Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



अय्यूब 18:12 — तुरंत संदर्भ और संदेश
पद आता है इलनेदार व शास्वत न्याय के विचार से मुँह खोलता है: दुख और विपत्ति का तात्पर्य सिर्फ बाहरी कठिनाइयों से नहीं है, बल्कि आत्म-स्थिरता और परमेश्वर के न्याय की सूझ से है। यह दिखाता है कि दुष्ट के भाग्य में न केवल क्षणिक कष्ट, बल्कि पूर्ण-निर्धारित विपत्ति भी साथ रहती है।
पุตบอล स्थिति का परिचय
यह पाठ अय्यूब की दोस्त-समिति के समय बनती परीक्षा का प्रतिफल है, जब मित्रों की आलोचनात्मक भविष्यवाणी यह कहती है कि दुष्ट की विपत्ति उसकी ही सजा है। लेकिन यहाँ कंठस्थ शब्द यह संकेत करते हैं कि विपत्ति उसके पास ही व्यवस्थित रूप से ठहरी रहती है, जिसका अर्थ है कि क्लेश और कष्ट का एक क्रम स्थिर, गहरे और निरंतर बना रहता है।
ईश्वर या faith के बारे में पाठ से क्या निकलता है
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर के न्याय की गिनती केवल बाहरी सुख-शांति तक नहीं रहती; असहायों पर भी उसकी निगाह है और जो अविश्वास, घमण्ड या दुष्टता से जीते हैं, उन्हें उनके कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ता है। विपत्ति की स्थायित्व भरी प्रकृति दर्शाती है कि परमेश्वर का न्याय एक जागरूक, क्रमबद्ध विवेक है, जो अंततः हर जीव के आचरण के अनुसार चलता है।
क्यों और क्या समझना जरूरी है (महत्वपूर्ण शब्द/चित्र)
- बल दुःख से घट जाएगा: यहाँ “बल” से तात्पर्य है दुष्ट व्यक्ति की शक्ति, जो समय के साथ कम पड़ जाती है क्योंकि उसकी घमंड और पाप की वजह से उसकी स्थिति ढीली हो जाती है; दुःख उसे भीतर से तोड़ देता है।
- विपत्ति उसके पास ही तैयार रहेगी: यह कहता है कि दुष्ट के लिए कठिनाइयाँ भूली नहीं जातीं; वे उसके आस-पास, उसकी सुविधा के भीतर जम जाती हैं, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि उसकी योजनाओं और चैन-आराम के रास्ते पर विपत्ति का नियंत्रण बना रहता है।
Related passages (संछेप में, तात्पर्य सहित)
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
- परिस्थितियाँ कितनी भी कठोर लगें, विश्वास करें कि परमेश्वर का विवेक और न्याय चलता है; अतः घबराहट के बजाय, अपने आचरण को पवित्र बनाने का आग्रह रखें।
- विपत्ति के दौरान धैर्य रखें, क्योंकि दुष्ट की स्थिरता कभी-कभी उसी पर उलट पड़ती है; हमारी अपेक्षा परमेश्वर की सत्यता से होनी चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में और अर्थ सहित)
नीचे उद्धृत पाठों के विचार से यह संदेश मजबूत होता है:
महत्वपूर्ण उद्धरण ( Matthew Henry / Albert Barnes / Adam Clarke से अगर उपलब्ध): शाब्दिक संहिताओं के पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दिए जा रहे, परन्तु उनके अनुसार—दुष्ट का भाग्य दुष्कर्मों के परिणामस्वरूप स्थिर और निरंतर विपत्तियों के रूप में आता है; न्याय के ऐसे क्रम से परमेश्वर की सत्ता स्पष्ट होती है।