Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इब्रानियों 6:18 का स्पष्ट अर्थ
यह वाक्य कहता है कि परमेश्वर ने जो दो अपरिवर्त्य बातों की है—क्योंकि उसका वचन सच और अटूट है—इनके द्वारा हमारा दृढ़ भरोसा और साहस बढ़े ताकि जो शरण लेने को तैयार हैं, वे उस आशा तक पहुँच सकें जो सामने रखी गई है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पत्र इब्रानियों में लेखक विश्वास की दृढ़ता, हिमती और स्थिर आशा पर बल देता है। व्याख्या के अनुसार, पुराने विधान में दो अपरिवर्त बातों का सुदृढ़ आश्रय यह बताता है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं में परिवर्तन नहीं होता और उनके प्रचारित वचन में सत्य है। यह verses एक ऐसी सुरक्षा की ओर संकेत करते हैं जिसमें ग्रहणशील विश्वासी अनुभव करते हैं कि परमेश्वर ने जो कहा है, वह न कभी झूठा रहा है न अपूर्ण।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
संकेतित क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त अर्थ
1) गिनती 23:19: परमेश्वर का वचन परिवर्तन नहीं करता; वह जहाँ है वही रहता है। इसका आधार है कि प्रतिज्ञाओं में स्थिरता है।
2) 1 शमूएल 15:29: जो मनुष्य पर निर्भर है वही अस्थिर है, पर जो परमेश्वर पर है वही अडिग रहता है। इसका संकेत है कि विश्वास का स्थायित्व परमेश्वर की धुरी पर है।
कहानीनुमा थीम का संक्षेप
निष्कर्ष और व्यवहारिक अनुप्रयोग
हमारे जीवन में दो अटूट बातों पर टिके रहना चाहिए: परमेश्वर के वचन की सत्यता और उसके प्रतिज्ञाओं की स्थिरता। इससे हमारा हृदय दृढ़ रहता है, भय-रहित होकर परमेश्वर के आगे शरण लेते हैं, और वह आशा जो निर्धारित है, उसे पाने की उम्मीद में टिके रहते हैं। खर्चीली चिंताओं में न खोएं, बल्कि अपनी आशा को उन ठोस बिन्दुओं पर रखें जो उद्धार के पथ को सुनिश्चित करते हैं।
मूल उद्धरणों का संक्षिप्त पंक्तियोग: कोई पूर्ण उद्धरण प्रस्तुत नहीं किया गया है, पर यह भाग Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के अनुकूल एक संयुक्त सार है।