Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 18:1 यूहन्ना 18:2 यूहन्ना 18:3 यूहन्ना 18:4 यूहन्ना 18:5 यूहन्ना 18:6 यूहन्ना 18:7 यूहन्ना 18:8 यूहन्ना 18:9 यूहन्ना 18:10 यूहन्ना 18:11 यूहन्ना 18:12 यूहन्ना 18:13 यूहन्ना 18:14 यूहन्ना 18:15 यूहन्ना 18:16 यूहन्ना 18:17 यूहन्ना 18:18 यूहन्ना 18:19 यूहन्ना 18:20 यूहन्ना 18:21 यूहन्ना 18:22 यूहन्ना 18:23 यूहन्ना 18:24 यूहन्ना 18:25 यूहन्ना 18:26 यूहन्ना 18:27 यूहन्ना 18:28 यूहन्ना 18:29 यूहन्ना 18:30 यूहन्ना 18:31 यूहन्ना 18:32 यूहन्ना 18:33 यूहन्ना 18:34 यूहन्ना 18:35 यूहन्ना 18:36 यूहन्ना 18:37 यूहन्ना 18:38 यूहन्ना 18:39 यूहन्ना 18:40

यूहन्ना 18:9 का तात्पर्य: वचन की पूर्ति और ईश्वरीय संरक्षण
पलायन के समय यीशु को गिरफ्तार करने के लिए लोग आगे बढ़े, तो मैदान में एक ही उद्देश्य था — उसका सामना करना और उसकी कुशलता से बच निकलना नहीं, बल्कि उसकी महान योजना पूरी हो सके। यह वचन बताता है कि Jesus ने जिन लोगों को पिता ने उसे सौंपा था, उनमें से एक को भी खोया नहीं गया। यह घटना गवाही देती है कि ईश्वर का शब्द और प्रयोजन निर्बिघ्न तरीके से पूरा होता है, भले ही आदमी की योजना कुछ भी क्यों न हो।
ईश्वर की धारणा और विश्वास पर प्रकाश
यह पंक्तिShows कि परमेश्वर कर्तव्यनिष्ठ हैं; उन्होंने अपने उद्धार के कार्य की सुरक्षा और पूर्णता सुनिश्चित की। यूहन्ना का यह उल्लेख एक भरोसेमंद संरक्षक की तरह है — पिता के द्वारा सौंपे गए शिक्षित, चुने हुए लोगों की रक्षा ईश्वर की भूमिका है। इसमें यह संकेत है कि प्रभु यीशु की माँग के अनुसार, उसने कहा जिसे तूने मुझे दिया, उनमें से एक को भी नहीं खोया; यह दर्शाता है कि प्रभु के साथ लगे रहने की सुरक्षा अवश्य बनी रहती है।
शब्दों के अर्थ और विचारणीय छवियाँ
संबद्ध क्रॉस-रेफरेंसे
• यिर्मयाह 31:1-3: पिता की निरंतर अनुग्रह और उद्धार के लिए चुने गए लोगों के प्रति स्थिर प्रेम। यह बताता है कि परमेश्वर कभी नहीं कहता कि मैं छोड़ दूँगा या भुला दूँगा।
• यूहन्ना 6:39-40: पिता की इच्छा अबोध नहीं रहती—जो पुत्र देता है, वह उसे पवित्रता में पुनः नष्ट नहीं होने देगा; यह उद्धार की पूर्णता का यथार्थगान है।
• यूहन्ना 10:28-29: जो मुझे दिया गया है उसे कोई छीन नहीं सकता; यह दृढ़ सुरक्षा दर्शाता है कि उद्धारकर्ता के फौलादी काम से कोई हट नहीं सकता।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
हम भी इस वचन से सीखते हैं कि ईश्वर ने अपने वचनों के साथ एक अटूट सुरक्षा बनायी है। जीवन की कठिनाइयों, असफलताओं या खतरे के समय में भी परमेश्वर की पूर्ति नहीं रुकती। विश्वासियों को चाहिए कि वे प्रभु पर भरोसा रखें, क्योंकि वे जानते हैं कि पिता ने उन्हें यीशु के साथ एक संगति में संजोया है और वही उन्हें बनाये रखेगा।
सार-सार
यूहन्ना 18:9 में विपक्षी शक्तियों के भय के कारण Jesus की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं के बीच भी ईश्वर की योजना सुरक्षित रहती है। यह वचन भरोसे का संदेश देता है कि प्रभु के साथ जो जोड़ा गया है, वह कभी खोया नहीं जाएगा; यह परम प्रेम और संरक्षण की गवाही है।
उद्धरण संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के छोटे उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे यदि आवश्यक हों तो नीचे दिए गए पाठ में छोटे स्वर में मिलेंगे:
“जो तूने मुझे दिया, उनमें से मैंने एक को भी न खोया” — यह टुकड़ा उनके नैतिक-अधिकार और सुरक्षा की पुष्टि करता है।