Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42


क्यों यह आय्यूब 23:9 मायने रखता है
अय्यूब के दुःख के बीच उसका प्रश्न उठता है: कहाँ है मेरे परमेश्वर? वह जहां मुझे स्पष्ट न दिखे, वहीं मेरे दुखों के कारण भी उसकी गहराई खोज रहे हैं. यह पद हमें यह सिखाता है कि ईश्वर कभी साथ नहीं छोड़ते, बल्कि हमारी दृष्टि से दूर हो सकता है ताकि हम उसकी महिमा और गुणों के लिए गहराई में खोज करें।
शब्दार्थ और मूल संदर्भ
पद 9 में अय्यूब कहता है कि जब वह बाईं ओर काम करता है, उसे दिखाई नहीं देता; दाहिनी ओर ऐसा छिप जाता है कि उसे वह दिखाई नहीं पड़ता। यह एक अनुभवी विश्वास की शिकायत है, न कि ईश्वर के अविनाशी अस्तित्व पर संदेह। अय्यूब अपनी अनुभूति के अनुसार ईश्वर की गिरफ्त से बाहर लगते हैं—वह पहचाने नहीं जाते; परन्तु उनका तात्पर्य है कि वह ईश्वर की क्रिया और तारतम्य को नहीं समझ पा रहा है।
मुख्य संदेश
1) ईश्वर हर समय हमारे साथ नहीं दिखते, पर वह रहते हैं।
2) संकट और अंधकार के समय में विश्वास की परीक्षा होती है—क्योंकि गहराई से देखने पर ही ईश्वरीय योजना स्पष्ट होती है।
3) हमारी स्मृतियां और अनुभव उस सत्य के अनुरूप नहीं होते जब तक कि ईश्वर अपने समय में मार्ग दिखाते हैं।
विवेचित विवेक: अन्य बाइबिल विचार
• परमेश्वर की योजनाएँ मानवीय समझ से परे हो सकती हैं; लेकिन सत्य यह है कि वह व्यक्ति के अंतर्क्षेत्र में भी सक्रिय रहते हैं।
• धैर्य और विश्वास की कसौटी में परिशुद्धता—जो कुछ भी हो रहा है, वह ईश्वर की भीतरी प्रेरणा और नियति का भाग हो सकता है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनका महत्व
इन संदर्भों के साथ, आय्यूब 23:9 सत्य के साथ खड़ा है कि विपत्ति के बीच भी ईश्वर का मार्ग खोजने की एक पवित्र आवश्यकता है।
निष्कर्षित devotional thought
जब ईश्वर अदृश्य लगता है, तब भी हमारी आत्मा को उनकी निकटता की प्रतीक्षा करनी चाहिए। अय्यूब की तरह हमें धैर्य से अपनी अवगाहना बनाए रखनी चाहिए—क्योंकि ईश्वर अपने समय पर स्वयं को स्पष्ट करेंगे। एक ऐसी आत्मा जो दुःख के बाद भी ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखती है, वह बिना देखे भी विश्वास की रोशनी पाती है।