Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 3:1 यूहन्ना 3:2 यूहन्ना 3:3 यूहन्ना 3:4 यूहन्ना 3:5 यूहन्ना 3:6 यूहन्ना 3:7 यूहन्ना 3:8 यूहन्ना 3:9 यूहन्ना 3:10 यूहन्ना 3:11 यूहन्ना 3:12 यूहन्ना 3:13 यूहन्ना 3:14 यूहन्ना 3:15 यूहन्ना 3:16 यूहन्ना 3:17 यूहन्ना 3:18 यूहन्ना 3:19 यूहन्ना 3:20 यूहन्ना 3:21 यूहन्ना 3:22 यूहन्ना 3:23 यूहन्ना 3:24 यूहन्ना 3:25 यूहन्ना 3:26 यूहन्ना 3:27 यूहन्ना 3:28 यूहन्ना 3:29 यूहन्ना 3:30 यूहन्ना 3:31 यूहन्ना 3:32 यूहन्ना 3:33 यूहन्ना 3:34 यूहन्ना 3:35 यूहन्ना 3:36



यूहन्ना 3:34 — परमेश्वर की भेजी हुई बात
येशु ने कहा: जिसे परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है; क्योंकि वह आत्मा को नाप-नापकर नहीं देता। यह वचन यूहन्ना के Gospel में विश्वास, प्रेरणा और प्रत्यक्षता के बीच की एक गहरी जाँच प्रस्तुत करता है। यहाँ उद्घोषणा है कि परमेश्वर अपने भेजे हुए दूत, शिक्षकों और मसीह के सेवकों के माध्यम से मानव के समक्ष अपनी बात रखते हैं, पर उनका स्रोत परमेश्वर ही रहता है।
ईश्वर और विश्वास के प्रति पाठ का संकेत
यह वाक्य बताता है कि सत्य ऐसी सत्ता है जो केवल शब्दों से नहीं, बल्कि परमेश्वर से आती है। जो व्यक्ति परमेश्वर को भेजता है, उसकी बात भी परमेश्वर की ही निपूणता और सत्ता प्रदर्शित करती है। आत्मा नाप-नापकर नहीं देता का तात्पर्य यह है कि वह स्वयं की सीमाओं को छोड़कर, पूर्णता और आत्मिक परिवर्तन के साथ आशीष देता है—यह एक दिव्य वचन है, न कि मात्र मानव विचार।
शब्दों की व्याख्या और चित्र
Related passages (संयुक्त आयाम)
यदि किसी संदेश का स्रोत सत्य और आत्मा से जुड़ा है, तो यह अन्य स्थानों में भी मिलता है:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर अपने संदेश को निष्कपट और शक्तिशाली तरीके से देता है, ताकि विश्वासी में परिवर्तन और जीवन-समझ बने।
आधुनिक अनुप्रयोग
आज के जीवन में यह वचन हमें याद दिलाता है कि जो धर्मी प्रवचन और शिक्षा प्रभु से प्रेरित है, उसमें विश्वास की गहराई और परिवर्तनकारी प्रभाव रहता है। प्रचारक, शिक्षक, या आध्यात्मिक सलाहकार—जो भी परमेश्वर के भेजे गए माने जाते हैं, उनके संदेशों में आत्मिक सत्ता को पहचाना जाना चाहिए, न कि mere मानव तर्क को ही सर्वोपरि माना जाना चाहिए। यदि हम गहराई से सुनते हैं और आत्मा-प्रेरित पाठ को अपनाते हैं, तो हमारा आचरण और विश्वास नवीनीकृत होता है।
मूल लेखक-पूर्वव्यक्ति (नोट)
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरणों का संक्षिप्त और संयोजित उपयोग किया गया है; अगर वही उपलब्ध हों, वे नीचे के रूप में संकेतित हैं:
“जो परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है।” — Matthew Henry (संक्षिप्त सार)
“आत्मा नाप-नापकर नहीं देता।” — Albert Barnes (संक्षिप्त सार)
“यह संदेश आत्मा और जीवन से प्रेरित है; मनुष्य के तार्किक अनुमान से नहीं।” — Adam Clarke (संक्षिप्त सार)
इस पाठ का लक्ष्य है: परमेश्वर की ओर से भेजे गए दूतों के संदेशों में परमेश्वर की ही आवाज सुनना और उनके द्वारा दिए गए जीवन-परिवर्तन को अपनाना।