Old Testament
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यूहन्ना 2:9 का संदर्भ और अर्थ
यूहन्ना अध्याय 2 में कन्याकथा—कनान में जौ हर आने वाला परमेश्वर के कृपाधार की घोषणा के साथ शुरू होता है—दारुवे भोज के दौरान पानी से दाखरस बनने की चमत्कारपूर्ण घटना दिखती है। वहां के भोज-प्रधान ने पानी चखा और जान लिया कि यह वही जल से बना नहीं है जो पहले था; उसे एहसास हुआ कि यह असामान्य स्तर का, उत्तम स्वाद है, परन्तु उसे यह भी नहीं पता कि कैसे यह हुआ। किन्तु जो पानी निकालने वाले सेवक थे, वे जानते थे कि यह परिवर्तन कहाँ से आया है। इससे संकेत मिलता है कि चमत्कार का स्रोत और कारण गुप्त नहीं रहा, बल्कि परमेश्वर की कृपा और यीशु की पहचान उजागर हो रही है।
केंद्रीय अर्थ
इस वाक्य में कृष्णात्मक चमत्कार—पानी से दाखरस बनना—यूहन्ना के लेखन के अनुरूप संकेत है कि यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं और उनके पास जीवन की असाधारण क्षमता है। भोज-प्रधान की प्रतिक्रिया एक मानव-स्वीकृति है, परन्तु सेवकों की समझ यह दर्शाती है कि चमत्कार का वास्तविक प्रमाण और गूढ़ रहस्य परमेश्वर की योजना से जुड़ा है, न कि भीड़ की सोच से।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ
कई सार्वजनिक डोमिनियन टिप्पणीकार इस घटनाचक्र को यीशु की पहली महिमा और वर्ष-सम्भालने वाले चमत्कार के रूप में देखते हैं। मैथ्यूहेनरी कहता है कि भक्तों के लिए यह संकेत है कि प्रभु के आगे मानव समझ सीमित है, परन्तु ईश्वर का कार्य स्पष्ट होता है। (संदर्भ के लिए अन्य टिप्पणियाँ: एम्बएर्न्स, एडम क्लार्क)
व्यावहारिक चिंतन
हम स्वास्थ्य, सफलता या प्रसिद्धि के बजाय प्रभु की ओर दृष्टि बनाए रखें। जो घटनास्थल पर रहते हैं, वे केवल परिवर्तन देखते हैं, परन्तु जो आत्मा से जुड़ते हैं, वे परिवर्तन के स्रोत को पहचानते हैं। यह वाकया हमारे लिए यह स्मरण देता है कि परमेश्वर का समय और चमत्कार कभी-कभी पीछे की भूमिका में होता है, पर प्रभाव जीवन में स्पष्ट होता है।
क्रॉस-रेफरेंसे
1) यूहन्ना 1:14 – वेदना नहीं, वरन् वह दिव्य आत्मा का निवास देखना; यीशु की महिमा प्रकाशमान होती है।
2) यूहन्ना 2:11 – कुरआन के अनुसार यीशु का पहला चमत्कार, उसकी सिंहासन के साथ प्रभुता का उद्घोष।
3) याकूब 1:17 – हर अच्छी देन और पूर्ण उपहार ऊपर से आता है; इस चमत्कार का स्रोत परमेश्वर ही है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 2:9 में भोज-प्रधान की पहचान अंशतः अस्पष्ट है, पर सेवकों की स्पष्ट समझ indicates कि यह परमेश्वर की कृपा से किया गया चमत्कार है। यह संकेत है कि यीशु मसीह के रूप में परमेश्वर के महिमा को लेकर आना शुरू हो चुका है, और जो लोग आस्था से देखते हैं, वे सचमुच बदलाव के स्रोत को पहचान लेते हैं।
नोट: नीचे दिए गए पुरानी-प्रকাশित टिप्पणियों से बारीकी मिलती है—“यही समय है जब प्रभु की महिमा प्रकट होती है”—परन्तु वास्तविक उद्धरण केवल संक्षिप्त उद्धरण के रूप में चाहिए।