Old Testament
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अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



अय्यूब 16:19 — उस समय भी स्वर्ग में मेरा साक्षी है
परिदृश्य का परिचय: अय्यूब अपनी गहरी पीड़ा के बीच ईश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि अपने अपने उच्चतम न्याय को ठेस न लगे यह सोचकर अपने बंधनों का स्पष्ट उल्लेख कर रहा है। यह पद उन दिनों का है जब वह अपने मित्रों के तीखे तर्कों के बीच ईश्वर के न्याय के बारे में गहरी असम्मत स्थितियों से जूझ रहा है। यहां वह कहता है कि अभी भी स्वर्ग में उसका साक्षी है और उसका गवाह ऊपर है, भले ही पृथ्वी पर उसे दोषी ठहराया जा रहा हो।
पाठ से दीर्घमान्य संकेत: ईश्वर और विश्वास
यह वाक्य महान चित्रण प्रस्तुत करता है कि भले संकट घटित हो, पर परमेश्वर का दृष्टि-आकाश में साक्ष्य और गवाही सत्य के साथ रहते हैं। अय्यूब मानता है कि स्वर्ग में उसका साक्षी है—यानी उसका निष्ठावान दयालु प्रभु, जो कहे जाने से अधिक सत्य को देखता है, वह उसकी ओर से गवाही देता है। यह दृश्य विश्वास के आधार पर एक आंतरिक आश्वासन देता है: दुख भी सत्य को मिटा नहीं सकता और परमेश्वर का न्याय, निष्ठा और पक्षपात रहित साक्ष्य, ऊपर से पर्याप्त है।
संक्षिप्त शब्दार्थ और चिह्न
अन्य प्रासंगिक पवित्र ग्रंथ
इन आयतों के विचारों से जुड़ी कुछ सूक्तियाँ, जो विश्वासी को कठिन समय में भरोसा देती हैं:
प्रसंगिक cross-references और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) जमील आत्म-गवाही की पुष्टि — याकूब 5:11 जैसे पाठों के पीछे भी यह विचार मिलता है कि विश्वास की असुविधाओं में भी ईश्वर की साक्षी मौजूद है।
2) न्याय का स्मरण — भजन 3 से लेकर भजन 31 तक, नम्रता और विश्वास के साथ प्रत्यक्ष न्याय ऊपर से आता है; यह विचार यहां अय्यूब के भावों के अनुरूप है।
3) धर्मग्रंथीय गवाही — न्याय और सत्य के संकेत ईश्वर के आशीर्वाद के साथ जुड़े रहते हैं, भले ही मानवीय अनुभव विपरीत हो।
आज के लिए आवेदन
1) संकट के समय भी परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखें; आत्म-समर्थन में न होकर परमेश्वर के साक्षी पर निर्भर रहें।
2) लोगों के तर्कों के बीच भी अपने आंतरिक प्रमाण को न खोएं—ईश्वर की गवाही आपके सत्य की रौशनी बनती है।
3) परेशानियों में भी याद रखें कि स्वर्गीय गवाही हमारे पक्ष में है; यह जीवन के हर दबाव में धैर्य और नम्रता के साथ आगे बढ़ने का स्रोत है।
शब्द-कोष और क्लासिक टीका
इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचार मिलते-जुलते संकेत देते हैं: - Henry कहते थे कि भले लोकलुभावन तर्क नहीं चले, पर परमेश्वर की गवाही सत्य है। - Barnes ने कहा कि आकाशीय साक्षी का विचार विश्वासी के लिये सुरक्षा और संबल है। - Clarke ने व्याख्या की कि यह दृश्य विश्वास-युग के संकटों में परमेश्वर की उपस्थिति का संकेत है।
नोट: इन तीनों टीका-कर्ताओं से उपलब्ध संक्षिप्त उद्धरण यदि मिले, तो नीचे उद्धृत हैं: "मेरा गवाह ऊपर है" आदि ऐसे संकेत उनके विचार-रचनों में व्यक्त हुए हैं।
परिवर्तनशील समय में यह पद हमें यह याद दिलाता है कि आकाश में हमारा साक्षी रहता है—वही गवाही सत्य और न्याय के साथ क्लियर करता है, और हमें धरती पर भी धैर्य और उम्मीद देता है।