Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 18:1 यूहन्ना 18:2 यूहन्ना 18:3 यूहन्ना 18:4 यूहन्ना 18:5 यूहन्ना 18:6 यूहन्ना 18:7 यूहन्ना 18:8 यूहन्ना 18:9 यूहन्ना 18:10 यूहन्ना 18:11 यूहन्ना 18:12 यूहन्ना 18:13 यूहन्ना 18:14 यूहन्ना 18:15 यूहन्ना 18:16 यूहन्ना 18:17 यूहन्ना 18:18 यूहन्ना 18:19 यूहन्ना 18:20 यूहन्ना 18:21 यूहन्ना 18:22 यूहन्ना 18:23 यूहन्ना 18:24 यूहन्ना 18:25 यूहन्ना 18:26 यूहन्ना 18:27 यूहन्ना 18:28 यूहन्ना 18:29 यूहन्ना 18:30 यूहन्ना 18:31 यूहन्ना 18:32 यूहन्ना 18:33 यूहन्ना 18:34 यूहन्ना 18:35 यूहन्ना 18:36 यूहन्ना 18:37 यूहन्ना 18:38 यूहन्ना 18:39 यूहन्ना 18:40



सार-सार में अर्थ
यूहन्ना 18:27 में पतरस का दोबारा इन्कार और मुर्गे की बाँग एक सावधान स्मृति है: उसकी एक नहीं, बल्कि उसकी तीनों बार की असफलता के भीतर कितनी जल्दी आत्म-संयम टूट सकता है, और कैसे चमत्कारिक रूप से पूर्व-सूचित होने के बाद भी व्यक्ति अपने आप से लड़ता रहता है। प्रभु यीशु के विरुद्ध इन्कार की यह घटना पवन-परिवर्तनों के समय में भी सत्य है: इस इन्कार से पतरस अपने पहले शपथ-स्वरूप समर्पण की आलोचना करता है, और वहीं से पवित्र आत्मा की शक्ति के लिए जागृति का प्रस्थान होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना गलील के सुसमाचारन में उन घटनाओं के क्रम में घटती है जब यीशु इश्तेगपुल के सामने उन पर लगे आरोपों के बीच पिलातुस के समक्ष एक सम्मुखता बनाते हैं। पतरस, जो पहले यीशु से वचन देता है कि वह उसके लिए अपनी जान दे देगा, पात्र-जनक कठिनाई में घिरकर तीन बार इन्कार कर देता है – और साथ ही पहला मुखर दोष एक बार नहीं, बल्कि तीन बार उत्पन्न होता है। मुर्गे की बाँग सबसे पहले आंचलिक, फिर आध्यात्मिक चेतावनी का प्रतीक बनती है: धैर्य और आत्म-नियंत्रण की कमी से पूर्वसूचित चेतावनियाँ भी हाथ से निकल जाती हैं।
व्याख्यात्मक विचार
छोटे थेमाटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
यूहन्ना 13:36-38: यीशु आत्म-समर्पण की तैयारी में पतरस से एक स्पष्ट चेतावनी देते हैं; यह इन्कार के अनुभव के तात्परिक परिप्रेक्ष्य को समझाता है। अध्याय मक्खन 22:31-32: मुकाबला-घटाओं के बीच प्रेरणा—शास्त्र में विश्वासियों के गिरकर उठने का सिद्धांत। मत्ती 26:69-75: पतरस का इन्कार उसी घटना के रूप में चित्रित होती है; यह पूर्वसूचना की पुष्टि करता है कि मसीह-यात्रा में त्रुटियाँ होती हैं, परन्तु क्षमा और पुनर्प्रेषण का मार्ग खुला रहता है।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
1) गलती के बावजूद प्रभु के प्रति भरोसा बनाए रखें; पश्चाताप और क्षमा के लिए खुला दिल रखें। 2) दबाव के समय मित्र-समूह की संगति और पवित्र शास्त्र की स्मृति मजबूत बनाती है। 3) अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर ईश्वर की कृपा पर निर्भर रहें; यह अनुभव आपकी आस्था को मजबूत बनाता है।
कथनात्मक स्रोतों का संकेत
यह व्याख्या Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के समेकित संदर्भ के साथ संकलित है, और आवश्यक जगह पर उनसे संक्षिप्त उद्धरण भी संकेतित किया गया है:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार यह घटना पतरस के इन्कार के गहरे आत्म-परख और यीशु के लिए सच्चे समर्पण की आवश्यकता को उजागर करती है।
एल्बर्ट बार्न्स मानते हैं कि भय के कारण होने वाले इन्कार मानव की दुर्बलता को दिखाते हैं, परन्तु परमेश्वर की योजना में नहीं रुकते।
आदम क्लार्क यह देखते हैं कि पतरस के इन्कार के पीछे शीघ्रता नहीं, बल्कि अन्तर्मन की ज्वाला टकटकी लगाये हुए है; प्रभु के पुनः-साक्षात्कार के क्षण से पुनः दृढ़ता मिलती है।
यदि आप चाहें, तो मैं इन उद्धरणों के छोटे-छोटे शब्दों को यहाँ सीधे उद्धृत कर सकता हूँ, परन्तु पूरा पाठ नहीं दे रहा हूँ ताकि पाठ-स्वतंत्रता बनी रहे।
यही प्रेरणा पस्त-हृदया को भी आशा देती है: गलती के बाद भी परमेश्वर की कृपा से हमारा मार्ग फिर से प्रकाशित हो सकता है।