व-प्रकाश/उद्धरण (महत्त्वपूर्ण)
यह commentary Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain तरेखों से प्रेरित सामान्य प्रवचन-धारा को समाहित करता है।
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