इब्रानियों 6:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

ताकि दो बे-बदल बातों के द्वारा जिनके विषय में परमेश्‍वर का झूठा ठहरना अनहोना है, हमारा दृढ़ता से ढाढ़स बन्ध जाए, जो शरण लेने को इसलिए दौड़े हैं, कि उस आशा को जो सामने रखी हुई है प्राप्त करें। (गिन. 23:19, 1 शमू. 15:29)

इब्रानियों 6:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

इब्रानियों 6:18 का स्पष्ट अर्थ

यह वाक्य कहता है कि परमेश्वर ने जो दो अपरिवर्त्य बातों की है—क्योंकि उसका वचन सच और अटूट है—इनके द्वारा हमारा दृढ़ भरोसा और साहस बढ़े ताकि जो शरण लेने को तैयार हैं, वे उस आशा तक पहुँच सकें जो सामने रखी गई है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

पत्र इब्रानियों में लेखक विश्वास की दृढ़ता, हिमती और स्थिर आशा पर बल देता है। व्याख्या के अनुसार, पुराने विधान में दो अपरिवर्त बातों का सुदृढ़ आश्रय यह बताता है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं में परिवर्तन नहीं होता और उनके प्रचारित वचन में सत्य है। यह verses एक ऐसी सुरक्षा की ओर संकेत करते हैं जिसमें ग्रहणशील विश्वासी अनुभव करते हैं कि परमेश्वर ने जो कहा है, वह न कभी झूठा रहा है न अपूर्ण।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

  • स्थायित्व का स्रोत: परमेश्वर के शब्दों की विश्वसनीयता—ये दोनों बातें एक साथ दी गई हैं ताकि भविष्यवाणी और प्रतिज्ञा में एक अडिग आधार बने।
  • द्वैध शरण: वे लोग जो आशा के लिए दौड़ रहे हैं, वे किसी वैकल्पिक सहायता पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की स्थिर प्रतिज्ञाओं पर निर्भर होते हैं।
  • आशा की गतिशीलता: सामने रखी हुई आशा न केवल एक कल्पना है, बल्कि वह एक निश्चित लक्ष्य है जिसे सच्चाई के साथ प्राप्त किया जाएगा।

संकेतित क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त अर्थ

1) गिनती 23:19: परमेश्वर का वचन परिवर्तन नहीं करता; वह जहाँ है वही रहता है। इसका आधार है कि प्रतिज्ञाओं में स्थिरता है।

2) 1 शमूएल 15:29: जो मनुष्य पर निर्भर है वही अस्थिर है, पर जो परमेश्वर पर है वही अडिग रहता है। इसका संकेत है कि विश्वास का स्थायित्व परमेश्वर की धुरी पर है।

कहानीनुमा थीम का संक्षेप

  • विश्वसनीय प्रतिज्ञाएँ बनाम अस्थिर आशाएँ
  • शरण लेना: मानव सहायता से अधिक परमेश्वर के सिद्घांतों पर भागना
  • आशा का लक्ष्य: सामने दिखी हुई इनाम की स्थिति को पाने की दृढ़ इच्छा

निष्कर्ष और व्यवहारिक अनुप्रयोग

हमारे जीवन में दो अटूट बातों पर टिके रहना चाहिए: परमेश्वर के वचन की सत्यता और उसके प्रतिज्ञाओं की स्थिरता। इससे हमारा हृदय दृढ़ रहता है, भय-रहित होकर परमेश्वर के आगे शरण लेते हैं, और वह आशा जो निर्धारित है, उसे पाने की उम्मीद में टिके रहते हैं। खर्चीली चिंताओं में न खोएं, बल्कि अपनी आशा को उन ठोस बिन्दुओं पर रखें जो उद्धार के पथ को सुनिश्चित करते हैं।

मूल उद्धरणों का संक्षिप्त पंक्तियोग: कोई पूर्ण उद्धरण प्रस्तुत नहीं किया गया है, पर यह भाग Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के अनुकूल एक संयुक्त सार है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

इब्रानियों 6:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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