Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
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अय्यूब 40:18 — Immediate Setting
यह पद अय्यूब की भयंकर आत्म-समाधि तथा ईश्वर के साथ चल रहे संघर्ष के बीच आता है। ईश्वर ने अय्यूब को अपने ज्ञान-व्यापक अधिकार और सृष्टि के विस्तार-स्वरूप से बाँधना शुरू किया। इस शिखर-प्रश्न-संवाद के बीच, यह वाक्य उसकी शक्तिशाली हड्डियों और पसलियों के ठोस रूपकों से उसकी कमजोरी और मानव सीमा को उजागर करता है।
जो पाठ बताता है — शब्दों और छवियों की समझ
पंक्ति में “हड्डियाँ मानो पीतल की नलियाँ हैं” और “पसलियाँ मानो लोहे के बेंड़े हैं” एक तीव्र दृश्यमान चित्रण है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के सामने मानव अस्तित्व कितना नाजुक और निर्बल है, फिर भी उसकी संरचना का बुनियादी निर्माण, मानवीय शारीरिक चिर-स्थायित्व की कल्पना से भी भारी है। संदर्भ में यह असहायता के साथ-साथ ईश्वर के नियंत्रण के तथ्य को रेखांकित करता है— संसार-मा-मानव के भीतर भी परमेश्वर ही जीवन-सार देता है।
गौर करने योग्य शब्द-छवियाँ
अन्य प्रासंगिक पाठ
- इब्री साहित्य में ईश्वर की महिमा, ज्ञान और सामर्थ्य का उद्घाटन: व्यवस्थाएँ और शक्तियाँ परमेश्वर के हाथों में हैं।
- दूसरे स्थानों पर— ईश्वर के मार्गदर्शन में दृढ़ विश्वास और परिक्षाओं के दौरान धैर्य रखने की exhortation।
Cross references (संक्षेप):
नोट: इन संदर्भों के पाठ पूरे वाक्य नहीं दिए जाते; केवल विचारार्थ संकेत हैं ताकि पाठ के साथ गहराई से जुड़ाव बना रहे।
समझ और विश्वास पर संकेत (आज के संदर्भ में)
यह पद यह दिखाता है कि ईश्वर के सामने मानव प्रयास, ज्ञान या शक्तिशाली आक्शन कितने ही ठोस क्यों न हों, वे सब उसकी योजना के भीतर आकार लेते हैं। एक खुले मन से स्वीकारना चाहिए कि हमारी समझ की सीमाओं के बावजूद परमेश्वर की सत्ता और मार्गदर्शन बना रहता है। यह विश्वास नहीं कि दबी हो, बल्कि यह जानना कि कठिनाइयों के बीच भी ईश्वर की पकड़ मजबूत है।
छोटा-सा व्यवहारिक मार्गदर्शक
अंतिम सार
अय्यूब 40:18 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की शक्ति और ज्ञान मानवीय कल्पनाओं से परे हैं। हमारे शरीर-रचना की कठोरता और सुरक्षा-परक सोच धीरे-धीरे क्षीण होती है जब हम ईश्वर के विशाल सामर्थ्य के सामने सिकोड़ते हैं। इस कठिनाई-काल में भी परमेश्वर के साथ निष्कपट विश्वास बनाए रखें— क्योंकि वही है जो अंततः 우리의 ढाल और चट्टान है।
उद्धृत पंक्तियाँ यदि आवश्यक हों तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से मिलने वाले छोटे उद्धरण खुले रूप में यहाँ उपलब्ध कराए जा सकते हैं, परन्तु इस पाठ के लिए मूल अर्थ और संपूर्ण सन्देश हमारी समष्टि-व्याख्या में समाहित है।