Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इफिसियों 1:9 पर टिप्पणी — उसे समझना और अपनाना
पाठांश का संक्षिप्त परिचय: पवित्र लेखन में किसी भी श्रेणी की पवित्रता, उद्देश्य और प्रयोजन को जानना ईश्वर के कार्य को समझने का मूल है। इस आयत के अनुसार ईश्वर ने अपनी इच्छा के अनुसार हमें भेद दिया है—यानी हमें अपने सोचे-समझे उद्देश्य के अनुसार दिखाई देने और स्वीकार करने का मार्ग खोल दिया है। यह भेद या गुप्त भेद किसी के निजी विचारों की तरह नहीं, बल्कि ईश्वर के सुंदर और त्रुटिहीन योजना का प्रकटीकरण है।
आयत का पाठ और उसका स्थान
कुल मिलाकर इफिसियों का पहला अध्याय प्रेरित पौल ने मसीह में हमारे उच्च सम्मान, उद्धार और आदर्श स्थिति की घोषणा की है। Verse-9 में विशेष ध्यान आता है कि परमेश्वर ने अपने उद्देश्यों को हमारे साथ साझा किया है—यह एक कुंजीभेद है: हमारे लिए ईश्वर ने अपने भले अभिप्राय और इच्छा के अनुसार चीजें बताई हैं जिससे हम आश्वस्त हों कि हमारे जीवन का सार क्या है और कैसे उसका भागी बनें।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर का ज्ञान और उद्धार केवल उसे जानने वालों के लिए है। वह अपने आप में ठान चुका था कि क्या करना है और कैसे करना है—हमें भी उस योजना के अनुसार चलना है। यह आयत हमें यह सिखाती है कि विश्वासयोग्यता का लक्ष्य जानना है: ईश्वर ने किस उद्देश्य से हमें बुलाया है, ताकि हम उसकी महिमा के लिए जीएं।
हान - मतभेदों का संक्षेपण
यहाँ तीन प्रमुख विचार मिलते हैं:
अन्य पवित्र ग्रन्थ से संज्ञान
यह आयत अन्य स्थानों के साथ समन्वय दिखाती है:
याकूब 1:5 जैसी शिक्षाएं यह दिखाती हैं कि ईश्वर ज्ञान का प्रदाता है और उसे धीर-धीरे प्रकट किया जाता है; रोम 8:28-30 में परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार हर चीज को महान उद्देश्य के लिए मिलाने की बात है। यह सभी संरेखण हमें यह बताते हैं कि भेद केवल परमेश्वर की कृपा से आता है और यह विश्वासियों के जीवन के लिए मार्गदर्शन है।
व्यावहारिक आवेदन
हम कैसे इस भेद को अपने जीवन में लागू करें?
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
इन्हें देखने पर हमें लगता है कि नया और पुराना नियम एक साथ एक दिशा में बोलते हैं:
- रोम 8:28-30: परमेश्वर के उद्देश्य से हर घटना का निर्माण;
- याकूब 1:5: ईश्वर से मार्गदर्शन चाहना और देना;
- यूहन्ना 17:24: पिता की इच्छा के अनुरूप एकात्मता और महिमा का उद्देश्य.
संक्षेप: संदेश का सार
ईश्वर ने अपनी इच्छा के अनुसार हमें बताने, समझाने और साथ चलने के लिए चुना है। हमारी भूमिका है कि हम उसकी महिमा के लिए जीवन बिताएं, भेद को स्वीकार करें और विश्वास में आगे बढ़ें। यह आयत एक प्रेरणा है—क्योंकि परमेश्वर ने अपने आप में स्पष्ट, सारभूत उद्देश्य रखा है और उसे जानना-मानना ही हमारी सांसारिक यात्रा का उद्देश्य बनना चाहिए।
उद्धृत अवसर के लिए नोट: नीचे दिये गए लेखक-उद्धरण स्पष्ट रूप से उपलब्ध होने पर ही उद्धृत हैं।